Add The Health Site as a
Preferred Source
Add The Health Site as a Preferred Source

इन 4 तरह के काम में लगे पुरुषों में इंफर्टिलिटी का खतरा सबसे ज्यादा! जानें क्यों इन मर्दों में बढ़ रही इंफर्टिलिटी

एक अध्यन के अनुसार अधिकांश निसंतान जोड़े में पुरुषों की संख्या अधिक पाई गई है ,हालांकि कम ही लोग यह जानते हैं कि यह अवस्था पुरुषों में एक आम समस्या है।

इन 4 तरह के काम में लगे पुरुषों में इंफर्टिलिटी का खतरा सबसे ज्यादा! जानें क्यों इन मर्दों में बढ़ रही इंफर्टिलिटी
इन 4 तरह के काम में लगे पुरुषों में इंफर्टिलिटी का खतरा सबसे ज्यादा! जानें क्यों इन मर्दों में बढ़ रही इंफर्टिलिटी

Written by Jitendra Gupta |Published : September 22, 2022 6:55 PM IST

मेल इंफर्टिलिटी यानी पुरुषों में प्रजनन क्षमता की कमी की समस्या लगातार बढ़ रही है और एक रिपोर्ट के मुताबिक, दुनिया भर में करीब 19 करोड़ व्यक्ति इससे किसी न किसी रुप से प्रभावित हैं। मौजूदा हालात में ऐसे हजारों दंपत्ति हैं, जो इंफर्टिलिटी की समस्या का शिकार हैं और इसमें पुरुषों का हिस्सा 50% फीसदी है। एक अध्यन के अनुसार अधिकांश निसंतान जोड़े में पुरुषों की संख्या अधिक पाई गई है ,हालांकि कम ही लोग यह जानते हैं कि यह अवस्था पुरुषों में एक आम समस्या है।

दिल्ली के Prime IVF, Obstetrics and gynaecology, MBBS, DGO, MS, Dr Nishi Singh कहती हैं कि पुरुषों में यह समस्या किसी पूर्व बीमारी, चोट, लगातार स्वास्थ्य समस्याओं, जीवन शैली के विकल्प आदि जैसी चीजों के कारण भी हो सकती है।

तमाम कोशिशों के बावजूद नहीं बन रहे बाप

इंडियन सोसाइटी फॉर असिस्टेड रिप्रोडक्शन (ISAR) द्वारा नौ शहरों में किए गए एक सर्वेक्षण के अनुसार, 30 से 40 वर्ष की आयु के बीच लगभग 46% भारतीय दंपत्ति जोड़े बच्चा पैदा करने के इच्छुक हैं। उपलब्ध कुछ आंकड़ों के अनुसार, 21 से 30 वर्ष की आयु के बीच के 34 फीसदी से अधिक जोड़ों ने सहायक प्रजनन तकनीक (ART) के किसी न किसी रूप का उपयोग किया क्योंकि वे स्वाभाविक रूप से गर्भ धारण करने में असमर्थ थे।

Also Read

More News

एम्स ने भी माना इन लोगों को खतरा

अखिल भारतीय आयुर्विज्ञान संस्थान यानी एम्स के शोधकर्ताओं ने खुलासा किया है, हर साल 1.20 करोड़ से 1.80 करोड़ भारतीय जोड़ों को इंफर्टिलिटी का निदान (diagnosis) किया जाता है। यह बताया गया है कि पिछले तीन दशकों में भारत में एक युवा पुरुष के शुक्राणुओं की औसत संख्या छह करोड़/एमएल से घटकर लगभग दो करोड़ /एमएल रह गई है। ऐसे उद्योगों में जहां पुरुषों को नियमित रूप से उच्च तापमान में काम करना पड़ता है जिनमेंः

1- वेल्डर

2- डायर

3- ब्लास्ट फर्नेस ऑपरेटर

4-सीमेंट और स्टील उद्योगों में कार्यरत पुरुष में इंफर्टिलिटी का खतरा काफी बढ़ गया है।

आधुनिक जीवनशैली कितनी जिम्मेदार?

एक पुरुष की शुक्राणु पैदा करने में असमर्थता पुरुष इंफर्टिलिटी के प्रमुख कारणों में से एक है। कई महत्वपूर्ण जीवनशैली कारक जो शुक्राणुओं की संख्या को प्रभावित कर सकते हैंः

1-धूम्रपानः धूम्रपान पुरूष शुक्राणु में डीएनए को नुकसान पहुंचाता है। शोधकर्ताओं ने पता लगाया है कि असामान्य रूप से उच्च स्तर के क्षतिग्रस्त शुक्राणु वाले पुरुषों में कम प्रजनन क्षमता के कारण भी अधिक बार गर्भपात का अनुभव हो सकता है। इसके अलावा, धूम्रपान स्तंभन दोष (ED) के बढ़ते जोखिम से जुड़ा है, जो गर्भावस्था को मुश्किल बना सकता है।

एक आदमी की प्रजनन क्षमता उम्र के साथ कम होती रहती है , खासकर अगर वह भारी धूम्रपान करता हो या मदिरा का सेवन करता हो। उम्र का यह प्रभाव पुरुष इंफर्टिलिटी तक सीमित नहीं हो सकता है कुछ संकेत यह भी हैं कि ज्यादा उम्र में के पिताओं में ऐसे बच्चे होने की संभावना अधिक होती है जो जन्मजात असामान्यताओं और विकास संबंधी समस्या से ग्रसित होंगे ।

2- पोषक तत्वों की कमीः जब मानव कोशिकाओं में आवश्यक पोषक तत्वों की कमी होती है, तो सामान्य सेलुलर कार्य टूट जाता है। इस वजह से, प्रसंस्कृत तेलों में भारी आहार या आवश्यक विटामिन और खनिजोंकी कमी से पुरुषों के शुक्राणु की गुणवत्ता और मात्रा पर नकारात्मक प्रभाव पड़ सकता है।

3-मोटापाः अधिक वजन वाले या मोटे पुरुषों में इंफर्टिलिटी का खतरा बढ़ जाता है क्योंकि मोटापा सेक्स ड्राइव में गिरावट के साथ जुड़ा हुआ है।

4-फर्टिलाइजेशन (fertilisation) के दौरान शुक्राणु की अंडे से जुड़ने की क्षमता तनाव और पर्यावरणीय तत्वों जैसे कि कीटनाशकों, जड़ी-बूटियों, कीटनाशकों और अन्य रसायनों से बाधित हो सकती है।

Add The HealthSite as a Preferred Source Add The Health Site as a Preferred Source

जबकि भारत में पुरुष प्रजनन क्षमता के विषय पर बहुत अधिक शोध नहीं हुआ है, यह स्पष्ट है कि पुरुषों में इंफर्टिलिटी की दर बढ़ रही है। इस समस्या का कारण क्या है और इसे कैसे बिगड़ने से रोका जाए, यह जानने की तत्काल आवश्यकता है।

About the Author

... Read More