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Written By: Yogita Yadav | Published : September 19, 2018 10:39 AM IST
अलग तरह की ड्यूटी और दबाव के कारण नहीं निकाल पाते निजी जिम्मेदारियों के लिए समय। © Shutterstock
उत्तर प्रदेश में बीते दिनों आईपीएस अधिकारी सुरेंद्र दास की आत्महत्या से एक बार फिर आईपीएस अधिकारियों की आत्महत्या पर बहस शुरू हो गई है। सुरेंद्र दास से पहले पुलिस अधिकारी राजेश साहनी ने आत्महत्या की थी। पुलिस महकमे में मौजूद तनाव ने इस घटना के बाद से सभी का ध्यान खींचा है। इस पर उत्तर प्रदेश के आईजी नागरिक सुरक्षा अमिताभ ठाकुर ने एक विशेष बातचीत में कहा कि यह अपने आप में बहुत कष्टप्रद व गंभीर मुद्दा है। सेवा संबंधी परिस्थितियों की तरफ इशारा करता है। हालांकि, सुरेंद्र दास की खुदकुशी की वजहें निजी हैं, लेकिन कुल मिलाकर आप जिस माहौल में रहते हैं, उसका असर भी हो जाता है। यह ऐसा महकमा है जहां कभी-कभी निजी मामलों के लिए भी समय नहीं मिल पाता है और इससे जिंदगी बहुत प्रभावित होती है।
खराब नहीं है वर्क प्रेशर
वर्क प्रेशर एक जरूरी एलिमेंट है। समय नहीं मिलने से व्यक्ति परेशान हो जाता है, व्यग्र हो जाता है, तनाव में रहता है, मानसिक तनाव ज्यादा रहता है। हमने आईआईएम के एक शोध में पाया है कि पुलिस विभाग में दूसरे विभागों की तुलना में तनाव ज्यादा रहता है। इससे 60 फीसदी तक कार्य क्षमता पर प्रभाव पड़ता है।
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होना चाहिए पुलिस सुधार
पुलिस में सुधार एक बड़ा विषय है। इसमें अन्य सुधारों के साथ मानव संसाधन प्रबंधन व विभागीय संस्कृति व कार्य पद्धति में परिवर्तन जरूरी है। आईपीएस अधिकारी राजनीतिक दबाव में रहते हैं, यह निर्विवाद सत्य है। काम ही ऐसा है कि अंतर-संबंध बन जाते हैं। प्रशासनिक अधिकारियों के लिए बोर्ड बनाकर तबादला व तैनाती की जानी चाहिए। इसके लिए स्वतंत्र बोर्ड की जरूरत हैं जो प्रोफेशनल तरीके से निर्णय ले।
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ऐसे बचें प्रोफेशनल स्ट्रेस से