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Prediabetes symptoms: डायबिटीज भारत में रहने वाले लोगों के लिए एक बड़ा स्वास्थ्य संकट है क्योंकि, यह बीमारी पिछले 10 साल की अवधि में हमारे देश में जिस तेजी से बढ़ी है उसे देखकर डॉक्टर्स और हेल्थ एक्सपर्ट्स भी हैरान है। आंकड़ों के अनुसार, भारत में डायबिटीज के सबसे अधिक मरीज (Diabetes patients in India) रहते हैं और इसीलिए, भारत को डायबिटीज की वैश्विक राजधानी भी कहा जाता है।
डायबिटीज या मधुमेह को साइलेंट किलर डिजिज भी कहा जाता है। दरअसल, यह बीमारी धीरे-धीरे शरीर को कमजोर करती जाती है और शरीर के महत्वपूर्ण अंगों को डैमेज करती रहती है। हालांकि, डायबिटीज से पहले मरीज प्री-डायबिटीज स्टेज पर होता है और अगर इस दौरान बीमारी को पहचान लिया जाए और आवश्यक उपाय कर लिए जाएं तो मरीज को डायबिटीज होने से बचाया जा सकता है।
डायबिटीज की बीमारी से पहले प्री डायबिटीज की समस्या होती है। इस स्थिति में ब्लड में शुगर का स्तर बढ़ जाता है हालांकि, शुगर लेवल इतना नहीं बढ़ता कि वह डायबिटीज की कैटेगरी में शामिल हो सके। इसे समझने के लिए ब्लड शुगर लेवल के आंकड़ों पर ध्यान देते हैं-
एक स्वस्थ वयस्क व्यक्ति का नॉर्मल ब्लड शुगर लेवल 70 से 99 mg/dL तक होता है।
लेकिन, जब किसी व्यक्ति को प्री डायबिटीज हो तो उसका फास्टिंग ब्लड शुगर लेवल 100-125 mg/dL होता है और पोस्ट प्रांडियल शुगर लेवल 140-160 mg/dL के बीच तक हो सकता है।
वहीं, डायबिटीज के मरीजों का फास्टिंग ब्लड शुगर लेवल 126 या इससे ज़्यादा होता है और खाना खाने के बाद ब्लड में शुगर लेवल 250 mg/dl से अधिक होता है तो यह एक बहुत ही गम्भीर स्थिति हो सकती है।
हार्वर्ड की एक रिसर्च रिपोर्ट के अनुसार, एक प्री-डायबिटीज व्यक्ति में सालभर के भीतर डायबिटीज की बीमारी होने का खतरा लगभग 10% होता है। लेकिन, इसके बाद डायबिटीज होने का रिस्क 70% तक होता है।
बहुत अधिक प्यास लगना
बार-बार पेशाब करने के लिए उठना
बहुत अधिक थकान महसूस करना
तेजी से वजन बढ़ना या कम हो जाना
बेली फैट बढ़ना या तोंद निकलना
त्वचा पर काले दाग-धब्बे बढ़ना
मूड स्विंग होना
आंखों से ठीक तरह से दिखायी ना देना