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Test for Cervical Cancer in Hindi: विश्व स्वास्थ्य संगठन के अनुसार, सर्वाइकल कैंसर से बचाव और इसका इलाज संभव है। बशर्ते इसका जल्दी पता चलना चाहिए। जब सर्वाइकल कैंसर का निदान जल्दी हो जाता है, तो प्रभावी ढंग से इलाज होपाता है। इसके बावजूद भी सर्वाइकल कैंसर विश्व स्तर पर महिलाओं में होने वाला चौथा सबसे आम कैंसर है। साल 2022 में सर्वाइकल कैंसर से लगभग 3 लाख 50 लाख महिलाओं की मौत हुई थी। इसलिए हेल्थएक्सपर्ट्ससर्वाइकल कैंसर का समय-समय पर जांच कराने की सलाह देते हैं और कई जागरूकता अभियान भी चलाते हैं। सर्वाइकल कैंसर के प्रति लोगों में जागरूकता फैलाने के उद्देश्य से हर साल जनवरी माह को सर्वाइकल कैंसर अवेयरनेसमंथ के रूप में मनाया जाता है। इस महीने में सर्वाइकल कैंसर कितना गंभीर हो सकता है या सर्वाइकल कैंसर से कैसे बचा जा सकता है, इन विषयों पर महिलाओं को जागरूक किया जाता है। आज इसी मौके पर हम भी आपको कुछऐसे टेस्ट के बारे में बताने जा रहे हैं, जिन्हें समय-समय पर करवाकर आप सर्वाइकल कैंसर का पहले स्टेज में ही पता लगा सकते हैं। आइए, महाजन इमेजिंग एंड लैब्स की डायरेक्ट डॉ. शैली महाजन से जानते हैं सर्वाइकल कैंसर का पता लगाने के लिए कौन-से टेस्ट कराने चाहिए?
सर्वाइकल कैंसर का पता लगाने से के लिए पैपस्मीयरटेस्ट करवाना बहुत जरूरी होता है। सर्वाइकल कैंसर के लिए यह एक बेहद आसान और दर्दरहित प्रक्रिया है। इसमें गर्भाशय ग्रीवा से कोशिकाओं का एक छोटा-सा नमूना लिया जाता है। इसके बाद सूक्ष्मदर्शी (microscope) की मदद से इसकी जांच की जाती है। इस टेस्ट की मदद से असामान्य तरीके से होने वाले पूर्व-कैंसर कोशिकाओं (pre-cancerous cells) की पहचान की जाती है। यानी इस टेस्ट की मदद से उन सेल्स का पहले ही पता लगाया जा सकता है, जो भविष्य में कैंसर बन सकते हैं। पैटस्मीयरटेस्ट करवाने से सर्वाइकल कैंसर से काफी हद तक बचा जा सकता है। अगर आप नियमित रूप से पैटस्मीयरटेस्ट करवाएंगे तो इससे सर्वाइकल कैंसर से बच सकते हैं।
एचपीवीटेस्ट की मदद से भी सर्वाइकल कैंसर की जांच की जा सकती है। इस टेस्ट में वायरस के हाई रिस्क वाले स्ट्रेन की जांच की जाती है। हाई रिस्कस्ट्रेनवायरस, ज्यादातर सर्वाइकल कैंसर के मामलों के लिए जिम्मेदार होता है। सर्वाइकल कैंसर से बचने के लिए आप समय-समय पर एचपीवीटेस्ट करवा सकते हैं। हेल्थएक्सपर्ट्स भी महिलाओं को 30 की उम्र के बाद एचपीवी और पैपटेस्ट करवाने की सलाह देते हैं। इस टेस्ट की मदद से एचपीवी संक्रमण की जल्दी पहचान हो पाती है और रोगी को गंभीर स्थिति से बचाया जा सकता है।
जब पैपस्मीयर या एचपीवीटेस्ट से सही रिजल्ट नहीं मिल पाता या असामान्यता दिखाई देती है तो इस स्थिति में डॉक्टर कोलोस्कोपीटेस्ट करवाने की सलाह देते हैं। इस टेस्ट को करने से सर्वाइकल कैंसर के बारेमें सटीक रिजल्ट मिल पाता है। इस टेस्ट को करने के लिए के लिए कोलोस्कोप उपकरण का उपयोग किया जाता है। इस प्रक्रिया के दौरान डॉक्टर असामान्य क्षेत्रों को साफ और स्पष्ट तरीके से देख सकते हैं। कुछ मामलों में बायोप्सी की जरूरत पड़ सकती है।
Disclaimer : प्रिय पाठकों यह आर्टिकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।