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मानसून में गर्भवती को संक्रमण का शिकार बनाती हैं ये 5 गलतियां, आज ही जानें इन्हें

मानसून में मलेरिया, जुकाम, बुखार, गले में दर्द, डेंगू, फ्लू, फंगल इंफेक्शन और स्कि‍न से संबंधित कई रोगों के होने का खतरा दोगुना हो जाता है। गर्भवती यदि इनमें से किसी भी रोग की चपेट में आ जाए तो रिकवर करना बहुत मुश्किल हो जाता है।

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Written By: Rashmi Upadhyay | Updated : June 25, 2020 12:39 PM IST

मानसून की बारिश लगभग-लगभग देश में शुरू हो चुकी है। जून का महीना विशेषकर मानसून के लिए जाता है क्योंकि यही वह महीना होता है जब मानसून दक्षिण और मध्य भारत में अपनी दस्तक दे देता है। यह मौसम जितना सुहाना और खुशनुमा होता है उतना ही गर्भवती और अजन्मे शिशु के लिए चुनौतीपूर्ण भी होता है। इस दौरान गर्भवती को अपने और अपने शिशु के बेहतर स्वास्थ्य के लिए कुछ चीजों का ध्यान रखना चाहिए। क्योंकि इस दौरान वातावरण में नमी होने के चलते कीटाणु काफी एक्टिव हो जाते हैं। साथ ही शोध भी बताते हैं कि मानसून के मौसम में पुरुषों की तुलना में महिलाएं संक्रमण का अधिक शिकार होती हैं। खासकर जब कोई महिला गर्भवती होती है तो उसके शरीर में तमाम तरह के बदलावों के साथ ही इम्युनिटी भी कमजोर हो जाती है। जिसके चलते अनजाने में हुई थोड़ी सी लापरवाही भी बड़े जोखिम का कारण बन सकती है।

मानसून में मलेरिया, जुकाम, बुखार, गले में दर्द, डेंगू, फ्लू, फंगल इंफेक्शन और स्कि‍न से संबंधित कई रोगों के होने का खतरा दोगुना हो जाता है। सिर्फ यी नहीं इस मौसम में हैजा और लेप्टोसिरोसिस जैसे गंभीर रोगों के होने की आशंका भी बढ़ जाती है। गर्भवती यदि इनमें से किसी भी रोग की चपेट में आ जाए तो रिकवर करना बहुत मुश्किल हो जाता है। इसलिए आज इस लेख में हम आपको कुछ ऐसी गलतियों के बारे में बता रहे हैं जिन्हें अक्सर गर्भवती कर देती हैं। साथ ही हम आपको कुछ ऐसे टिप्स भी देंगे जिन्हें अपनाकर आप खुद को और अपने शिशु को स्वस्थ रख सकती हैं।

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1. नल से आने वाला डायरेक्ट पानी पीना

यह तो आपको भी पता ही होगा कि 90 प्रति​शत बीमारियां पेट से होती हैं और पेट तभी प्रभावित होता है जब उसमें दूषित पानी डाला जाता है। मानसून के दौरान कभी भी नल से आने वाला डायरेक्ट पानी नहीं पीना चाहिए। क्योंकि इस पानी में कई तरह कीटाणु और बैक्टिरिया होते हैं जो आपको गंभीर रोगों का शिकार बना सकते हैं। मानसून में गर्भवती को या तो फिल्टर का पानी पीना चाहिए या फिर पानी को उबाल कर और फिर उसे ठंडा कर पीना चाहिए।

2. स्ट्रीट फूड या चटपटे पदार्थों का सेवन

यह सच है कि गर्भावस्था के दौरान खट्टा और मिर्च मसाले वाली चीजें खाने का मन करता है, लेकिन समझदारी इसी में है कि गर्भवती इनसे दूर रहें। मानसून में स्ट्रीट फ़ूड कई तरह की बीमारियों और इंफेक्शन का कारण बनते हैं। जब महिला गर्भवती होती है तो उसकी इम्युनिटी सामान्य से कम हो जाती है और वह जल्दी इन्फेक्शन का शिकार हो जाती हैं। यदि आपको कुछ खाने का मन है तो कोशिश करें कि घर पर बनाएं।

3. अस्वछता

अगर आप घर में अकेली हैं और काम नहीं कर पा रही हैं तो इस दौरान किसी रि​लेटिव को बुला लें या फिर काम वाली बाई रख लें। मानसून में कई प्रकार के मच्छर और कीड़े मकोड़े पनपने हैं जो किचन के सिंक या बाथरूम की नालियों के माध्यम से आप तक पहुंचकर आपको अपना शिकार बना सकते हैं। इसलिए साफ सफाई को सबसे पहले प्राथमिकता दें।

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4. हाथ-पैरों की सफाई

बारिश के दौरान गंदे पानी से इंफेक्शन होने का खतरा रहता है। इसलिए जब भी आप किसी चीज पर हाथ लगाएं, घर से बाहर जाएं या फिर घर का कोई काम करें तो उसके बाद अपने हाथ और पैरों को अच्छी तरह से साफ करें। जिससे कि गंदगी आपको और पेट में जाकर बच्चे को नुकसान ना पहुचा पाए।

5. फिटिंग के कपड़े पहनना

अगर आप गर्भवती हैं और आपको भी फिटिंग के कपड़े पहनने की आदत है तो मानसून में अपनी इस आदत को बदल लें। क्योंकि गर्भवती को पसीना अधिक आता है जिससे उन्हें डीहाईड्रेशन की समस्या हो सकती है। इसीलिए ढीले ढाले और आरामदायक कपडे पहनें।