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अस्थमा एक श्वसन संबंधी बीमारी है जिसमें व्यक्ति को सांस लेने में तकलीफ होती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, दुनियाभर में करीब 339 मिलियन से अधिक लोग अस्थमा के मरीज हैं। इस बीमारी में वायुमार्ग सूज जाता है और संकरा हो जाता है। जिससे मरीज का सांस लेना बेहद मुश्किलभरा हो जाता है। अस्थमा का अटैक पड़ने पर सांस की तकलीफ के साथ ही खांसी, बलगम और घरघराहट के साथ हांफने जैसे लक्षण दिखते हैं। अस्थमा रोगियों को हमेशा अपने साथ दवाएं और वो सभी जरूरी चीजें रखनी चाहिए जो उनकी स्थिति को कंट्रोल करने में मदद कर सकती हैं। सर्दियों के मौसम में अस्थमा मरीजों की दिक्कतें बढ़ जाती है। इसलिए आज हम आपको कुछ ऐसे तरीके बता रहे हैं जिन्हें अपनाकर मरीज अपनी बीमारी को कंट्रोल रख सकते हैं।
अस्थमा के इलाज के लिए कई तरह की दवाएं उपलब्ध हैं। डॉक्टर मरीज की स्थिति और उसके लक्षण देखकर दवा लिखते हैं। इसलिए अस्थमा की दवा खत्म होने पर किसी दूसरे अस्थमा मरीज की दवा न लें। साथ ही कुछ लोग ऐसे भी होते हैं जो थोड़ा सा बेहतर महसूस करने पर दवाओं का सेवन बंद कर देते हैं। ऐसी भूल कभी न करें। यदि आप कोई दवा छोड़ना चाहते हैं तो पहले अपने डॉक्टर से संपर्क करें।
अस्थमा मरीज को अस्थमा का अटैक कभी भी आ सकता है इसलिए इस स्थिति के लिए एकदम तैयार रहें। आपके पास हमेशा ऐसा इमरजेंसी प्लान होना चाहिए जिसे आप अस्थमा के अटैक की स्थिति में यूज़ कर पाएं। इसलिए हमेशा एक नोट पेपर पर वो जरूरी दवाएं या उपकरण लिखकर रखें जिनकी आपको अटैक पड़ने पर जरूरत पड़ सकती है। इससे आपके परिवार के लोगों को उस घड़ी में परेशान नहीं होना पड़ेगा और वो उन चीजों को आपको उपलब्ध करा पाएंगे। यदि आपके बच्चे को अस्थमा तो ये पेरेंट्स की जिम्मेदारी बनती है कि वो डॉक्टर से एडवांस में एमरजेंसी प्लान बनाकर रखें।
अस्थमा के मरीजों को धूम्रपान और इसके धुएं से दूर रहना चाहिए। धूम्रपान के धुएं के संपर्क में आने से आपकी स्थिति बिगड़ सकती है। यदि आपको लगता है कि आपके आसपास के लोग इस काफी सिगरेट पीते हैं और आप वहां से नहीं निकल पा रहे हैं तो इस दौरान मास्क पहनकर रखें। कोशिश करें कि किसी भी कीमत पर धुआं आपके अंदर न जा पाए। इसके साथ ही धूम्रपान का धुआं अस्थमा की दवा को भी बेअसर कर सकता है।
अस्थमा के मरीजों के लिए स्ट्रेस लेना बिल्कुल सही नहीं है। कई शोधों में यह साफ हो चुका है कि स्ट्रेस लेने से अस्थमा मरीजों की हालत बिगड़ सकती है। जब शरीर तनाव में होता है, तो यह कोर्टिसोल हार्मोन जारी करता है जो सांस लेने और हृदय गति को बढ़ाता है। तनाव से छुटकारा पाने के लिए मेडिटेशन, रिलैक्सेशन तकनीक, योग और यहां तक कि रिलैक्सेशन मसाज की मदद लें।
सर्दियों में मौसम में अस्थमा मरीजों को अपने लाइफस्टाइल का विशेष ध्यान रखना चाहिए। अपने खानपान से लेकर अपने उठने-बैठने, कपड़े पहनने और एक्सरसाइज करने पर विशेष ध्यान दें। ऐसे मौसम में ठंडी चीजों के सेवन से परहेज करें। नियमित रूप से हल्की फुल्की एक्सरसाइज करें।