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Written By: Kishori Mishra | Updated : May 5, 2020 3:14 PM IST
शरीर में दो तरह की होती है डायबिटीज, जानें क्या है दोनों में अंतर।© Shutterstock.
Types of Diabetes : आधुनिक समय में अनियमित जीवनशैली के कारण कई लोग डायबिटीज की समस्या से जूझ रहे हैं। डायबिटीज को 'साइलेंट किलर' भी कहा जाता है। अगर ये बीमारी एक बार किसी को हो जाए, तो व्यक्ति को जीवनभर नहीं छोड़ती है। डायबिटीज के कारण शरीर के कई अन्य प्रभावित हो सकते हैं। डायबिटीज के मरीजों को आंखों में दिक्कत, लिवर की बीमारी, किडनी और पैरों में दिक्कत का सामना करना पड़ता है। पहले यह बीमारी चालीस की उम्र के बाद ही होती थी, लेकिन आजकल बच्चों में भी इसका मिलना चिंता (Types of Diabetes) का एक बड़ा कारण बनता जा रहा है।
शरीर में जब पैंक्रियाज में इंसुलिन (Insuline) का पहुंचना कम हो जाता है, तो ब्लड में ग्लूकोज का स्तर बढ़ जाता है। इसी स्थिति को डायबिटीज कहते हैं। इंसुलिन एक हार्मोन (Harmone) है। यह पाचक ग्रंथि द्वारा बनता है। इसका काम शरीर के अंदर भोजन को एनर्जी में बदलने का है। इसी हार्मोन से हमारे शरीर में शुगर की मात्रा कंट्रोल होती है। डायबिटीज की समस्या होने पर शरीर को भोजन से एनर्जी बनाने में कठिनाई का सामना करना पड़ता है। इस स्थिति में ग्लूकोज का बढ़ा हुआ स्तर, शरीर में विभिन्न अंगों को नुकसान पहुंचाता है।
डायबिटीज दो तरह (Types of Diabetes) के होते हैं। डायबिटीज टाइप-1 और डायबिटीज टाइप-2 (Type-1 Diabetes and Type-2 Diabetes) । इन दोनों तरह के डायबिटीज में काफी अंतर होता है। जानें, आखिर दोनों डायबिटीज के बीच क्या है अंतर-
टाइप-1 डायबिटीज की समस्या किसी बच्चे में जन्म से भी देखी जा सकती है। यह डायबिटीज बहुत कम उम्र में भी हो सकती है। इस स्थिति में शरीर के अंदर इंसुलिन बिल्कुल भी नहीं बनता है। टाइप-1 डायबिटीज में ऐसा इसलिए होता है, क्योंकि अनुवांशिक कारणों की वजह से पैंक्रियाज में इंसुलिन बनना बंद हो जाता है। इसे 'ऑटोइम्यून डिसऑर्डर' भी कहते हैं। इस डायबिटीज में शरीर की अपनी ही कोशिकाएं कुछ कोशिकाओं के लिए दुश्मन की तरह रिऐक्ट करती हैं और उन पर हमला करके उन कोशिकाओं को नष्ट कर देती हैं।
टाइप-2 डायबिटीज खराब जीवनशैली के कारण होती है। इसके प्रमुख कारण हैं, अधिक फैट, समय पर ना सोना, बहुत अधिक नशा करना, हाई बीपी, सुबह देर तक सोना और निष्क्रिय जीवनशैली। टाइप-2 डायबिटीज में भी शरीर में इंसुलिन का बनना कम हो जाता है। शारीरिक गतिविधियों और गलत खानपान की वजह से ऐसा होता है। शरीर में इंसुलिन कम बनने से ब्लड में मौजूद कोशिकाएं इंसुलिन के प्रति बहुत कम संवेदनशीलता दिखाती हैं। इस वजह से रक्त में ग्लूकोज की मात्रा बढ़ जाती है और व्यक्ति टाइप-2 डायबिटीज का शिकार हो जाता है।
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