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शरीर में छिपी इन 5 बीमारियों से कमजोर हो जाता है आपका दिल! एक्सपर्ट से जानें क्या इन बीमारियों को रोकना है संभव

शरीर में छिपी इन 5 बीमारियों से कमजोर हो जाता है आपका दिल! एक्सपर्ट से जानें क्या इन बीमारियों को रोकना है संभव

युवाओं में खराब और व्यायामरहित जीवनशैली, अल्कोहल का अधिक सेवन तथा धूम्रपान की आदतें न सिर्फ डायबिटीज और हाइपरटेंशन का खतरा बढ़ाती हैं, बल्कि आगे चलकर उन्हें दिल की बीमारियों की चपेट में भी ले लेती हैं।

Written by Jitendra Gupta |Published : September 27, 2022 4:08 PM IST

देश में हर साल अलग-अलग प्रकार के हृदय रोग के कम से कम 50 फीसदी मामले अन्य बीमारियों और अकाल मृत्यु से जुड़े होते हैं। इसके इलाज से लक्षणों का प्रबंधन करने, दिल की कार्यप्रणाली में सुधार करने और दिल के दौरे जैसी समस्याओं की संभावनाओं को कम करने में मदद मिल सकती अधिक गंभीर मामलों में इंवेसिव और शल्य चिकित्सा उपचार की आवश्यकता होती है। ज्यादातर मामलों में इलाज से सामान्य जीवन को फिर से शुरू करना संभव है। नई दिल्ली स्थित साओल हार्ट सेंटर के निदेशक और एम्स में पूर्व कंस्लटेंट डॉ. बिमल छाजेड़ ऐसी 5 बीमारियों के बारे में बता रहे हैं, जो आपको ह्रदय रोग का शिकार बनाती हैं।

कौन सी बीमारियों की वजह से कमजोर हो जाता है दिल?

यह मुख्य रूप से धूम्रपान, अधिक वजन, उच्च कोलेस्ट्रॉल, हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज जैसी जीवनशैली से जुड़ी आदतों और स्थितियों के कारण होने वाली बीमारी है। युवाओं में खराब और व्यायामरहित जीवनशैली, अल्कोहल का अधिक सेवन तथा धूम्रपान की आदतें न सिर्फ डायबिटीज और हाइपरटेंशन का खतरा बढ़ाती हैं, बल्कि आगे चलकर उन्हें दिल की बीमारियों की चपेट में भी ले लेती हैं।

दिल की सेहत को दुरुस्त रखने के लिए क्या करें?

इसके इलाज से लक्षणों का प्रबंधन करने, दिल की कार्यप्रणाली में सुधार करने और दिल के दौरे जैसी समस्याओं की संभावनाओं को कम करने में मदद मिल सकती अधिक गंभीर मामलों में इंवेसिव और शल्य चिकित्सा उपचार की आवश्यकता होती है। ज्यादातर मामलों में इलाज से सामान्य जीवन को फिर से शुरू करना संभव है। जीवनशैली में कुछ सामान्य परिवर्तनों से आप दिल को हेल्दी रख सकते हैं जैसेः

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1-स्वस्थ संतुलित आहार का सेवन

2- शारीरिक रूप से सक्रिय रहना

3- नियमित व्यायाम करना

4- धूम्रपान नहीं करना

5-रक्त कोलेस्ट्रॉल और शुगर के स्तर को नियंत्रित करना शामिल है।

इन चीजों से सीएचडी, स्ट्रोक और डिमेंशिया का जोखिम कम हो सकता है और अन्य स्वास्थ्य लाभ भी हो सकते हैं।

कितना बीपी और कोलेस्ट्रॉल से नहीं होगा हार्ट अटैक

आपको अपने कोलेस्ट्रोल स्तर को 130 एम जी/ डी एल तक रखिए,अपने तनाव को लगभग 50 प्रतिशत तक कम करें,हमेशा ही रक्तदबाव को 120/80 एमएमएचजी के आसपास रखें,अपने वजन को सामान्य रखें,नियमित रूप से आधे घंटे तक टहलना जरूरी, 15 मिनट तक ध्यान और हल्के योग व्यायाम रोज करें, भोजन में रेशे और एंटी ऑक्सीडेन्ट्स, अगर आप मधुमेह से पीडित हैं तो चीनी को नियंत्रित रखे आदि।

किस उम्र के लोगों को सबसे ज्यादा खतरा?

चौंकाने वाली बात तो यह है कि 25-40 साल की उम्र के लोगों में हृदय रोग का खतरा बढने लगा है। एक अनुमान है कि भारत में हर चार में से एक मौत मामूली लक्षणों की अनदेखी करने से होती है और हृदय रोग 25 से 35 साल की उम्र की महिलाओं व पुरुषों में मृत्यु दर का एक प्रमुख कारण बनता जा रहा है। आधुनिक जीवन के बढ़ते तनाव ने यहां तक कि युवा लोगों में दिल की बीमारियों के खतरे पैदा कर दिया है। हालांकि अनुवांशिक और पारिवारिक इतिहास अब भी सबसे आम और अनियंत्रित जोखिम कारक बना हुआ है, लेकिन युवा पीढ़ी में अधिकतर हृदय रोग का कारण अत्यधिक तनाव और लगातार लंबे समय तक काम करने के साथ-साथ अनियमित नींद पैटर्न है, जिसके कारण इंफ्लामेशन पैदा होता है और हृदय रोग का खतरा बढ़ जाता है।

किस बीमारी का प्रभाव सीधे दिल को प्रभावित करता है?

हालांकि हार्ट फेल्योर खतरनाक लगता है, लेकिन इसकी बेहतर देखभाल और निदान के साथ इलाज किया जा सकता है हार्ट फेल्योर को रोकने का एकमात्र और सबसे आसान तरीका मोटापा, मधुमेह, उच्च रक्त चाप को प्रोत्साहित करने वाले जीवनशैली और खान-पान की आदतों से परहेज करना है। हार्ट फेल्योर या कार्डियो वैस्कुलर रोग इस तथ्य को दर्शाता है कि आपका दिल उतना स्वस्थ नहीं है, जितना होना चाहिए। इसके बेहतर ढंग से काम करने के लिए आपको इसकी बेहतर देखभाल करनी होगी। लेकिन सबसे अच्छी बात यह है कि आप स्वस्थ जीवनशैली को अपनाकर इसे रोक सकते हैं।

दिल किन बीमारियों को रोका जा सकता है और किन्हें नहीं?

डायबिटीज और हाइपरटेंशन जैसे बीमारियों को कम करके और जीवनशैली से जुड़ी आदतो में सुधार करके इसे रोका जा सकता है। कोलेस्ट्रॉल, उच्च रक्तचाप और मधुमेह को आमतौर पर दवाओं से अच्छी तरह से नियंत्रित किया जा सकता है। अन्य दवाओं का उद्देश्य दिल की धडक़न को धीमा करना, रक्त को पतला करना और उसे थक्का बनने से रोकना है। इनमें से कुछ दवाओं के सिरदर्द, चक्कर आना और त्वचा का लाल होना, कमजोरी, शरीर-दर्द, याददाश्त में कमी और यौनेच्छा कम होने जैसे दुष्प्रभाव हो सकते हैं। किसी भी दवा को लंबे समय तक लेते रहने पर समय-समय पर रक्त परीक्षण विशेषकर किडनी और लीवर फंक्शन टेस्ट कराने की सलाह दी जाती है। जीवनशैली में व्यापक बदलाव के साथ-साथ निम्नलिखित पांच उपाय अपनाकर उपचार का मार्ग प्रशस्त करता है। केवल इन पांचों उपायों को जीवन में उतार लिया जाए तो जीवनभर हृदय रोगों का प्रकोप नहीं हो सकता। शिक्षा, खानपान राइट, तनाव पर काबू, योगासन,व्यायाम आदि।

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