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Written By: Yogita Yadav | Published : February 15, 2019 4:45 PM IST
बच्चों में तेजी से बढ़ रहा है मायोपिया का खतरा
लगातार टीवी देखने, मोबाइल पर गेम खेलने और जंक फूड खाने की वजह से बच्चों की आंखें छोटी उम्र में ही खराब हो रहीं हैं। कितने ही बच्चों को क्लास में ब्लैक बोर्ड पर लिखा गया काम ठीक से दिखाई नहीं देती, वहीं जरा देर पढ़ने पर भी उनकी आंखों से पानी आने लगता है। जिसकी वजह से छोटी उम्र में ही उन्हें चश्मा लगाना पड़ सकता है। अगर आपके बच्चे में भी दिखाई दे रही हैं ये समस्याएं तो अन्य चीजों के साथ-साथ उसकी डायट का भी रखें विशेष ख्याल।
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आंखों के कमजोर होने और अन्य समस्याओं के लिए 90 प्रतिशत इंसान खुद ही जिम्मेदार होते हैं। आजकल खाने में पोषक तत्वों की कमी भी आंखों के रोग का कारण बन रही है। इसके अलावा पूरी नींद न लेना, तनाव, भागदौड़ और सिर दर्द आंखों के रोग का कारण बन रहा है। जब व्यक्ति तनाव में होता है तो आंखों की मांसपेशियों को आराम नहीं मिलता। जिसके चलते आंखें धीरे-धीरे खराब होने लगती है। आज हम आपको कुछ ऐसे आहार और अन्य तरीके बता रहे हैं जिससे आंखें खराब नहीं होती है।
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स्वस्थ आंखों के लिए आहार
अगर आप स्वस्थ आंखें चाहते हैं तो सबसे पहले अपना खानपान सही करें। हफ्ते में कम से कम तीन बार मछली का सेवन करें। इसके सेवन से आंखों में ड्राई-आई सिंड्रोम की समस्या दूर हो जाएगी। इसके अलावा पालक का सेवन करें यह पोषक तत्वों से भरपूर होती है जिससे आंखों की रोशनी बढ़ती है। अपने आहार में अंडे को भी शामिल करें क्योंकि इससे ल्यूटिन और जियाक्साथिन मिलता है जो आंखों की रोशनी को बढ़ाता है।
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आंखों की रोशनी बढ़ाने के अन्य तरीके
किसी भी ऐसी हवा से बचना चाहिए जिससे आंखों की नमी चली जाती हो जैसे-एसी की सीधी हवा। अपने घर, ऑफिस या गाड़ी में एसी के पैनल को हमेशा नीचे रखें ताकि आपकी आंखों पर सीधी हवा न लगे। शुष्क हवा लगने से अंधापन या कार्निया में बीमारी हो सकती है।
अगर आपकी आंखों की रोशनी बिल्कुल ठीक है और आपको पढ़ने में भी किसी प्रकार की कोई समस्या नहीं होती है फिर भी साल में कम से कम एक बार आंखों की जांच अवश्य करवानी चाहिए। यह आंखों को स्वस्थ रखने का सबसे बेहतर तरीका है। इससे आंखों में होने वाली समस्या से भी निजात मिल जाती है और समय पर उसका इलाज भी हो जाता है।
अगर आप कम्प्यूटर और मोबाइल का इस्तेमाल ज्यादा करते है तो उसकी ब्राइटनेस को कम रखें। इससे आपकी आंखों को ज्यादा जोर नहीं लगाना पडेगा और स्क्रीन की तीव्र रोशनी से आंखों को कोई नुकसान भी नहीं पहुंचेगा।
आपकी पलकों को लगातार झपकना एक सामान्य प्रक्रिया है जो आपकी आंखों को तरो-ताजा रखता है और आंखों को तनाव मुक्त रखता है। कम्प्यूटर का इस्तेमाल करने वाले लोग अपनी आंखों की पलकों को कम झपकाते है, ऐसे लोगों को हर सेकेंड कम से कम तीन से चार बार अपनी आंखों को झपकाना चाहिए।
अपनी दोनों हथेलियों को आपस में रगड़ें और जब हथेलियां गर्म हो जाएं तो उन्हे हल्के से आंखों पर रख लें। ऐसा करने से आंखों का तनाव काफी हद तक दूर हो जाता है। इसके अलावा, आंखों के तनाव को दूर करने का एक और आसान तरीका है, अपनी आंखों को बंद रखे और किसी सुंदर सी जगह होने की कल्पना करें। इससे आंखों को काफी आराम मिलता है।
पानी आपकी सभी समस्याओं का निदान करता है। समय-समय पर अपनी आंखों को धोते रहें। इससे आंखों में डिहाईड्रेशन नहीं होगा और वह स्वस्थ रहेगी। बाहार से आने के बाद आंखों पर पानी की छींटे जरूर मारें।
कहीं भी बाहर धूप में निकलने से पहले सनग्लास जरूर पहन लें। इससे आपकी आंखें पराबैंगनी किरणों से बची रहेगी और उन्हे कोई नुकसान भी नहीं होगा। इसलिए आप जब भी सनग्लास खरीदने बाजार में जाएं, तो यह सुनिश्चित कर लें कि वह पूर्णत: यूवी प्रोटेक्शन देने में सक्षम है या नहीं।