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Written By: Yogita Yadav | Published : May 27, 2019 8:09 PM IST
चक्कर आना शारीरिक कमजोरी का संकेत है पर गर्मियों में यह समस्या और दूसरे कारणों से भी हो सकती है। इससे निजात पाने के लिए योगासन एक बेहतर तरीका है। © Shutterstock.
चक्कर आना शारीरिक कमजोरी, तनाव, थकान, हाई ब्लड प्रेशर, हीट सिंड्रोम अथवा किसी अन्य कारण से भी हो सकते हैं। गर्मी के साथ-साथ जब हाइपरटेंशन में इजाफा होता है तो चक्कर आने की समस्या भी बढ़ जाती है। कभी कभार चक्कर आना सामान्य समस्या हो सकती है। पर अगर यह लगातार बढ़ जाएं तो गंभीर स्वास्थ्य समस्या की ओर इशारा करते हैं।
चक्कर आते ही आप खुद को संभालने में असमर्थ हो जाते हैं। इस दौरान कम सुनाई देना, धुंधला दिखाई देना और बात करने में तकलीफ होना जैसे लक्षण महसूस होते हैं। इसी के साथ चक्कर आने की एक और वजह वर्टिगो भी हो सकता है जिसमें व्यक्ति को हमेशा ऐसा महसूस होता है कि वह चक्कर खाकर गिर जाएगा। अधेड़ उम्र की महिलाओं में ये समस्या अक्सर देखने को मिलती है।
एनीमिया होने की स्थिति में चक्कर आना सामान्य है क्योंकि शरीर में रेड ब्लड सेल्स की कमी हो जाती है। गर्मी के दौरान जब शरीर में पानी की कमी हो जाती है तब भी चक्कर आ सकते हैं। इसके अलावा हार्मोनल असंतुलन भी महिलाओं में चक्कर आने की एक बड़ी वजह है। युवाओं और कामकाजी लोगों में ओवरबर्डन, तनाव और थकान के कारण यह समस्या देखने को मिलती है।
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यह योग अभ्यास तनाव, चिंता, और थकान को रिलीज करता है। सिर का चक्कर दूर करने में यह फायदेमंद पाया गया है। इसके अलावा पश्चिमोत्तानासन तनाव को कम करने में मदद कर सकता है।
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सबसे पहले जमीन पर चटाई या दरी बिछाकर जमीन पर बैठ जाएं। अब आप दोनों पैरों को सामने फैलाएं। पीठ की पेशियों को ढीला छोड़ दें। सांस लेते हुए अपने हाथों को ऊपर लेकर जाएं। फिर सांस छोड़ते हुए आगे की ओर झुके। फिर अपने हाथ से उंगलियों को पकड़ने और नाक को घुटने से सटाने की कोशिश करें। धीरे धीरे सांस लें, फिर धीरे धीरे सांस छोड़े और अपने हिसाब से इस अभ्यास को धारण करें।
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शवासन सिर के चक्कर के लक्षणों को कम करने में मदद कर सकता है। यह आसन आराम की गहन और ध्यान देने वाली अवस्था लेकर आती है, जो तनाव मुक्त करने और तंत्रिका तंत्र को मजबूत करने में सहायता करती है।
सबसे पहले पीठ के बल लेट जाइए और दोनों भुजाओं को शरीर के बगल में रखिए तथा हथेलियां उपर की ओर खुली रखें। पैरों को एक दूसरे से थोड़ा दूर कर लें और आखों को बंद कर लीजिए। इसके बाद शरीर को ढीला छोड़ दीजिए। इस अवस्था में ये ध्यान रखिए कि आपका शरीर हिले ना। इसके बाद श्वास को सहज होने दीजिए तथा मस्तिष्क को श्वास-प्रश्वास के प्रति जागरुक होने दीजिए। आपका ध्यान दूसरी जगह न जाए इसके लिए श्वास-प्रश्वास की गिनती कीजिए।