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Written By: Atul Modi | Published : August 21, 2021 3:48 PM IST
पॉलीसिस्टिक ओवरी सिंड्रोम या पीसीओएस (PCOS) पिछले कुछ वर्षों में भारतीय महिलाओं में एक आम समस्या बन गई है। पीसीओएस को प्रजनन हार्मोन (Reproductive Hormones) में असंतुलन के कारण माना जाता है। यह एक या दोनों अंडाशय में छोटे सिस्ट का निर्माण कर सकता है और गर्भावस्था के दौरान परेशानियों का कारण बन सकता है। न्यूट्रिशनिस्ट पूजा मखीजा के मुताबिक, हर 5 में से 1 भारतीय महिला इस बीमारी से ग्रसित है। लेकिन उपचार खोजने से पहले, आपको इस बारे में निश्चित होना चाहिए कि आप किस प्रकार के पीसीओएस से पीड़ित हैं। पूजा अपने एक इंस्टाग्राम वीडियो में, पीसीओएस की 4 श्रेणियों (Types) के बारे में बताया है। साथ ही उन्होंने उपचार के तरीकों का भी उल्लेख किया है।
न्यूट्रिशनिस्ट के अनुसार, यह 70 प्रतिशत मामलों में होता है। जैसे ही कोशिकाएं इंसुलिन के प्रभाव से सुन्न हो जाती हैं, इंसुलिनोमा नामक एक स्थिति उत्पन्न होती है जो इस प्रकार के पीसीओएस का कारण बनती है। पेट का वजन बढ़ना, शुगर क्रेविंग और थकान इसके लक्षणों में से हैं।
इसका इलाज करने के लिए नियमित एक्सरसाइज और एक्टिविटी सहायक होते हैं। हाई शुगर डाइट से बचें और संतुलित आहार का सेवन करें। इंसुलिन के स्तर को मैनेज करने के लिए तनाव कम करें और अच्छी नींद लें। मैग्नीशियम, क्रोमियम और इनोसिटोल की खुराक मदद कर सकती है।
यह बड़े पैमाने पर तनावपूर्ण स्थितियों के दौरान होता है। कार्टिसोल और डीएचईए के उच्च स्तर इसके प्रमुख संकेत हैं। योग, ध्यान और अच्छी नींद के माध्यम से तनाव के स्तर को कम करें। हाई इंटेंसिटी वाले व्यायाम से बचें। मैग्नीशियम, विटामिन बी5 और विटामिन सी एड्रिनल ग्लैंड (अधिवृक्क ग्रंथियों) और तंत्रिका तंत्र के लिए बेहतर हो सकते हैं।
इस प्रकार का पीसीओएस क्रॉनिक इन्फ्लेमेशन के कारण होता है। खराब आहार और अस्वास्थ्यकर जीवनशैली से टेस्टोस्टेरोन का स्तर बढ़ जाता है, जो पीसीओएस का कारण बनता है। सिरदर्द, थकान, एक्जिमा जैसी त्वचा संबंधी समस्याएं इसके कुछ लक्षण हैं। आंत के बैक्टीरिया को संतुलित करके, पाचन एंजाइमों में सुधार करके आंतों को हेल्दी बनाए रख सकते हैं। ऐसे भोजन से बचें जो सूजन को ट्रिगर करता हो। हल्दी, ओमेगा 3 फैटी एसिड जैसे एंटीऑक्सिडेंट जैसे प्राकृतिक एंटी-इंफ्लेमेटरी के साथ खुद की देखभाल करें।
यह ओरल कंट्रासेप्टिव (गर्भनिरोधक) गोलियों का सेवन बंद करने के बाद होता है। पूजा के अनुसार, "आपके द्वारा गोलियां बंद करने के बाद कृत्रिम प्रोजेस्टेरोन अंडाशय में एक स्थिति का कारण बनता है", और यह पीसीओएस का कारण बन सकता है। गोलियां लेने से लक्षणों को अस्थायी रूप से रोका जा सकता है लेकिन एक बार रुकने पर स्थिति और खराब हो सकती है।
इस प्रकार का पीसीओएस एक अस्थायी स्थिति है और प्रतिवर्ती (Reversible) है। अच्छी नींद और कम तनाव मदद कर सकता है। मैग्नीशियम, विटामिन ई, विटामिन बी6 और जिंक जैसे पोषक तत्व मददगार होते हैं।
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