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आपने भी देखा होगा कि वयस्कों की तुलना में बच्चे बहुत जल्दी बीमार बड़ते हैं। मौसम में आने वाला बदलाव और अस्वाथ्यकर खाने से ही उनकी तबीयत बिगड़ जाती है। ठीक उसी प्रकार हेपेटाइटिस भी ऐसी ही बीमारी है, जो न सिर्फ वयस्कों बल्कि बच्चों को स्वास्थ्य में भी कई जटिलताएं पैद कर सकती हैं। हेपेटाइटिस लिवर में सूजन पैदा करने वाली बीमारी है और इसलिए इसे आम बोलचाल की भाषा में लिवर में सूजन भी कहा जाता है। वयस्कों की तरह बच्चों में भी कई बार हेपेटाइटिस होने के बाद भी इसके लक्षण नहीं दिखते हैं। हालांकि, ये लक्षण सिर्फ तब तक नहीं दिखते हैं, जब तक हेपेटाइटिस के कारण लिवर खराब होना शुरू नहीं हो जाता है। हेपेटाइटिस के दौरान लिवर में सूजन व लालिमा आने के बाद लिवर क्षतिग्रस्त होने लगता है और उसकी कार्य प्रक्रिया भी रुक जाती है। बच्चों में हेपेटाइटिस के मामले पहले की तुलना में अब ज्यादा दिखने लगे हैं। बच्चों में हेपेटाइटिस से जुड़ी समस्याओं के बारे में सही जानकारी लेने के लिए हमने एस्टर सीएमआई हॉस्पिटल के लीड कंसल्टेंट - हेपेटोबाइलरी एंड ट्रांसप्लांट सर्जरी डॉक्टर सोनल अस्थाना और न्यूबर्ग डायग्नोस्टिक्स की चीफ ऑफ लैब सर्विस डॉक्टर अमृता सिंह से बात की। चलिए जानते हैं उनके द्वारा बच्चों में हेपेटाइटिस की समस्या पर दी गई महत्वूर्ण जानकारियों के बारे में -
डॉक्टर सोनल अस्थाना के अनुसार हेपेटाइटिस से होने वाले लक्षण हर बच्चे में अलग हो सकते हैं। इसके कुछ लक्षणों में आमतौर पर बुखार, जी मिचलाना, उल्टी, भूख न लगना, शरीर में पानी की कमी होना, दस्त लगना, पीलिया और फ्लू जैसे लक्षण देखने को मिल सकते हैं। साथ ही बच्चों के रक्त में लिवर एंजाइम का स्तर बढ़ जाना भी हेपेटाइटिस का संकेत हो सकता है, जो यह संकेत देता है कि लिवर क्षतिग्रस्त हो गया है। लिवर खराब होने के कुछ अन्य लक्षणों में आमतौर पर गहरे रंग का पेशाब आना हल्के रंग का मल आना आदि शामिल है। बच्चों में पीलिया होना भी एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है और यह लिवर खराब होने का संकेत देता है।
डॉक्टर अमृता सिंह ने बताया कि बच्चों को हेपेटाइटिस होने पर शुरुआत में जी मिचलाना, उल्टी और भूख न लगना जैसे लक्षण देखने को मिलते हैं। उनके अनुसार जैसे-जैसे यह रोग बढ़ता है, पेशाब का रंग गहरा हो जाना और मल का रंग हल्का हो जाना आदि लक्षण भी देखने को मिलते हैं। इसके अलावा बच्चों को पीलिया होना भी हेपेटाइटिस का एक लक्षण हो सकता है।
डॉक्टर सोन अस्थाना के अनुसार हेपेटाइटिस ए (Hepatitis A) बच्चों में सबसे ज्यादा होता है। यह संक्रमित बच्चे के मल और खून में पाया जाता है। बच्चे हेपेटाइटिस ए से आमतौर पर अस्पताल या डे केयर सेंटर से संक्रमित होते हैं, जहां पर वे संक्रमित बच्चों के संपर्क में आते हैं। साथ ही ऐसी जगहों पर उचित स्वच्छता न बनाए रखने के कारण भी बच्चे हेपेटाइटिस ए से संक्रमित हो जाते हैं। आगे डॉक्टर अस्थाना कहते हैं कि आजकल बच्चे शुगरी ड्रिंक्स व जंक फूड्स खाने लगे हैं और उनकी शारीरिक गतिविधियां भी कम हो गई है, जिस कारण से बच्चों में मोटापा और फैटी लिवर रोगों के मामले भी बढ़ने लगे हैं। ये कारक भी बच्चों में हेपेटाइटिस के खतरे को बढ़ाती है।
दरअसल वयस्कों की तुलना में बच्चों का शरीर नाजुक होता है और इस कारण से वे जल्दी बीमार पड़ते हैं। साथ ही बच्चों की जीवनशैली भी वयस्कों से पूरी तरह से अलग होती है और ऐसे कारक उन्हें हेपेटाइटिस से ग्रस्त होने के जोखिम को बढ़ाते हैं। बच्चों में हेपेटाइटिस की रोकथाम के तरीके जानने के लिए हमने एक्सपर्ट्स से बात की, जिसके बारे मे जानकारी निम्न दी गई है।
डॉक्टर सोनल अस्थाना कहते हैं कि हेपेटाइटिस ए बच्चों में काफी आम होता है, इसलिए उन्हें हेपेटाइटिस ए की वैक्सीन लगवाना अच्छा विकल्प है। साथ ही पेरेंट्स द्वारा अपने बच्चों को स्वच्छता संबंधी अच्छी आदतें सिखानी चाहिए और उन्हें साफ-सफाई बनाए रखने के लिए प्रोत्साहित भी करना चाहिए। नियमित रूप से हाथ धोना और खासतौर पर बाथरूम जाने के बाद और खाना खाने से पहले ये आदत अपनाना बेहद जरूरी है। दूषित पानी या भोजन का सेवन करने से भी बच्चा हेपेटाइटिस से ग्रस्त हो सकता है। इसलिए हमेशा उन्हें स्वच्छ पानी व भोजन ही खाने को दें। ध्यान रखें कि बाहर से लाए गए फल व सब्जियों को खाने से पहले अच्छे से धो लिया जाए और स्वच्छ जगह पर ही रखा जाए।
डॉक्टर अमृता सिंह के अनुसार बच्चों में सबसे ज्यादा देखे जाने वाले हेपेटाइटिस को रोकने के लिए यह जरूरी है कि बच्चे को बार-बार हाथ धोने की आदत डाली जाए खासतौर पर खाना खाने से पहले और बाथरूम जाने के बाद हाथ अच्छे से अवश्य धोने चाहिए। फलों व सब्जियों को खाने से पहले उन्हें अच्छे से धो लें। डॉक्टर अमृता के अनुसार छोटे बच्चों को हेपेटाइटिस ए वैक्सीन जरूर लगनी चाहिए।
डॉक्टर अमृता आगे कहती हैं कि सभी बच्चों को 6 महीनों के भीतर ही हेपेटाइटिस बी के तीन टीके लगा दिए जाते हैं। वहीं हेपेटाइटिस के लिए अभी तक कोई वैक्सीन नहीं बन पाई है।
जैसा कि हमने ऊपर लेख में पढ़ा है कि हेपेटाइटिस छोटे बच्चों के स्वास्थ्य को भी बिगाड़ सकता है और अगर इसकी समय रहते देखभाल न की जाए तो इससे आपका लिवर भी खराब हो सकता है। इसलिए अगर आपके बच्चों में हेपेटाइटिस से संबंधित कोई भी लक्षण दिख रहा है, तो जल्द से जल्द बच्चों के डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए। अगर आपके बच्चे को एक या दो दिन से बुखार, मतली, उल्टी या दस्त जैसे लक्षण हो रहे हैं, तो डॉक्टर से संपर्क करें।
हालांकि, ऐसा जरूरी नहीं है कि बुखार और उल्टी जैसे लक्षण सिर्फ हेपेटाइटिस का ही संकेत हो, ये लक्षण आमतौर पर कई बार किसी अन्य इंफेक्शन या बीमारी के कारण भी हो सकते है, जिनमें से कुछ बीमारी व संक्रमण घातक भी हो सकते हैं। वहीं अगर बच्चे को पीलिया से जुड़े लक्षण महसूस हो रहे हैं, तो आपको समझ लेना चाहिए कि बच्चे को हेपेटाइटिस या लिवर संबंधी कोई अन्य समस्या है और इसका भी जल्द से जल्द इलाज कराना बेहद जरूरी है।