
अंजू रावत
अंजू रावत एक अनुभवी हेल्थ, फिटनेस, रिलेशनशिप, ब्यूटी और लाइफस्टाइल लेखक हैं, जिन्हें इन विषयों पर लिखने ... Read More
Medically Verified By: Dr. (Prof) Vinit Banga
nerve damage
Peripheral Neuropathy: क्या आपको हाथ-पैरों पर चुभने वाली जलन, सुन्नपन और झनझनाहट जैसा महसूस होता है। इन समस्याओं की वजह से आपकी पूरी दिनचर्या प्रभावित हो रही है या रात में नींद नहीं आती है? अगर ऐसे लक्षण दिख रहे हैं, तो ये पेरिफेरल न्यूरोपैथी के संकेत हो सकते हैं। आमतौर पर ज्यादातर लोग इन लक्षणों को समझ नहीं पाते हैं और सालों तक इनकी अनदेखी करते हैं। इससे समस्या बढ़ती जाती है और बाद में कई मुश्किलों से गुजरना पड़ता है। पेरिफेरल न्यूरोपैथी की वजह से शरीर का संतुलन बिगड़ने लगता है और कुछ मामलों में लोगों के लिए चलना-फिरना तक मुश्किल हो सकता है। अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर ये पेरिफेरल न्यूरोपैथी क्या है?
आपको बता दें कि पेरिफेरल न्यूरोपैथी उन स्थितियों का एक समूह है, जिनमें पेरिफेरल नर्वस सिस्टम को नुकसान पहुंचता है। इस स्थिति में दिमाग और शरीर के बीच में संदेशों का संचार प्रभावित हो सकता है और कई तरह की समस्याएं होने लगती हैं। लेकिन, पेरिफेरल न्यूरोपैथी क्यों और कैसे होता है? आइए, विस्तार से जानते हैं कि कौन-सी बीमारियां पेरिफेरल न्यूरोपैथी का कारण बनती हैं।
नसों को सिर्फ शरीर में पोषक तत्वों की कमी की वजह से नुकसान नहीं पहुचंता है, इसके पीछे कई बीमारियां भी जिम्मेदार हो सकती हैं। इनमें शामिल हैं-
फरीदाबाद के फोर्टिस एस्कॉर्ट्स अस्पताल में न्यूरोलॉजी विभाग के डायरेक्टर और एचओडी व जाने-माने न्यूरोलॉजिस्ट डॉक्टर विनीत बांगा बताते हैं कि खराब खान-पान और लाइफस्टाइल की वजह से डायबिटीज रोगियों की संख्या में लगातार वृद्धि देखने को मिल रही है। यह एक ऐसा रोग है, जिसे नसों को नुकसान पहुंचाने का सबसे आम कारण माना जाता है। जब डायबिटीज रोगियों में लंबे समय तक ब्लड शुगर लेवल बढ़ा हुआ रहता है, तो इससे हाथों और पैरों में नसों से जुड़ी समस्याएं होनी शुरू हो सकती हैं। डायबिटीज रोगियों को हाथ-पैरों में जलन और सुन्नपन हो सकता है।
peripheral neuropathy
मल्टीपल स्क्लेरोसिस (MS) भी नसों को नुकसान पहुंचा सकता है। यह एक ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसमें प्रतिरक्षा प्रणाली नसों की सुरक्षात्मक परत (मायलिन) को नुकसान पहुंचाती है। इसकी वजह से नसें धीरे-धीरे कमजोर होने लगती हैं और दिमाग-शरीर के बीच में संदेशों का संचार प्रभावित हो सकता है।
National Institute of Neurological Disorders and Stroke (NINDS) के अनुसार, मल्टीफोकल मोटर न्यूरोपैथी भी नसों को बुरी तरह से प्रभावित कर सकती है। यह एक दुर्लभ ऑटोइम्यून बीमारी है, जिसकी वजह से धीरे-धीरे हाथों की मांसपेशियों में कमजोरी आती है। यह समस्या महिलाओं की तुलना में पुरुषों में ज्यादा देखने को मिलती है।
किडनी और लिवर शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंग हैं। हालांकि, आजकल लिवर और किडनी से जुड़े रोगों के मामलों में काफी तेजी देखने को मिल रही है। जब किडनी और लिवर से जुड़ी बीमारियां होती हैं, तो खून में विषैले पदार्थों की मात्रा बढ़ सकती है, इससे नसों के ऊतकों को नुकसान पहुंचता है। इससे नसों में धीरे-धीरे कमजोरी भी आ सकती है और पेरिफेरल न्यूरोपैथी विकसित हो सकती है।
NINDS के अनुसार, कई तरह के संक्रमण भी नसों के ऊतकों पर हमला कर सकते हैं और न्यूरोपैथी को विकसित कर सकते हैं। वैरीसेला-जोस्टर वायरस, वेस्ट नाइल वायरस, साइटोमेगालोवायरस और हर्पीज सिम्प्लेक्स वायरस नसों को प्रभावित कर सकते हैं। ये संक्रमण पेरिफेरल न्यूरोपैथी का कारण बन सकते हैं और इसकी वजह से तेज चुभने वाला दर्द महसूस हो सकता है।
जब थायराइड ग्रंथि पर्याप्त मात्रा में हार्मोन का उत्पादन नहीं कर पाती है, तो हाइपोथायराइडिज्म की स्थिति हो सकती है। इस स्थिति में व्यक्ति का वजन तेजी से बढ़ सकता है। लंबे समय तक थायराइड हार्मोन की कमी से नसों पर दबाव पड़ता है, इससे सूजन हो सकती है और नसें कमजोर हो सकती हैं। इससे पैरों में झनझनाहट और सुन्नपन हो सकता है।
डॉक्टर विनीत बांगा बताते हैं कि विटामिन बी12 नसों को स्वस्थ रखने के लिए एक बेहद जरूरी पोषक तत्व होता है। जब शरीर में इसकी कमी होती है, तो नसें बुरी तरह से प्रभावित होने लगती हैं। इसकी वजह से सुन्नपन और झनझनाहट महसूस हो सकता है। जब शरीर में विटामिन बी12 की कमी होती है, तो ये लक्षण महसूस हो सकते हैं-
peripheral neuropathy
कैंसर के इलाज में इस्तेमाल होने वाली कीमोथेरेपी की दवाइयां भी पेरिफेरल न्यूरोपैथी का कारण बन सकती हैं। हालांकि, ऐसा हर कीमोथेरेपी लेने वाले मरीज के साथ नहीं होता है। कुछ ही लोगों में कीमोथेरेपी की वजह से नसों को नुकसान पहुंच सकता है। कुछ मामलों में रेडिएशन थेरेपी भी नसों को नुकसान पहुंचा सकती है।
यह एक ऑटोइम्यून डिसऑर्डर है। इसमें शरीर की प्रतिरक्षा प्रणाली गलती से शरीर की अपनी नसों पर हमला करने लगती है। इसकी वजह से हाथ-पैरों में कमजोरी आ सकती है। हाथ-पैरों में झनझनाहट भी महसूस हो सकती है।
NINDS के अनुसार, पेरिफेरल न्यूरोपैथी के लक्षण सामान्य से लेकर गंभीर हो सकते हैं। लेकिन, यह समस्या जानलेवा नहीं होती है। पेरिफेरल न्यूरोपैथी के लक्षण इस बात पर निर्भर करते हैं कि कौन-सी नसें प्रभावित हुई हैं और कितना नुकसान पहुंचा है। नसों को नुकसान पहुंचने पर पीड़ित व्यक्ति की दिनचर्या प्रभावित हो सकती है और यह नींद में भी बाधा डाल सकता है। इसके लक्षणों में शामिल हैं-
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जब किसी व्यक्ति को हाथ-पैरों में सुन्नपन और झनझनाहट जैसे लक्षण महसूस होते हैं, तो डॉक्टर इन टेस्ट की मदद से पेरिफेरल न्यूरोपैथी का पता लगा सकते हैं।
Disclaimer: पेरिफेरल न्यूरोपैथी, नसों से जुड़ी समस्याओं का समूह है, जिसकी वजह से हाथ-पैरों में तेज जलन और झनझनाहट हो सकती है। यह समस्या कई बीमारियों की वजह से हो सकता है। अगर आपको पेरिफेरल न्यूरोपैथी का कोई भी लक्षण महसूस हो तो अनदेखी बिल्कुल न करें और तुरंत डॉक्टर से मिलें।