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बढ़ती उम्र के साथ ही हार्ट अटैक की आशंकाएं भी बढ़ने लगती हैं। पुरुषों में हार्ट अटैक आने की औसत आयु 65 वर्ष मानी जाती है। वहीं महिलाओं में यह औसत उम्र 72 वर्ष होती है। हालांकि जिन महिलाओं में मेनोपॉज यानी रजोनिवृत्ति 50 की उम्र के करीब होती है, उनमें भी हार्ट अटैक का जोखिम बढ़ जाता है। दरअसल, मेनोपॉज इस उम्र में आने से शरीर में एस्ट्रोजन हार्मोन कम होने लगता है। एस्ट्रोजन धमनियों को लचीला बनाए रखने में मदद करता है, इसलिए इसके कम होने पर दिल का दौरा पड़ने का खतरा बढ़ जाता है। इसी के साथ ऐसे कई संकेत हैं, जो उम्र के साथ आपको नजर आते हैं।
50 वर्ष की आयु तक आपका मेटाबॉलिज्म काफी कम हो जाता है। मेटाबॉलिज्म भोजन के पोषक तत्वों को तोड़कर शरीर को ऊर्जा देता है। लेकिन उम्र बढ़ने से आपका मेटाबॉलिज्म 30 फीसदी तक धीमा हो जाता है। ऐसे में आपका वजन बढ़ने लगता है। इसी के साथ ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल बढ़ने की आशंका भी बढ़ जाती है। ये सभी सीधे तौर पर आपके हृदय को प्रभावित करते हैं।
हार्ट अटैक के प्रमुख कारणों में से एक है हाई ब्लड प्रेशर। विशेषज्ञों के अनुसार भले ही आपने 50 की उम्र के मध्य से अंत तक हाई ब्लड प्रेशर की समस्या का सामना नहीं किया हो, फिर भी एक उम्र के बाद इसके होने का खतरा 90% तक होता है। हाई ब्लड प्रेशर हार्ट के लिए एक घातक स्थिति है। इसके कारण धमनियों की दीवारों की चिकनी आंतरिक परत कठोर और क्षतिग्रस्त हो जाती है। इसके कारण रक्त वाहिकाएं भी सख्त होने लगती हैं। ये सभी रक्त प्रवाह में रुकावट का कारण बन जाते हैं और हार्ट अटैक की आशंका बढ़ जाती है।
आपकी धड़कनें, आपके दिल का हाल बताती हैं। अगर ये अनियमित हैं तो यह निश्चित है कि आपका दिल ठीक से काम नहीं कर रहा है। दिल की अनियमितता की स्थिति को एट्रियल फिब्रिलेशन भी कहा जाता है। बढ़ती उम्र में यह स्ट्रोक आने का प्रमुख कारण है। इससे हृदय में रक्त का थक्का जमने की आशंका बढ़ जाती है। यह थक्का रक्त प्रवाह के साथ मस्तिष्क में चला जाए तो स्ट्रोक आ सकता है।
मेनोपॉज के बाद महिलाओं में डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है, इसी के साथ हृदय संबंधी बीमारियों का जोखिम भी ज्यादा हो जाता है। दरअसल, मेनोपॉज के बाद एस्ट्रोजन हार्मोन कम हो जाता है। जिसके कारण शरीर इंसुलिन का उपयोग ठीक से नहीं कर पाता। यही कारण है कि डायबिटीज का खतरा बढ़ जाता है। समय के साथ हाई ब्लड शुगर हृदय की रक्त वाहिकाओं और तंत्रिकाओं को नुकसान पहुंचाती हैं, जिससे हृदय रोगों का जोखिम बढ़ता है।
पर्याप्त और अच्छी नींद का आपके दिल से गहरा संबंध है। हालांकि बढ़ती उम्र के साथ लोगों की नींद का पैटर्न बदलने लगता है, उन्हें नींद कम आने लगती है। यह स्थिति आपके दिल की सेहत के लिए अच्छी नहीं है। खराब नींद के कारण आपकी धमनियों में कठोरता बढ़ने का जोखिम बढ़ जाता है। कोलेस्ट्रॉल इस प्लाक को सख्त कर देता है, जिससे हार्ट अटैक की आशंका बढ़ जाती है।