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सर्वाइकल कैंसर महिलाओं में सबसे ज्यादा होने वाले कैंसर में से एक है, इसे गर्भाशय का कैंसर भी कहा जाता है। ह्यूमन पैपिलोमा वायरस (एचपीवी) के कारण होने वाले इस कैंसर से भारत से प्रतिवर्ष करीब 74 हजार से अधिक महिलाओं की मौत हो जाती है। यानी हर आठ मिनट में यह कैंसर एक महिला की जान ले रहा है। हालांकि अगर समय पर इसपर ध्यान दिया जाए तो इस कैंसर को रोका जा सकता है। सर्वाइकल कैंसर से बचाव के लिए जरूरी है कि आप इसके लक्षणों को पहचानें और जांच करवाएं।
सर्वाइकल कैंसर गर्भाशय ग्रीवा के ऊतकों को प्रभावित करता है। यह महिलाओं में गर्भाशय का निचला हिस्सा होता है। यह कैंसर योनि, मूत्राशय, मलाशय और फेफड़ों तक फैल सकता है। ह्यूमन पैपिलोमा वायरस के कारण महिलाएं इस गंभीर कैंसर का शिकार अधिक होती हैं। यह वायरस यौन संपर्क के माध्यम से फैलता है और इसके प्रारंभिक चरण में इसका आसानी से इलाज किया जा सकता है। हालांकि इसके लिए जरूरी है कि 35 साल की उम्र के बाद आप नियमित रूप से अपना चैकअप करवाएं। क्योंकि 35 वर्ष से अधिक आयु की महिलाओं में सर्वाइकल कैंसर होने का खतरा सबसे ज्यादा होता है।
ह्यूमन पैपिलोमा वायरस कई कारणों से फैलता है। यह वायरस 100 प्रकार का होता है, जिनमें से 14 कैंसर पैदा करने वाले होते हैं। कम उम्र में यौन संबंध बनाना, एक से अधिक यौन साथी होना, गर्भनिरोधक गोलियों का लंबे समय तक उपयोग, धूम्रपान, एचआईवी संक्रमण और कमजोर इम्यूनिटी इस ह्यूमन पैपिलोमा वायरस के फैलने के प्रमुख कारण है।
सर्वाइकल कैंसर का पता लगाने के लिए पपनिकोलाउ टेस्ट या पैप स्मीयर टेस्ट किया जाता है। 21 वर्ष और उससे अधिक उम्र की महिलाओं को यह टेस्ट करवाना चाहिए। 30 से 65 वर्ष की महिलाओं को हर 5 साल में पपनिकोलाउ टेस्ट करवाना चाहिए। वहीं 21 से 29 वर्ष की महिलाओं को हर 3 साल में यह टेस्ट करवा लेना चाहिए।
सर्वाइकल कैंसर का पता लगाने के लिए दूसरा महत्वपूर्ण टेस्ट है वीआईए स्क्रीनिंग। इसमें एसिटिक एसिड के साथ गर्भाशय ग्रीवा का निरीक्षण किया जाता है। 26 से 30 वर्ष की महिलाओं को यह स्क्रीनिंग करवानी चाहिए। इस स्क्रीनिंग के माध्यम से सर्वाइकल कैंसर के शुरुआती लक्षणों का पता आसानी से लगाया जा सकता है। साथ ही इसका उपचार समय पर करवाकर आप इससे छुटकारा भी पा सकते हैं।
सर्वाइकल कैंसर का मुख्य कारण ह्यूमन पैपिलोमा वायरस होता है। ऐसे में एचपीवी टेस्ट करवाना बहुत जरूरी है। विशेषज्ञों के अनुसार एचपीवी को कैंसर में विकसित होने में कम से कम 10 साल लगते हैं, ऐसे में इस टेस्ट से समय पर जानलेवा कैंसर का समय पर उपचार करवाया जा सकता है।