Don’t Miss Out on the Latest Updates.
Subscribe to Our Newsletter Today!
- लेटेस्ट
- डिज़ीज़
- डाइट
- फिटनेस
- ब्यूटी
- घरेलू नुस्खे
- वीडियो
- पुरुष स्वास्थ्य
- मेंटल हेल्थ
- सेक्सुअल हेल्थ
- फोटो स्टोरी
- आयुष
- पेरेंटिंग
- न्यूज
कुछ महिलाएं अपनी डायट का भरपूर ख्याल रखती हैं, खाने में फैट भी कम कर देती हैं पर इसके बावजूद उनका बढ़ा हुआ वंजन नियंत्रण में नहीं आता। विशेषज्ञ मानते हैं कि वजन बढ़ने के पीछे सात अलग-अलग कारण होते हैं। इन्हीं में से एक है हार्मोन्स का असंतुलन। आइए जानने की कोशिश करते हैं कि यह किस तर शरीर को नुकसान पहुंचाता है।
इस तरह काम करते हैं हॉर्मोंस
हमारी पांचों इंद्रियां पर्यावरण के लगातार संपर्क में रहती हैं। नर्वस सिस्टम हमारे एंडोक्राइन सिस्टम के संपर्क में रहता है। एंडोक्राइन सिस्टम ग्लैंड्स और टिश्यूज की चेन है, जो शरीर में संतुलन के लिए कई तरह के हॉर्र्मोंस का निर्माण करता है। हॉर्मोंस छोटे-छोटे केमिकल्स मेसेंजर्स हैं, जो शरीर में संवाद प्रक्रिया को आगे बढाते हैं। ये सिस्टम के लगभग हर पहलू को प्रभावित करने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं, जिनमें व्यक्ति के विचार और अनुभव भी शामिल हैं। सोने, जागने, उत्साहित होने, शांत रहने, कॉफी पीने जैसी तमाम इच्छाएं और क्रियाएं हॉर्मोनल एक्टिविटी में ही शामिल हैं। हॉर्मोंस शारीरिक बनावट को भी प्रभावित करते हैं। त्वचा, बाल आदि इससे प्रभावित होते हैं। मेटाबॉलिज्म बढाने, फैट घटाने, अच्छी नींद लेने और एकाग्र होकर काम पर ध्यान देने के लिए हॉर्मोंस को संतुलित रखना होगा।
यह भी पढ़ें – अंतर्राष्ट्रीय महिला दिवस : स्वस्थ रहेंगी, तभी तो खुश रहेंगी
अपनाएं ये नियम
इसके लिए सही डाइट और एक्सरसाइज के अलावा अच्छी नींद, टॉक्सिंस को बाहर करना, लिवर फंक्शन और पाचन तंत्र को सुचारु बनाना और दबाव-मुक्त रहना भी जरूरी है। हॉर्मोनल असंतुलन का अर्थ है कि शरीर किसी कारणवश विरोध जता रहा है। कई बार समस्या से बचना मुश्किल लगता है क्योंकि व्यक्ति कई तरह के कृत्रिम केमिकल्स से घिरा है। सही डाइट, विटमिंस, मिनरल्स और हब्र्स के सही इस्तेमाल से ज्य़ादातर समस्याएं हल हो सकती हैं। ओबेसिटी, फूड एलर्जी या किसी खाद्य पदार्थ के प्रति संवेदनशीलता, पाचन तंत्र में गडबडी, लगातार दबाव में काम करने, टॉक्सिंस, पौष्टिक तत्वों की कमी, दवा, आनुवंशिक कारण और संक्रमण आदि से हॉर्मोनल असंतुलन हो सकता है।
यह भी पढ़ें – वर्क लोड ने बढ़ा दिया है मेंटल प्रेशर, तो अपनाएं ये पांच टिप्स
ऐसे पहचानें लक्षण
हॉर्मोनल असंतुलन के लक्षणों में कुछ हैं-असामान्य बॉडी शेप, गर्दन के पास स्किन पिग्मेंटेशन, असामान्य हेयर ग्रोथ, बालों का रूखा और बेजान होना, बाल झडऩा, नाखूनों का रंग असामान्य होना, उनमें सफेद धब्बे दिखना, त्वचा का रूखापन और झाइयां, कमर की माप बढते जाना और हिप एरिया में फैट का अत्यधिक जमाव, असामान्य बीएमआइ, मूड स्विंग और डिप्रेशन।
ऐसे संभालें हॉर्मोंस
दबाव कम करें। दबाव दरअसल स्थितियों का नहीं, इसका अधिक होता है कि व्यक्ति उन स्थितियों के प्रति कैसे प्रतिक्रिया जता रहा है। दबाव बढेगा तो सबसे पहले पाचन तंत्र में गडबडी होगी। खानपान में पौष्टिक तत्वों की कमी से भी टिश्यूज का क्षरण होता है, जिससे इरिटेबल बाउल सिंड्रोम (आइबीएस) और पेप्टिक अल्सर जैसी बीमारियां पनपती हैं।
यह भी पढ़ें – पेट में हो गड़बड़, तो इस तरह करें अजवायन का सेवन
नींद का सही समय तय करें
टॉक्सिंस कम करें। पिछले 75 साल में 80 हजार से भी ज्य़ादा केमिकल्स तैयार हुए हैं। इनमें हेवी मेटल्स, सॉल्वंट्स, फैलेट्स, पोलीक्लोरिनेटेड बिसफिनॉल्स, ऑर्गेनोफोस्फेट भी शामिल हैं। इंडस्ट्रियल केमिकल्स जैसे कीटनाशक, परफ्यूम्स, कृत्रिम रंग, फ्लेवरिंग्स और प्लास्टिक शरीर पर बुरा प्रभाव डालते है। इसका असर स्त्रियों के साथ ही पुरुषों पर भी दिखता है। इनमें से कई केमिकल्स एंडोक्राइन सिस्टम में बाधा पहुंचाते हैं, जिससे हॉर्मोंस प्रभावित होते हैं और शरीर में अधिक फैट जमने लगता है।
क्या कहते हैं फैलेट्स
यह केमिकल कंपाउंड्स का एक ग्रुप है, जो कई घरेलू सामानों जैसे वॉटर बॉटल्स, साबुन, शैंपू, कॉस्मेटिक्स, प्लास्टिक कंटेनर्स, खिलौनों, पाइप और दवाओं में पाया जाता है। अन्य टॉक्सिंस के साथ इनका ज्य़ादा संपर्क ओवरी के फंक्शन और स्पम्र्स की गतिशीलता को बाधित करता है। इससे प्यूबर्टि के लक्षण जल्दी पनपने लगते हैं।
टॉक्सिन क्लींजिंग टीम
लिवर, किडनी और छोटी आंत शरीर के नैचरल क्लींजर हैं, जो टॉक्सिंस को बाहर करने के लिए टीमवर्क करते हैं। कभी-कभी इनका कार्य बाधित हो जाता है। प्रदूषण, कुपोषण, अनियमित जीवनशैली व लतों (ड्रग्स, एल्कोहॉल व तंबाकू) के कारण खासकर लिवर के कार्य में बाधा आती है।