सुप्रीम कोर्ट ने कहा, दिल्ली फॉलो करे मुंबई का ऑक्सीजन मॉडल, जानें क्या खासियत है इस मॉडल की और यह है कितना कारगर

सर्वोच्च न्यायालय (Supreme Court) ने कहा कि, दिल्ली को मुंबई महानगर पालिका (BMC) के ऑक्सीजन मॉडल को अपनाना चाहिए। यहां पढ़ें इस मॉडल ((Mumbai Oxygen Model) के बारे में ।

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Written By: Sadhna Tiwari | Updated : May 6, 2021 1:19 PM IST

Mumbai Oxygen Model :बुधवार को सुप्रीम कोर्ट ने को केंद्र सरकार की उस अपील पर सुनवाई की, जिसमें ऑक्सीजन सप्लाई से जुड़ी स्थितियों पर गौर करने के लिए कहा गया था। सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने दिल्ली में ऑक्सीजन की कमी की समस्या पर कहा कि राज्य सरकार यह सुनिश्चित करे कि राज्य में वैज्ञानिक तरीके से ऑक्सीजन का वितरण हो सके। सर्वोच्च न्यायालय ने कहा कि, दिल्ली को मुंबई महानगर पालिका (BMC) के ऑक्सीजन मॉडल को अपनाना चाहिए। (SC Suugests Delhi to Follow Mumbai Oxygen Model  )

दिल्ली को दी गयी  मुंबई ऑक्सीजन मॉडल की सलाह

कोरोना वायरस संक्रमण की दूसरी लहर के दौरान देश के सामने एक नयी समस्या आ खड़ी हुई और यह समस्या थी ऑक्सीजन की कमी। अस्पतालों में जहां ऑक्सीजन की कमी के कारण लोगों को बचा पाना मुश्किल हो रहा है वहीं, लोगों को खुद अपने मरीज़ों के लिए ऑक्सीजन का इंतज़ाम करने को कहा गया है। इसी के चलते दिल्ली और मुंबई जैसे बड़े शहरों से लेकर छोटे शहरों और सेमी-अर्बन क्षेत्रों में ऑक्सीजन की भारी कमी देखी जा रही है।

क्या है मुंबई ऑक्सीजन मॉडल ?(Mumbai Oxygen Model ):

कोरोना वायरस महामारी से सर्वाधिक प्रभावित होने वाले राज्य महाराष्ट्र में दूसरी लहर के दौरान भी भारी संख्या में कोविड केसेस सामने आए हैं। वहीं, पिछले सप्ताह भर से राजधानी मुंबई में कोरोना के मामलों की संख्या में गिरावट देखी गयी है। महामारी को नियंत्रित करने के लिए बीएमसी द्वारा उठाए गए कदमों में उसके ऑक्सिजन मॉडल (Mumbai Oxygen Model) की भी अहम भूमिका रही है। देश की सर्वोच्च अदालत यानि सुप्रीम कोर्ट ने मुंबई महानगर पालिका के इस मॉडल की तारीफ की है। इस मॉडल के तहत-

  • देशभर में बढ़ते ऑक्सिजन संकट को ध्यान में रखते हुए सबसे पहले ऑक्सीजन के वितरण से जुड़े सिस्टम को दुरूस्त किया।
  • पहले जहां, शहर में 28 हजार बेड में से केवल 12-13 हजार बेड के साथ ऑक्सीजन सप्लाई का इंतज़ाम था। वहीं, अब मरीजों के लिए बेड और ऑक्सीजन सिलेंडरों की संख्या में भी बढ़ोतरी की गयी।
  • ऑक्सीजन सप्लाई को बेहतर बनाने के लिए जम्बो सिलेंडर्स की व्यवस्था की गयी। ये सिलेंडर्स साधारण सिलेंडर की तुलना में 10 गुना अधिक ऑक्सीजन से भरे जा सकते हैं। जाहिर है इससे एक समय पर अस्पतालों को अधिक मात्रा में ऑक्सीजन उपलब्ध करायी जा सकती है और रिफिलिंग भी कम करानी पड़ती है।
  • वहीं, 13 हजार किलो लीटर क्षमता वाला लिक्विड मेडिकल ऑक्सीजन टैंक भी तैयार किया गया।
  • इसके अलावा अस्पतालों को रीफिल मोड की बजाय स्टोरेज-सप्लाई मोड पर लाया गया जिससे, ऑक्सीजन जल्द और अधिक मात्रा में उपलब्ध हो सकी।