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Written By: Yogita Yadav | Published : May 23, 2019 2:49 PM IST
साइलेंट हार्ट अटैक उसे कहते हैं जब व्यक्ति में हार्ट अटैक के लक्षण महसूस हुए बिना ही दिल काम करना बंद कर देता है। पर अगर आप अपनी डे टू डे लाइफ पर ध्यान दें, तो समय रहते इसकी दस्तक को समझा जा सकता है। © Shutterstock.
साइलेंट हार्ट अटैक इन दिनों बढ़ती हुई जानलेवा बीमारियों में से एक है। अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए तो पीडि़त की मौत भी हो सकती है। साइलेंट हार्ट अटैक में वह लक्षण नजर नहीं आते, जिनसे हार्ट अटैक की दस्तक को समझा जाए। पर आज हम आपको उन स्थितियों के बारे में बता रहे हैं जो साइलेंट हार्ट अटैक का खतरा बढ़ा देती हैं।
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आंकड़े बताते हैं कि ज्यादातर साइलेंट हार्ट अटैक सोते समय होते हैं। अगर आप सोते समय सांस लेने में दिक्कत महसूस करते हैं, हांफते हुए आपकी नींद खुल जाती है या अपेक्षा से ज्यादा जोर से आप खर्राटे लेने लगत हैं तो यह दिल की सेहत के खराब होने के संकेत हैं। इसे स्लीप डिसऑर्डर के नाम से भी जाना जाता है। अगर आप इसे नजरअंदाज करते हैं, तो यह दिल का दौरा पड़ने की संभावना को बढ़ा सकता है।
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डे टू डे लाइफ में भी अगर आप पिछले कुछ दिनों से अतिरिक्त थकान का अनुभव कर रहे हैं, तो यह साइलेंट हार्ट अटैक का संकेत हो सकता है। अगर आपके दिन-प्रतिदिन का रूटीन या वर्कआउट में भी अतिरिक्त थकान महसूस करना आपके दिल के बाएं वेंट्रिकल की कमजोरी का संकेत दे रहा है। इसके अलावा अगर हृदय से शरीर के बाकी हिस्सों में रक्त पंप करने वाली मुख्य मांसपेशियां काम करना बंद कर दें, तो दिल ठीक से पंप नहीं कर पाएगा, जिसके परिणामस्वरूप दिल का दौरा पड़ सकता है।
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यह बाह्य धमनी रोग का एक सामान्य संकेत है, जिसे धमनियों का सिकुड़ना कहा जाता है, जो आपके अंगों, पेट और सिर में रक्त के प्रवाह को सीमित करता है। ऐसा तब होता है जब आपके पैरों से पर्याप्त रूप से रक्त प्रवाह नहीं हो पाता है। अगर आपके साथ भी चलने या दौड़ने के दौरान कुछ ऐसा होता है तो इसका मतलब है कि आपका दिल भी इन संभावित समस्याओं से घिरा हुआ है।
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जी खराब होना, उल्टी करने की इच्छा होना, बदहजमी या डकार जैसा महसूस होना केवल पेट खराब होने के संकेत नहीं है, बल्कि यह आपके दिल की समस्या का संकेत भी हो सकते हैं। आपके पाचन क्षेत्र मार्ग में तंत्रिकाएं हृदय की नसों के साथ निकटता से जुड़ी होती हैं। नतीजतन, जो समस्या आपके दिल की हो सकती है वह कभी-कभी पेट की परेशानी के रूप में सामने आती है।
चिंता के कई लक्षण जैसे सीने में दर्द, सांस की तकलीफ और दिल की धड़कन, दिल का दौरा पड़ने के भी संकेत देती हैं, विशेषकर तब, जब आप तनावपूर्ण स्थिति से निपटने में सक्षम नहीं हैं। चिंता आपके दिल पर भी अतिरिक्त दबाव डाल सकती है। तनाव महसूस करने से आपकी रक्त वाहिकाएं संकुचित होती हैं और आपके हृदय की गति बढ़ती हैं। इन दोनों ही अवस्थाओं में दिल का दौरा पड़ने का जोखिम होता है।