
... Read More
Written By: Atul Modi | Updated : May 2, 2022 8:02 PM IST
गॉलब्लैडर (Gallbladder) में दर्द या गैलस्टोन (Gallstones) की बीमारी तब होती है, जब पेट के दाहिने हिस्से या गॉलब्लैडर में पाचक दृव्य इकट्ठे होकर ठोस रूप ले लेते हैं। आमतौर पर कोलेस्ट्रॉल, बाईल या बाइलिरुबिन बढ़ने के कारण गॉलब्लैडर में पथरी बन सकती है जिससे गॉलब्लैडर में दर्द हो सकता है। हालांकि गॉलब्लैडर में पथरी पूरी दुनिया की एक आम समस्या है, लेकिन भारत में यह पिछले कुछ समय में, खासकर मिलेनियल्स या बीस और तीस साल के आयुवर्ग के लोगों में बढ़ रही है।
यूं तो गॉलब्लैडर में पथरी बनने का कोई प्रत्यक्ष कारण नहीं होता है, लेकिन कुछ चीजों से इसका जोखिम बढ़ सकता है।
सबसे पहले, गॉलब्लैडर की पथरी दो तरह की होती है: पहली कोलेस्ट्रॉल के कारण होने वाली और दूसरी पिगमेंट की पथरी। गैलब्लैडर में कोलेस्ट्रॉल बढ़ने पर वह ठोस रूप ले लेता है और पथरी में परिवर्तित हो जाता है। जबकि पिगमेंट की पथरी में बाईलिरुबिन या कैल्शियम इकट्ठा हो जाता है। यह उन मरीजों को ज्यादा प्रभावित करती है, जिन्हें पहले से लिवर की बीमारियां/संक्रमण या एनीमिया हो। गैल ब्लैडर की पथरी अलग-अलग आकार की हो सकती है और उसके विकसित होने की आवृत्ति भी अलग-अलग हो सकती है, यानि पथरी का आकार बहुत सूक्ष्म, छोटा या बड़ा हो सकता है, और व्यक्ति को गॉलब्लैडर में एक पथरी या फिर एक साथ कई पथरियां भी हो सकती हैं।
साथ ही खराब जीवनशैली के कारण भी हर आयुवर्ग के लोगों, खासकर मिलेनियल्स और 60 वर्ष से अधिक आयु के लोगों को जीवनशैली से संबंधित अनेक विकार उत्पन्न हो सकते हैं। उदाहरण के लिए, सुस्त जीवनशैली और सैचुरेटेड फैट्स, रिफाईंड शुगर की अधिकता वाला एवं प्रोटीन की कमी वाला आहार गॉलब्लैडर में पथरी की संभावना को बढ़ा देता है। इसी प्रकार, तेजी से वजन घटाने या महिलाओं द्वारा गर्भनिरोधक गोलियां खाने से भी जोखिम बढ़ सकता है। जिन लोगों को पूर्व में बीमारी व इलाज का इतिहास रहा है, या फिर जिनकी एस्ट्रोजन रिप्लेसमेंट थेरेपी, मोटापे का इलाज, मेटाबोलिक सिंड्रोम या फिर बढ़े हुए कोलेस्ट्रॉल/ब्लड प्रेशर और डायबिटीज़ का इलाज हुआ हो, वो लोग ज्यादा जोखिम वाले समूह में होते हैं।
आमतौर से गॉलब्लैडर में पथरी के चिन्ह व संकेत प्रकट नहीं हुआ करते हैं। हालांकि, जब पथरी के कारण बाईल डक्ट में अवरोध पैदा होता है, तो कुछ लक्षण प्रकट हो सकते हैं। इसके आम लक्षणों में शामिल हैं: पेट में दाहिनी तरफ ऊपर की ओर और मध्य के हिस्से में अप्रत्याशित रूप से दर्द का उठना और पीठ की ओर बढ़ना, खाने के बाद पेट में बाईं ओर का हिस्सा भरा हुआ महसूस होना, अपच, उल्टी या मितली आना, पसीना आना, फैटयुक्त आहार के प्रति इनटॉलरेंस, आंतों में गैस का भरना या पेट फूलना, और दाहिने कंधे में दर्द या दोनों कंधों के पुट्ठों के बीच दर्द। दर्द की अवधि कुछ मिनट से घंटों तक हो सकती है।
इसके अलावा कुछ विशेष लक्षण या जटिलताओं के मामले में लोगों को तत्काल मेडिकल सहायता व इलाज प्राप्त करना चाहिए। इन लक्षणों में शामिल हैं: एक्यूट कोलेसिस्टाईटिस, पेट में अत्यधिक दर्द होने के कारण बैठने में परेशानी होना, कंपकंपी या अत्यधिक बुखार, उल्टी और पीलिया से जुड़े लक्षण, जैसे आंखों और त्वचा का पीला पड़ना, पेशाब का रंग गहरा होना और मिट्टी जैसे रंग की असामान्य टट्टी होना।
ज्यादातर मामलों में गैलब्लैडर की पथरी के लिए इलाज की जरूरत नहीं होती क्योंकि इसके लक्षण व संकेत प्रकट नहीं हुआ करते हैं। लेकिन इसके लिए इन्वेजिव और नॉन-इन्वेजिव चिकित्सा विकल्प उपलब्ध हैं, जिनका निर्णय डॉक्टर द्वारा अल्ट्रासाउंड स्कैन एवं खून की जांच द्वारा मरीज के निदान के आधार पर लिया जाता है।
यदि मरीज को बार-बार एवं गंभीर लक्षण होते हैं, उनके लिए कोलेसिस्टेक्टमी या सर्जरी द्वारा गैल ब्लैडर को निकालने का परामर्श दिया जा सकता है। आम तौर से लक्षणों में गैलब्लैडर में या बाईल डक्ट में पथरी एवं गॉलब्लैडर और पैन्क्रियाज़ में जलन या संक्रमण महसूस होता है। इसके लिए दो तरह की सर्जरी होती है। सबसे आम रूप से की जाने वाली सर्जरी मिनिमली इन्वेजिव की-होल या लैप्रोस्कोपिक गॉलब्लैडर रिमूवल सर्जरी होती है। जब गॉलब्लैडर में बहुत ज्यादा जलन, संक्रमण या घाव महसूस हों, तो ओपन गॉलब्लैडर रिमूवल किया जाता है।
साथ ही गॉलब्लैडर को निकालने के बाद दर्द से आराम मिल सकता है, क्योंकि पाचक द्रव्य या बाईल गैलब्लैडर में इकट्ठा नहीं होता, बल्कि लिवर से छोटी आंत में होते हुए सामान्य रूप से बहने लगता है। गॉलब्लैडर को हटाए जाने से कोई बड़ी असुविधा या खाना पचाने की क्षमता पर नकारात्मक प्रभाव नहीं पड़ता। लेकिन गैलस्टोन का समय पर सर्जिकल इलाज करा लेने से दीर्घकालिक समस्याओं को रोकने में मदद मिल सकती है, जो इलाज में विलंब होने से बीमारी के बढ़ जाने के कारण उत्पन्न हो सकती हैं। इस बीमारियों में ऑब्सट्रक्टिव जॉन्डिस, कोलेसिस्टाईटिस, या गॉलब्लैडर में जलन, गैल ब्लैडर में छेद, पैन्क्रियाटाईटिस, संक्रमण या बाईल डक्ट में पथरी या गंभीर मामलों में गैलब्लैडर का कैंसर शामिल है।
इसके अलावा, नॉन-सर्जिकल इलाज के विकल्पों, गॉलब्लैडर की पथरी को तोड़कर निकालने के लिए एमटीबीई इंजेक्शन के गंभीर साईड इफेक्ट होते हैं। बाईल एवं पैन्क्रियाज़ डक्ट की पथरी के लिए एंडोस्कोपिक रेट्रोग्रेड कोलैंजियोपैन्क्रियेटोग्राफी परामर्शित है। इसके अलावा, बाईल एसिड मेडिकेशन नॉन-इन्वेज़िव इलाज के अन्य विकल्प हैं, जो गैल ब्लैडर की पथरी को मुलायम बनाने में मदद कर सकते हैं। हालांकि ये दवाईयां इलाज के लंबे व अनिश्चित विकल्प हैं, और इलाज पूरा हो जाने के बाद गैल ब्लैडर की पथरी के पूरी तरह से बाहर निकलने की कोई गारंटी नहीं होती। इसलिए दवाईयां केवल उन्हीं लोगों के लिए उपयुक्त होती हैं, जो सर्जरी कराने में समर्थ नहीं होते।
लोगों के बीच गॉलब्लैडर की पथरी और यदि इलाज में विलंब के कारण लक्षण गंभीर हो जाएं, तो स्वास्थ्य पर इसके नकारात्मक प्रभाव के बारे में जागरुकता कम है। साथ ही लोगों में इसके लक्षण प्रकट नहीं होते, इसलिए इलाज एवं जीवनशैली में सकारात्मक परिवर्तन द्वारा समय पर इसकी रोकथाम करना तेजी से स्वास्थ्य लाभ लेने के लिए परामर्शित है।
(इनपुट: डॉ. सुखविंदर सिंह सग्गू, जीआई विभाग, मिनिमल एक्सेस एवं बेरियाट्रिक सर्जरी, सीके बिरला हॉस्पिटल, दिल्ली)