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Hormone Imbalance Diseases : हार्मोनल असंतुलन तब होता है, जब आपके शरीर में एक या उससे ज्यादा हार्मोन बहुत ज्यादा या बहुत कम होने लगते हैं। हार्मोन असंतुलन एक ऐसी स्थिति है, जिसमें शरीर में अलग-अलग हार्मोन अंसुलित हो जाता है, जिससे अलग-अलग तरह की बीमारियां हो सकती हैं। उदाहरण के लिए थायराइड हार्मोन असंतुलित होने पर, थायराइड का खतरा रहता है। वहीं, इंसुलिन असंतुलित होने पर डायबिटीज का खतरा रहता है। इस लेख में हम हार्मोन असंतुलन होने की स्थिति में कौन-कौन सी बीमारियां हो सकती हैं, इस बारे में जानेंगे।
पीरियडस साइकिल में कई हार्मोन शामिल होते हैं। इस वजह से अगर पीरियड्स प्रभावित करने वाले हार्मोन असंतुलित हो जाए, तो अनियमित पीरियड्स की परेशानी हो सकते हैं। अनियमित पीरियड्स का कारण बनने वाली विशेष हार्मोन स्थिति पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम (PCOS) और एमेनोरिया है। इस स्थिति में आपको एक बार एक्सपर्ट की सलाह लेने की जरूरत होती है।
शरीर में हार्मोन असंतुलन की स्थिति होने पर महिलाओं और पुरुषों दोनों को ही इनफर्टिलिटी की परेशानी हो सकती है। मुख्य रूप से महिलाओं में PCOS और एनोव्यूलेशन जैसी हार्मोन संबंधी स्थितियां इन्फर्टिलिटी का कारण बनती है। वहीं, पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन का स्तर कम होने पर प्रजनन क्षमता प्रभावित हो सकती है।
शरीर में हार्मोन का उतार-चढ़ाव होने पर एक्ने की परेशानी हो सकती है। मुख्य रूप से टीनएज में शरीर में कई तरह का हार्मोनल बदलाव होते हैं, जिसकी वजह से एक्ने, स्किन के रंग में बदलाव जैसी स्थितियां नजर आती हैं।
शरीर में हार्मोन लेवल असंतुलन होने की स्थिति में डायबिटीज का खतरा रहता है। यह सबसे आम हार्मोन से संबंधित स्थिति है। डायबिटीज में आपका पैंक्रियाज इंसुलिन हार्मोन का पर्याप्त उत्पादन नहीं कर पाता है, जिसकी वजह से मरीजों की स्थिति खराब होने लगती है। डायबिटीज के कई अलग-अलग प्रकार हैं। सबसे आम हैं टाइप 2 डायबिटीज, टाइप 1 डायबिटीज और प्रेग्नेंसी डायबिटीज है।
थायराइड मुख्य रूप से दो तरह हाइपोथायरायडिज्म (थायरायड हार्मोन का कम स्तर) और हाइपरथायरायडिज्म (थायरायड हार्मोन का उच्च स्तर) हैं। प्रत्येक स्थिति के कई संभावित कारण होते हैं। इस स्थिति का समय पर इलाज बहुत ही जरूरी होता है।
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