
डॉ. पंकज शर्मा
डॉ. पंकज शर्मा दिल्ली एक प्रसिद्ध जनरल, लैप्रोस्कोपिक और बैरिएट्रिक सर्जन हैं। इस समय वह फोर्टिस ... Read More
Written By: Dr. Pankaj Sharma | Updated : April 23, 2026 3:49 PM IST
Image credits by: सर्जिकल रिस्क बढ़ा सकता है विसरल फैट
आज के समय में मोटापा सिर्फ लाइफस्टाइल की समस्या नहीं माना जाता है, बल्कि यह एक गंभीर बीमारी बन चुका है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने भी मोटापे को एक क्रॉनिक डिजीज यानी दीर्घकालिक बीमारी के रूप में मान्यता दी है। यह बीमारी धीरे-धीरे शरीर के कई अंगों को नुकसान पहुंचाती है और कई जानलेवा समस्याओं का खतरा बढ़ाती है। इसमें सबसे खतरनाक भूमिका निभाता है विसरल फैट , यह वह चर्बी होती है जो पेट के अंदर गहराई में लिवर, पैंक्रियास और आंतों के आसपास जमा होती है। यह बाहर दिखने वाली चर्बी से कहीं ज्यादा खतरनाक होती है। मेरा मानना है कि मोटापा सिर्फ वजन का मामला नहीं है, बल्कि यह इस बात पर ज्यादा निर्भर करता है कि शरीर में फैट कहां जमा हो रहा है।
विसरल फैट सिर्फ चर्बी नहीं है, बल्कि यह शरीर में इंफ्लेमेशन, हार्मोन और टॉक्सिन्स पैदा करता है, जो हीलिंग और इम्युनिटी को प्रभावित करते हैं।
1. एनेस्थीसिया और सांस से जुड़ी दिक्कतें - अंदर जमा फैट सांस की नलियों को प्रभावित करता है, जिससे ऑपरेशन के दौरान ऑक्सीजन की कमी और सांस लेने में परेशानी हो सकती है। कई मरीजों में स्लीप एपनिया भी होता है, जो जोखिम और बढ़ा देता है।
2. ज्यादा ब्लीडिंग का खतरा - फैटी टिशू में छोटे-छोटे कमजोर ब्लड वेसल्स होते हैं, जिससे सर्जरी के दौरान खून बहने का खतरा ज्यादा रहता है।
3. घाव भरने में देरी और इंफेक्शन - विसरल फैट शरीर में सूजन बढ़ाता है, जिससे घाव देर से भरते हैं और संक्रमण का खतरा बढ़ जाता है।
4. दिल पर अतिरिक्त दबाव - ज्यादा फैट होने पर दिल को ज्यादा मेहनत करनी पड़ती है। सर्जरी के दौरान यह स्थिति हार्ट रेट और ब्लड प्रेशर को अस्थिर कर सकती है।
5. सर्जरी करना हो जाता है मुश्किल - अंदर ज्यादा फैट होने से सर्जन को अंग साफ दिखाई नहीं देते, जिससे सर्जरी तकनीकी रूप से कठिन हो जाती है और जोखिम बढ़ जाता है।
बैरिएट्रिक सर्जरी को अब सिर्फ वजन घटाने का तरीका नहीं, बल्कि एक वैज्ञानिक इलाज माना जाता है।
1. विसरल फैट तेजी से कम होता है - डाइटिंग के मुकाबले यह सर्जरी पेट के अंदर की खतरनाक चर्बी को तेजी से कम करती है।
2. डायबिटीज और ब्लड प्रेशर में सुधार - वजन कम होने के साथ इंसुलिन रेसिस्टेंस घटता है, जिससे टाइप-2 डायबिटीज, हाई बीपी और फैटी लिवर में सुधार होता है।
3. शरीर में सूजन कम होती है - सर्जरी के बाद इंफ्लेमेशन कम होता है, जिससे इम्युनिटी और हीलिंग बेहतर होती है।
4. दिल और फेफड़े बेहतर काम करते हैं - वजन कम होने से सांस लेना आसान होता है और दिल पर दबाव घटता है, जिससे भविष्य की सर्जरी ज्यादा सुरक्षित हो जाती है।
मोटापा अब सिर्फ दिखावे का मुद्दा नहीं, बल्कि जीवन से जुड़ा खतरा है। खासकर विसरल फैट एक साइलेंट किलर की तरह काम करता है, जो बिना लक्षण दिखाए शरीर को नुकसान पहुंचाता रहता है। अंत में मेरा कहना यह है कि अगर समय रहते सही इलाज जैसे- बैरिएट्रिक सर्जरी कराई जाए, तो न सिर्फ वजन कम किया जा सकता है, बल्कि सर्जरी से जुड़े जोखिम भी काफी हद तक घटाए जा सकते हैं। याद रखें कि विसरल फैट कम करना सिर्फ फिट दिखने के लिए नहीं, बल्कि सुरक्षित और स्वस्थ जीवन के लिए बेहद जरूरी है।
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