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Written By: Atul Modi | Published : March 17, 2023 5:45 PM IST
ग्लूकोमा (Glaucoma) एक ऐसी बीमारी है जिसमें, आंख के अंदर की नसों पर दबाव बढ़ने के कारण ऑप्टिक नर्व को नुकसान पहुंचता है और रोगी की आखें खराब होने लगती है। बढ़ती उम्र के साथ होने वाले इस रोग को "दृष्टि का मूक चोर" के रूप में भी जाना जाता है, क्योंकि इस रोग के प्रारंभिक लक्षण आमतौर पर जाहिर नहीं होते हैं, मगर यदि ग्लूकोमा हो जाए और इसकी सही समय पर रोकथाम न हो तो यह रोग पूर्ण दृष्टिहीनता का कारण बन सकती है। पूरे विश्व में ग्लूकोमा या काला मोतिया दृष्टिहीनता का दूसरा सबसे प्रमुख कारण है। इस बीमारी की व्यापकता का इसी बात से पता चलता है कि, विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्ट के अनुसार भारत वर्ष में 40 साल से अधिक उम्र के लगभग 1 करोड़ या उससे अधिक लोग काला मोतिया (Kala Motiyabind) की बीमारी से ग्रस्त हैं।
ज्यादातर मरीजों में देखा गया यह सबसे आम प्रकार का ग्लूकोमा का है। इस तरह के ग्लूकोमा में आंख की रोशनी धीरे-धीरे कम होती है और कोई अन्य लक्षण नहीं दिखता है। इस ग्लूकोमा में आंखों से तरल पदार्थों को बाहर निकालने वाली नलियां ब्लॉक हो जाती हैं, जिससे तरल पदार्थ उचित मात्रा में बाहर नहीं निकल पाते और आंखों में दबाव या इंट्रा-ऑक्युलर प्रेशर बढ़ने लगता है। अंततः इससे आंखों को इतना नुकसान हो चुका होता है जो फिर ठीक नहीं किया जा सकता है।
इसे नैरो एंगल ग्लुकोमा भी कहते हैं जिसमें आंखों से तरल पदार्थों को निकालने वाली नलियां पूरी तरह बंद हो जाती है और आंखों में दबाव तेजी से बढ़ता है। नालियां बंद होने की वजह से तरल पदार्थ अधिक मात्रा में इकट्ठा हो जाता है, और यह आंख पर गंभीर, तेज और दर्दनाक दबाव का कारण बनता है। अगर तेज दर्द और धुंधला दिखने जैसे लक्षण दिखें तो ऐसे में तुरंत डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।
ये काला मोतिया का ऐसा प्रकार जिसमें ऑप्टिक नर्व पर दबाव बढ़े बिना ही नुकसान पहुंचता है। ऐसा क्यों होता है इसके पीछे के कारणों का अभी भी पता लगाया जा रहा है। लेकिन ऐसा माना जाता है कि आँख का बहुत अधिक संवेदनशील होना या ऑप्टिक नर्व में खून के बहाव में कमी होने के कारण ये ग्लूकोमा हो सकता है।
कोनजेनाइटल ग्लुकोमा की बीमारी वंशानुगत दोष या गर्भावस्था के समय आसामान्य विकास के कारण हो सकती है, इसलिए इसको जन्मजात काला मोतिया भी कहते हैं। जिन बच्चों को कोनजेनाइटल ग्लुकोमा की बीमारी होती है, उनमे भी तरल पदार्थ निकालने वाली नलियों के ब्लॉक होने या किसी चिकित्सीय समस्या के कारण उन ऑप्टिक नर्व पर दबाव बढ़ने लगता है। इस तरह के ग्लूकोमा में आमतौर पर आंखों में बादल से छाए रहना, बहुत ज्यादा पानी बहना और रोशनी के प्रति संवेदनशीलता जैसे लक्षण दिखते हैं।
किसी चोट या आंख से जुड़ी अन्य समस्या (जैसे मोतियाबिंद या आंख के ट्यूमर) के कारण जब आंखों पर दबाव बढ़ता है तो सेकंडरी ग्लुकोमा कि समस्या हो जाती है। यह ग्लूकोमा कुछ मामलो में कोर्टिकोस्टेरॉइड्स जैसी दवाओं या फिर आंख के ऑपरेशन की वजह से भी हो जाता है।
इस प्रकार का ग्लूकोमा ओपन एंगल या एंगल क्लोजर ग्लुकोमा कुछ भी हो सकता है। इसके चार प्रकार देखे जा सकते हैं:
ग्लूकोमा किसी भी उम्र के व्यक्ति को हो सकता है, लेकिन यह 60 वर्ष से अधिक उम्र के ज़्यादा पाया जाता है। साथ ही इस बीमारी का खतरा उन लोगों में भी अधिक होता है जिनमें खून की कमी, वजन और आंखों से संबंधित बीमारियां होती हैं।
ग्लूकोमा के कुछ और रिस्क फैक्टर हैं, जैसे कि यदि आपके परिवार में किसी व्यक्ति को ग्लूकोमा है, तो आपको भी इस बीमारी का खतरा हो सकता है। अधिक उम्र और बड़ी आंखों वाले लोगों में भी ग्लूकोमा का खतरा अधिक होता है।
ग्लूकोमा में अन्य रिस्क फैक्टर शामिल हैं:
ग्लूकोमा एक आंखों की बीमारी है जिसमें आंख के अंदर दबाव बढ़ जाता है जो कि उच्च रक्तचाप या हाइपरटेंशन के कारण होता है। निम्नलिखित उपाय ग्लूकोमा के इलाज में मददगार हो सकते हैं:
दवाइयों का सेवन: डॉक्टर आपको एक या एक से अधिक गोलियों की लेने की सलाह देंगे जो रक्तचाप को कम करने में मदद करेगी।
आंख के अंदरूनी दबाव का संचालन: डॉक्टर एक आंख के अंदरूनी दबाव को कम करने के लिए एक ट्राबेकुलोप्लास्टी, एक शुष्कीकरण, या एक शिविर द्वारा आपकी देखभाल कर सकता है।
नियमित आंखों की जांच: ग्लूकोमा के लक्षणों का पता लगाने के लिए आंखों की जांच अत्यधिक महत्वपूर्ण होती है। नियमित अंतराल पर आंखों की जाँच कराएं।
ग्लूकोमा रोगी को अपने स्वास्थ्य पर पूर्ण ध्यान देना चाहिए। कुछ महत्वपूर्ण बातें निम्नलिखित हैं:
नियमित अंतराल पर जांच कराएं: अपने डॉक्टर से नियमित रूप से जांच करवाएं। इससे ग्लूकोमा के संभावित लक्षणों का पता चल सकेगा और अगर कोई लक्षण होगा तो इसका समय पर इलाज हो पायेगा।
दवाओं का सेवन नियमित रूप से करें: अपने डॉक्टर द्वारा निर्धारित दवाओं का सेवन नियमित रूप से करें। दवाओं को डॉक्टर के बिना सलाह के न छोड़े इससे ग्लूकोमा बढ़ सकता है।
संतुलित आहार: संतुलित आहार लेना बेहद जरूरी है। ग्लूकोमा के मरीजों को तंबाकू और अल्कोहल से दूर रहना चाहिए।
नियमित व्यायाम करें: नियमित व्यायाम करना बेहद जरूरी है। योग और ध्यान जैसे एक्सरसाइज ग्लूकोमा के मरीजों के लिए बेहद फायदेमंद होते है।
(Inputs By: Dr. JL Goel, Professor & HOD, Department of Ophthalmology, Sharda Hospital, Greater Noida)