
अंजू रावत
अंजू रावत एक अनुभवी हेल्थ, फिटनेस, रिलेशनशिप, ब्यूटी और लाइफस्टाइल लेखक हैं, जिन्हें इन विषयों पर लिखने ... Read More
Medically Verified By: Dr. Raman Kumar
monsoon infection
बारिश के मौसम में जगह-जगह पानी जमा रहता है, नमी ज्यादा होती है, पानी दूषित हो जाता है, जिनकी वजह से इस मौसम में कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा ज्यादा बना रहता है। इस मौसम में सिर्फ मच्छरजनित बीमारियों का ही नहीं, बैक्टीरियल और फंगस की वजह से होने वाले संक्रमणों का जोखिम भी ज्यादा रहता है। ज्यादातर लोग इस मौसम में होने वाले बुखार, सर्दी-जुकाम, सिरदर्द, कमजोरी और थकान जैसे लक्षणों को सामान्य समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। जबकि, ये मौसमी संक्रमणों का संकेत भी हो सकते हैं। जिनमें शामिल हैं-
Centers for Disease Control and Prevention के अनुसार, लेप्टोस्पायरोसिस एक बैक्टीरियल संक्रमण है, जो संक्रमित जानवरों के मल-मूत्र से दूषित पानी या मिट्टी के संपर्क में आने से फैलता है। बारिश और बाढ़ जैसी स्थितियों में इस संक्रमण का खतरा काफी बढ़ जाता है। तेज बुखार, मांसपेशियों में दर्द, ठंड लगना, सिरदर्द होना आदि लेप्टोस्पायरोसिस के लक्षण हो सकते हैं। गंभीर मामलों में किडनी और लिवर जैसे अहम अंग प्रभावित हो सकते हैं। इस संक्रमण से बचने के लिए आपको जलभराव वाले पानी में चलने से बचना चाहिए और फिल्टर किया हुआ या उबला हुआ ही पानी पिएं।
मानसून या बारिश के दौरान हैजा रोग का खतरा भी काफी बढ़ जाता है। हैजा रोग, दूषित पानी पीने और भोजन खाने से तेजी से फैल सकता है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, विश्वभर में हर साल हैजा से लगभग 13 लाख से लेकर 40 लाख मामले सामने आते हैं। वहीं, 1 लाख से ज्यादा लोग हैजा से अपनी जान गंवा देते हैं। इस बीमारी का समय पर इलाज करना बहुत जरूरी है, वरना यह जानलेवा बन सकती है। हैजा से पीड़ित व्यक्ति को डायरिया (दस्त) रोग होता है, जिससे शरीर में डिहाइड्रेशन हो जाता है। अगर बार-बार पानी जैसे दस्त, उल्टी और कमजोरी महसूस हो तो एक बार हैजा की जांच जरूर करानी चाहिए। इस बीमारी से बचने के लिए ताजा और अच्छी तरह से पका हुआ भोजन ही खाना चाहिए। खाना खाने से पहले हाथों को साबुन और पानी से अच्छी तरह धोएं। यह एक संक्रामक बीमारी है, जो विब्रियो कोलेरी नामक बैक्टीरिया के कारण होती है। यह संक्रमण आमतौर पर संक्रमित व्यक्ति के मल से दूषित पानी या भोजन के सेवन करने से फैलता है।
बारिश के मौसम में फंगल इंफेक्शन का खतरा भी ज्यादा बना रहता है। इस मौसम में नमी बढ़ने की वजह से त्वचा पर फंगल संक्रमण का खतरा बढ़ सकता है। दरअसल, नमी में फंगस और बैक्टीरिया तेजी से पनपते हैं, जो स्किन इंफेक्शन का कारण बनते हैं। इसलिए इस मौसम में फंगल त्वचा संक्रमण से बचने के लिए त्वचा को सूखा रखें और जरूरत पड़ने पर मॉइश्चराइजर अप्लाई करना जरूरी है। अगर बारिश में भीग गए हैं, तो कपड़े तुरंत बदलें। किसी की निजी वस्तुओं का इस्तेमाल करने से बचें। अगर आपको त्वचा पर खुजली, लाल चकत्ते या जलन जैसे लक्षण महसूस हो तो डॉक्टर से तुरंत मिलें।
अकेडमी ऑफ फैमिली फिजिशियंस ऑफ इंडिया के चेयरमैन और जनरल फिजिशियन डॉ. रमन कुमार बताते हैं कि मानसून में तरह-तरह के संक्रमणों और बीमारियों से बचने के लिए आप इन बातों पर जरूर ध्यान दें। जैसे-
Disclaimer: मानसून में कई तरह के संक्रमणों का खतरा बढ़ जाता है। बारिश के मौसम में हैजा, लेप्टोस्पायरोसिस और फंगल इंफेक्शन के मामले बढ़ने लगते हैं। इसलिए इस मौसम में हाइजीन और सुरक्षित खान-पान का खास ख्याल रखना बहुत जरूरी है। अगर तेज बुखार, सिरदर्द, सांस लेने में तकलीफ या कमजोरी जैसे लक्षण महसूस हो तो आपको डॉक्टर से जरूर मिलना चाहिए, बिना डॉक्टर की सलाह के कोई भी दवा न लें।