यूरोप में फि‍र से बढ़ रहा है खसरे का जोखिम, जानें खसरे के बारे में विस्‍तार से

विश्व स्वास्थ्य संगठन खसरे को दुनियाभर से 2020 तक खत्म करना चाहता है। भारत में अभी भी यह अभियान जारी है।

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Written By: Yogita Yadav | Updated : August 29, 2019 2:56 PM IST

खसरा (Measles and rubella) यूं तो बच्‍चों को होने वाली बहुत आम बीमरी है। माना जाता है कि हर बच्‍चे को जीवन में एक न एक बार खसरा जरूर होता है। पर इसमें लापरवाही बरती जाए तो इससे जान का भी जोखिम हो सकता है। इसलिए माना जाता है कि खसरे (Measles and rubella) से बचाव ही उपाय है। भारत में पंद्रह साल तक के बच्‍चों को खसरे से बचाव के टीके (Measles and rubella) लगाए जाते हैं। जिससे उनके खसरा ग्रस्‍त होने की संभावना को कमतर किया जा सके।

यूरोप में बढ़ रहा है खसरा

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने गुरुवार को चेतावनी दी कि यूरोप में एक बार फि‍र से खसरे का प्रकोप बढ़ने लगा है। जबकि अभी तक इस पर काबू पा लिए जाने की बात की जा रही थी। डब्ल्यूएचओ के यूरोपीय क्षेत्रीय सत्यापन आयोग के प्रमुख गुंटर पफाफ ने चेतावनी देते हुए कहा, "अगर समय रहते खसरा से लड़ने के उपाय नहीं किए गए तो यह इस क्षेत्र के लिए घातक हो सकता है। जिसमें बच्‍चे ही नहीं बड़े भी इसके शिकार हो सकते हैं।" वे खसरा और रूबेला उन्मूलन अभियान में और तेजी लाने की बात करते हैं।

क्‍या है खसरा (Measles and rubella)

खसरा श्वसन प्रणाली में वायरस, विशेष रूप से मोर्बिलीवायरस के जीन्स पैरामिक्सोवायरस के संक्रमण से होता है। मोर्बिलीवायरस भी अन्य पैरामिक्सोवायरसों की तरह ही एकल असहाय, नकारात्मक भावना वाले आरएनए वायरसों द्वारा घिरे होते हैं। इसके लक्षणों में बुखार, खांसी, बहती हुई नाक, लाल आंखें और एक सामान्यीकृत मेकुलोपापुलर एरीथेमाटस चकते भी शामिल है।

कैसे फैलता है खसरा (Measles and rubella)

यह बहुत ही संक्रामक रोग है। 90% लोग जिनमें रोग प्रतिरोधक क्षमता नहीं है और जो संक्रमित व्यक्ति के साथ एक ही घर में रहते हैं, वे इसके शिकार हो सकते हैं। खसरा श्वसन के माध्यम से फैलता है (संक्रमित व्यक्ति के मुंह और नाक से बहते द्रव के सीधे या वायुविलय के माध्यम से संपर्क में आने से)।

खसरे के लक्षण

किसी को खसरा होने का पहला संकेत होता है शरीर पर खुजली वाले लाल चकत्ते होना। ये चकत्‍ते या निशान पहले कानों के पीछे, गर्दन या सिर पर दिखाई देते हैं। इन चकत्तों के दिखाई देने से तीन दिन पहले ही इसका वायरस शरीर में पहुंच चुका होता है। इसके साथ ही मरीज को कान में इंफेक्शन, न्यूमोनिया और खतरनाक डायरिया हो सकता है। सबसे बुरी स्थिति में डायरिया से डिहाइड्रेशन होता है। अगर इस पर काबू न पाया जाए तो मरीज की मौत भी हो सकती है।

क्यों इतना घातक है खसरा

खसरा बेहद संक्रामक बीमारी है। हर संक्रमित व्यक्ति करीब 15 स्वस्थ व्यक्तियों को संक्रमित कर देता है। खसरा सिर्फ इंसानों में ही फैलता है। खसरे का वायरस अक्सर छींकने या खांसने से हवा में लार या बलगम के द्वारा फैलता है। यह किसी संक्रमित व्यक्ति के बेहद नजदीक खड़ा होकर बात करने से भी फैल सकता है।

उपचार नहीं बचाव 

खसरे का कोई खास इलाज मौजूद नहीं है। शरीर को खुद ही इस संक्रमण से लड़ना होता है। पर इससे बचाव के वैक्‍सीन मौजूद हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन खसरे को दुनियाभर से 2020 तक खत्म करना चाहता है। चेक रिपब्लिक, एस्टोनिया, फिनलैंड, पुर्तगास, स्लोवाकिया और स्लोवेनिया ही अब तक इस लक्ष्य को पूरा कर सके हैं। भारत में अभी भी यह अभियान जारी है। इसमें पंद्रह वर्ष तक के बच्‍चों को वैक्‍सीन दिए जा रहे हैं।

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