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हमारी डाइट ही हमें हेल्दी और बीमार बनाने का काम करती है, जिसे नकारा बिल्कुल भी नकारा नहीं जा सकता। आप जो भी खाते या पीते हैं, वो सीधा आपके स्वास्थ्य को प्रभावित करता है न सिर्फ शारीरिक रूप से बल्कि आपकी फर्टिलिटी भी बहुत ज्यादा प्रभावित होती है। महिलाओं के लिए बिगड़ा हुआ खान-पान उन्हें कंसीव करने में दिक्कत पैदा करता है। अगली बार जब आप किसी के यहां जाएं तो सोडा और दूसरी गैस से भरी चीजों को बिल्कुल भी न हाथ लगाएं क्योंकि ये सीधा पुरुषों और महिलाओं की फर्टिलिटी को नुकसान पहुंचाने का काम करती है। आइए जानते हैं कितनी घातक हैं ये सभी चीजें।
ढेर सारे आर्टिफिशयल स्वीटनर में ऐसे अवगुण होते हैं, जो एंडोक्राइन ग्रंथि को नुकसान पहुंचाते हैं। इसकी वजह से हार्मोनल असंतुलन होता है, जो कि महिलाओं में फर्टिलिटी को नुकसान पहुंचता है। सभी सॉफ्ट ड्रिंक्स और सोडा में ऐसे स्वीटनर होते हैं, जिनका अधिक सेवन हार्मोनल असंतुलन का कारण बनता है। इसकी वजह से महिलाओं में बांझपन, बच्चे दानी से जुड़ी दिक्कतें और मिसकैरेज की परेशानी हो जाती है।
स्वीट ड्रिंक्स में मौजूद फेनीलैलेनाइन और अस्पार्टिक एसिड जैसे 2 एमिनो एसिड होते, जिन्हें नैचुरल और नुकसान रहित माना जाता है। हालांकि इनकी वजह से कोशिकाएं नष्ट हो जाती हैं और शरीर में मुक्त कणों को बढ़ाने का काम करती हैं। इसकी वजह से स्पर्म और ओवुम के नष्ट होने की 90 फीसदी तक संभावना होती है, खासकर तब-जब आप बहुत मात्रा में इनका सेवन करते हैं। आपकी रिप्रोडक्टिव हेल्थ के लिए इन मुक्त कणों को रोकने की हमेशा से सलाह दी जाती रही है।
इस तरह की मीठी ड्रिंक्स का सेवन इम्यून सिस्टम को नुकसान पहुंचाता है, जिसकी वजह से वजन के बढ़ने और हार्मोनल असंतुलन होता है। ये दोनों ही कारक कहीं न कहीं आपकी फर्टिलिटी को नुकसान पहुंचाता है। महिलाओं में पोषक तत्वों की कमी कहीं न कहीं अनहेल्दी फूड्स की क्रेविंग बढ़ाने का काम करती है, जिसकी वजह से अनहेल्दी प्रेगनेंसी , मिसकैरेज और प्रेगनेंसी से जुड़ी दिक्कतें शामिल है।
वे पुरुष, जो बहुत ज्यादा सॉफ्ट ड्रिंक पीते हैं उनमें स्पर्म काउंटकम होने का खतरा चार गुणा तक ज्यादा होता है। इसके अलावा इन ड्रिंक्स में अल्कलाइन की ज्यादा मात्रा शरीर के पीएच स्तर को बढ़ाने का काम करती हैं, जिसकी वजह से स्पर्म क्वालिटी खराब होने शुरू हो जाती है।
बिस्फेनॉल-ए (बीपीए) एक ऐसा कैमिकल है, जो पुरुषों के सीमने की क्वालिटी को कम करता है और ये प्लास्टिक की बोतलों की लाइनों और ज्यादातर कैन में पाया जाता है। इसलिए इनका सेवन कम से कम करना चाहिए और किसी के घर जाएं तो सॉफ्ट ड्रिंक्स के बजाए जूस आदि का सेवन करना चाहिए।