ये है वे बैक्‍टीरिया, जो होते हैं सेहत के दोस्‍त, अच्‍छी आदतों से बढ़ाएं इनकी तादाद

कुछ बैक्टीरियाज ऐसे होते हैं जो हमारी सेहत की रक्षा करने के लिए दवाओं तक से लड़ जाते हैं पर हम उनके बारे में जान ही नहीं पाते और उनका अंधाधुंध कत्ल करते रहते हैं।

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Written By: Yogita Yadav | Updated : April 20, 2019 2:30 PM IST

एंटीबायोटिक का बाजार पूरे साजो सामान के साथ बैक्‍टीरिया के पीछे पड़ गया है, कभी हाथ धुलवाकर तो कभी दवाएं पिलाकर बैक्‍टीरियाज की हत्‍या की जा रही है। हो भी क्‍यों न भला, इन बैक्‍टीरियाज के कारण कितनी ही जानलेवा बीमारियां फैल रहीं हैं। पर क्‍या आप जानते हैं कि सारे बैक्‍टीरिया हमारे दुश्‍मन नहीं होते, कुछ दोस्‍त भी होते हैं। आइए जानते हैं कि कौन से हैं वे बैक्‍टीरिया जो हमारे लिए लड़ते हैं सेहत के दुश्‍मनों से।

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बैक्‍टीरियाज से अंधाधुंध लड़ाई

ज्‍यादातर लोगों को लगता है कि बैक्‍टीरिया माने बीमारी। और वे उन्‍हें परास्‍त करने की अंधाधुंध लड़ाई का हिस्‍सा बन जाते हैं। लेकिन कई शोध के बाद हमें पता चला कि सारे बैक्टीरिया हमारे शत्रु नहीं होते हैं। कुछ अच्छे बैक्टीरिया भी हैं जो हमारे शरीर में एक मित्र की तरह मौजूद हैं। यह कई तरह के घातक हमलों से हमारी रक्षा करने की क्षमता रखते हैं।

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यहां बैठते हैं दोस्‍त बैक्‍टीरिया

यह बैक्टीरिया हमारी आंतों में होते हैं और इनकी तादाद हमारी शरीर की कुल कोशिकाओं से 10 गुना ज़्यादा होती है, अर्थात इनकी तादाद 100 ट्रिलियन है। कई शोधों से यह भी पता चला है कि सभी इंसानों में अलग-अलग तरह के बैक्टीरिया होते हैं। जब शरीर में अच्छे बैक्टीरिया नष्ट होने लगते हैं, तो हमें ‘डिसबायोसिस’ जैसी समस्या का सामना करना पड़ता है।

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बैक्‍टीरियाज पर हमला यानी डिसबायोसिस?

हर छोटी-मोटी समस्या में हम ऐंटीबायोटिक दवाएं धड़ल्ले से खाते और खिलाते हैं, जिसका सीधा असर इन अच्छे बैक्टीरिया पर होता है। ऐंटीबायोटिक दवाओं के अत्यधिक और ग़लत तरीक़े से लिए गए डोज़ के कारण हमने कई बुरे बैक्टीरिया को इन दवाओं को इनरेजिस्टेंट (प्रतिरोधी) बना दिया है। जिससे ख़राब बैक्टीरिया तो नहीं मरते, लेकिन उन दवाओं से हमारे जीवन रक्षक बैक्टीरिया ज़रूर ख़त्म हो जाते हैं।  इससे हमारे शरीर में इनकी कमी हो जाती है और इस स्थिति को ‘डिसबायोसिस’ कहते हैं। अर्थात अच्छे बैक्टीरिया की शरीर में कमी और हानिकारक बैक्टीरिया की वृद्धि।

ऐंटासिड भी करता है प्रभावित

ऐंटीबायोटिक के अलावा ऐंटासिड भी डिसबायोसिस के लिए ज़िम्मेदार होते हैं। वे आमाशय में एसिड की मात्रा कम करते हैं, जिससे बुरे बैक्टीरिया को नष्ट होने में मदद मिलती है। लेकिन होता उल्टा है। एसिड कम होने से बुरे बैक्टीरिया की तादाद बढ़ जाती है और वे मिलकर अच्छे बैक्टीरिया को नष्ट करने लगते हैं। स्टेरॉइड, ऐंटीएलर्जिक दवाएं भी शरीर की इम्यूनिटी को कम करती हैं, जिससे बुरे बैक्टीरिया बढ़ते हैं और अच्छे बैक्टीरिया को नष्ट करने लगते हैं।

खानपान भी ले लेता है इनका जीवन

कई बार हमारा खानपान भी इन अच्‍छे बैक्‍टीरियाज की जान ले लेता है। जंक फ़ूड, बहुत तेज़ मिर्च मसाला, शुगर, कार्बोनेटेड ड्रिंक्स और नॉनवेज ज़्यादा खाने तथा कच्चे फल और सब्ज़ियां, रेशेदार भोजन को कम खाना भी डिसबायोसिस की समस्या को बढ़ाता है।

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सेहत के लिए जरूरी हैं गुड बैक्टीरिया

अच्छे बैक्टीरिया बुरे बैक्टीरिया को नष्ट करके हमें इंफ़ेक्शन से बचाते हैं और शरीर में फ़ंगस को नष्ट करते हैं। भोजन में मौजूद टॉक्सिन्स को नष्ट करते हैं, कब्ज़ से बचाते हैं, दस्त और पेचिश से रक्षा करते हैं, विटामिन बी और के का निर्माण करते हैं, मिनरल्स का एब्ज़ॉर्प्शन बढ़ाते हैं, प्रोटीन और वसा के पाचन में सहायता करते हैं, इम्यूनिटी बढ़ाते हैं। एस्ट्रोजन जैसे हार्मोन निर्माण में हमारी सहायता करते हैं और कोलेस्टेरॉल को नियंत्रित करके दिल की समस्या से बचाते हैं। यह कैंसर के रोकथाम में भी सहायक होते हैं।

इस तरह बढ़ाएं गुड बैक्‍टीरिया

अच्छे बैक्टीरिया को बचाने व बढ़ाने के लिए कई बातों पर ध्यान देना चाहिए।

बार-बार ऐंटीबायोटिक का प्रयोग करने से बचें, ऐंटासिड बहुत ज़रूरत हो तो ही लें और आर्टिफ़िशियल स्टेरॉइड से बचें।

खाने में जंक फ़ूड की जगह नैचुरल, शाकाहारी और कच्चा भोजन खाएं।

दवाओं में प्रोबायोटिक लें, ताकि अच्छे बैक्टीरिया की संख्या शरीर में बढ़ती रहे।

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