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Impact of Air Pollution on Heart Health: आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में वायु प्रदूषण (Air Pollution) हमारी सबसे बड़ी स्वास्थ्य समस्याओं में से एक बन चुका है। फैक्ट्रियों से निकलने वाला धुआं, सड़कों पर चलने वाली पेट्रोल-डीजल की गाड़ी का धुआं, ऊंची इमारतों के निर्माण कार्य से उठने वाली धूल और घर के अंदर की प्रदूषित हवा ये सभी हमारे स्वास्थ्य पर असर डालते हैं। आपको ये बात जानकर हैरानी होगी वायु प्रदूषण के कारण सिर्फ हमारे फेफड़े प्रभावित नहीं हो रहे हैं, बल्कि ये दिल के स्वास्थ्य पर भी असर डाल रहा है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन (WHO) की रिपोर्ट के अनुसार, हर साल लाखों लोग दिल से जुड़ी बीमारियों के कारण असमय मौत का शिकार होते हैं, जिनमें वायु प्रदूषण एक बड़ा कारण है। दिल की सेहत के प्रति लोगों को जागरूक करने के लिए हर साल 29 सितंबर को विश्व स्वास्थ्य संगठन द्वारा वर्ल्ड हार्ट डे मनाया जाता है। वर्ल्ड हार्ट डे के खास मौके पर हम आपको बताने जा रहे हैं वायु प्रदूषण के कारण कौन सी दिल की बीमारियां हो सकती होती हैं।
ग्रेटर नोएडा के फोर्टिस अस्पताल के कार्डियोलॉजी विभाग के कंसल्टेंट डॉ. शांतनु सिंघल बताते हैं कि हवा का प्रदूषण सिर्फ गंदी हवा और खांसी तक सीमित नहीं है, यह दिल पर भी गंभीर असर डालता है। हवा में मौजूद प्रदूषण के छोटे-छोटे कण (जिन्हें पीएम 2.5 कहा जाता है) सीधे तौर पर हमारे फेफड़ों में जाते हैं, जिससे ये सीधा खून में पहुंच जाते हैं और दिल पर अतिरिक्त बोझ डालते हैं। कोई व्यक्ति अगर लंबे समय तक वायु प्रदूषण के संपर्क में रहता है, तो इससे हाई ब्लड प्रेशर, धमनियों में रुकावट, हार्ट अटैक, स्ट्रोक और हार्ट फेलियर जैसी समस्याएं होती हैं। आइए जानते हैं वायु प्रदूषण के कारण होने वाली बीमारियों के बारे में।
वायु प्रदूषण के कारण कोरोनरी आर्टरी डिजीज के मामले सबसे ज्यादा देखे जाते हैं। ये वो स्थिति है, जिसमें रक्त वाहिकाओं (Coronary Arteries) में प्लाक (कोलेस्ट्रॉल और अन्य अपशिष्ट पदार्थ) जमा हो जाता है। इसके कारण शरीर का ब्लड फ्लो बिगड़ता है। कोरोनरी आर्टरी डिजीज के कारण व्यक्ति को सीने में दर्द या दबाव, सांस लेने में कठिनाई, थकान और कमजोरी और अचानक कार्डियक अरेस्ट जैसी स्थिति का सामना करना पड़ता है।
नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ की रिपोर्ट बताती है कि भारत में हर चौथा व्यस्क हाई ब्लड प्रेशर की परेशानी से जूझ रहा है। हाई ब्लड प्रेशर का एक मुख्य कारण प्रदूषित हवा भी है। प्रदूषित हवा शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस और सूजन पैदा करती है। इससे ब्लड सेल्स सिकुड़ने लगती हैं और ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है। हाई ब्लड प्रेशर के कारण चक्कर आना, सिरदर्द, दिल की धड़कन तेज होना, हार्ट फेल्योर और किडनी डैमेज का खतरा बढ़ता है।
वायु प्रदूषण के कारण फेफड़ों के जरिए जब शरीर के अंदर पहुंचते हैं, तो ब्लड सेल्स ब्लॉक होने लगते हैं। इसके कारण दिल पर्याप्त मात्रा में खून को पंप नहीं कर पाता है और हार्ट फेल्योर की स्थिति पैदा हो जाती है। प्रदूषण से होने वाला हाई ब्लड प्रेशर और हार्ट अटैक भी हार्ट फेल्योर का कारण बन सकते हैं। हार्ट फेल्योर से पहले पैरों और टखनों में सूजन, लगातार थकान, सांस फूलना और अचानक मौत का खतरा होता है।
डॉ. शांतनु सिंघल के अनुसार, प्रदूषित हवा में मौजूद कण खून को गाढ़ा (Thick) बना देते हैं। इससे खून में थक्के बनने की संभावना कई गुणा बढ़ जाती है। जब खून के थक्के शरीर में ज्यादा बनने लगते हैं, तो धमनियों में अचानक रुकावट पैदा होती है, जो हार्ट अटैक का कारण बन सकते हैं।
वायु प्रदूषण के कारण आपको दिल की बीमारियां न हो, इसके लिए आप घर से बाहर निकलते समय N95 या N99 मास्क का इस्तेमाल करें। घर में एयर प्यूरीफायर लगाएं और पौधे जैसे तुलसी, स्नेक प्लांट, एलोवेरा रखें। खाने में एंटीऑक्सीडेंट युक्त (फल, हरी सब्जियां, नट्स) भोजन को शामिल करें।