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Written By: Editorial Team | Published : October 18, 2018 9:48 AM IST
कान में किसी तरह का संक्रमण कैंसर की तरफ इशारा करता है।© Shutterstock
कान से जुड़े कैंसर बहुत कम ही सुनने को मिलते हैं। यह कैंसर नाक या सिर के कैंसर जैसे होते हैं जो त्वचा से होते हुए कानों तक पहुंचते हैं। इतना ही नहीं यह बाह्य कान के अलावा कान के अंदरूनी कैनाल को भी प्रभावित करने का काम करते हैं। जब इस कैंसर का विस्तार होता है और जब यह कान के हिस्सों तक पहुंचने लगता है तो कान में बहुत ज्यादा दर्द होना शुरू हो जाता है। कान में ट्यूमर के विकास से सुनने की क्षमता पर भी काफी काफी ज्यादा असर पड़ने लगता है जिसकी वजह से रोगी धीरे-धीरे कम सुनने लगता है। कान के कैंसर की समस्या ज्यादातर वृद्धावस्था में शुरू होती है। 60 साल या इससे ज्यादा उम्र के लोगों में कान से जुड़ी इस प्रकार की समस्या ज्यादा होती है।
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कान में कैंसर के प्रकार
- क्लोस्टीटोमा
- स्कावमस सेल सार्किनोमा
विशेषज्ञों का ऐसा मानना है कि ये दोनों प्रकार के कैंसर कान के अंदर विकसित होते हैं और बाद में ये पूरे शरीर को अपनी चपेट में ले लेते हैं। कान में होने वाले कैंसर के इलाज के लिए सर्जरी, कीमोथेरेपी, रेडिएशन का सहारा लिया जाता है। इन उपचारों को अपनाने से पहले यह पता करना जरूरी है कि रोगी किस प्रकार के कान के कैंसर से ग्रसित है और इसका पता उसमें दिखने वाले लक्षणों से किया जाता है।
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कान से द्रव्य पदार्थ का निकलना
कई बार मरीज को कान से पानी जैसा पदार्थ व ब्लड निकलने की शिकायत होती है। इसकी वजह से कान में संक्रमण व खुजली की समस्या शुरु हो जाती है। इन समस्याओं को गंभीरता से लेकर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
ईयरड्रम का क्षतिग्रस्त होना
इस मामले में कान से पीला व सफेद पदार्थ निकलता है। यह संकेत है कि मरीज का ईअरड्रम को नुकसान पहुंच रहा है। इसका मुख्य कारण है तेज ध्वनि, कान में बाह्य वस्तु का प्रयोग, इअर ट्रॉमा आदि।
कान में इंफेक्शन
कान में किसी तरह का संक्रमण कैंसर की तरफ इशारा करता है। इस समस्या को ठीक होने में एक महीने से भी ज्यादा का समय लग जाता है। यह गांठ की तरह होता है जो दिखने में गुलाबी रंग का होता है। अगर मरीज को अपने कान के आसपास इस तरह की समस्या दिखाई दे तो बिना देर किए डॉक्टर से संपंर्क करें।
सुनाई नहीं देना
अगर मरीज को पूरी तरह से सुनाई देना बंद हो गया है तो यह कान के कैंसर का लक्षण हो सकता है। इस तरह के मामलों में मरीज को अकसर सिर दर्द व चक्कर आने की शिकायत होती है। इसके अलावा मरीज के कानों का बजना, अलसर की शुरुआत व रक्त का निकलना जैसी समस्याएं भी देखी जाती हैं।
कान की देखभाल
थोड़ी सी लापरवाही कान के लिए खतरनाक साबित हो सकती है। यदि कान में मैल जम जाए और ठीक से सफाई नहीं की जाए तो मैल की परत धीरे-धीरे पत्थर जैसा रूप धारण कर लेती है। इससे कान का रास्ता बंद हो जाता है तथा रोगी को दर्द के साथ ऊंचा भी सुनाई देने लगता है। ऐसे में यदि शुरुआत से ही कुछ बातों का ध्यान रख लिया जाए तो आप समस्या से दो-चार होने से बच सकते हैं।
इसके अलावा कान को किसी नुकीली चीज से खुजलाने से या कान छेदने से कान में संक्रमण हो सकता है। कुछ वस्तुएं जैसे क्रीम, इत्र कान में उपयोग में आने वाली दवाइयों की एलर्जी से भी संक्रमण होता है। कान लाल हो जाता है, खुजली आती है एवं दर्द हो सकता है। लोगों को इन चीजों का उपयोग न करने की सलाह दी जाती है।