आज की लाइफस्टाइल में कुछ आदतें ऐसी हैं, जो हमारी सेहत को नुकसान पहुंचा रही हैं। बावजूद इसके, हम इन आदतों को अपनाए जा रहे हैं। दुनियाभर में हजारों लोग ऐसे हैं, जो आंखों से संबंधित समस्याएं जैसे आंखों में दर्द, अतिरिक्त दबाव पड़ने से जलन, पानी आना, स्ट्रेन की समस्याओं से परेशान हैं। ये सभी समस्याएं देर तक कंप्यूटर, लैपटॉप, मोबाइल आदि के इस्लेमाल से अधिक बढ़ रही हैं। हीरानंदानी हॉस्पिटल, नवी मुंबई के कॉर्निया, कैटरैक्ट
एंड रिफ्रैक्टिव सर्जन डॉ. हर्षवर्धन घोरपडे ने बताया उन 10 आदतों के बारे में, जो हमारी आंखों की सेहत को नुकसान पहुंचा रही हैं।
मोबाइल फोन, लैपटॉप और आइपैड से निकलने वाला रेडिएशन या ब्लू लाइट आंखों के लिए हानिकारक होती है। रेडिएशन से आंखों की ऊपरी सतह क्षतिग्रस्त हो सकती है। साथ ही इससे स्लीप साइकल भी प्रभावित होती है, जिससे आप पर्याप्त नींद नहीं ले पाते।
अक्सर लोग लैपटॉप, आइपैड और कंप्यूटर पर काम करते हुए दूरी का ख्याल नहीं रखते। यदि आप कंप्यूटर स्क्रीन के सामने गैप बनाकर नहीं बैठेंगे, तो इससे मायोपिया (शॉर्ट-साइटेडनेस) की समस्या हो सकती है। खासकर बच्चों को कंप्यूटर या लैपटॉप पर देर तक बैठने से मना करें। इनके अधिक इस्तेमाल से बच्चों में क्रोनिक ड्राई आइज की समस्या भी हो सकती है।
असंतुलित आहार और जंक फूड अधिक खाने से भी आंखों की ऊपरी सतह क्षतिग्रस्त हो जाती है। इससे कम उम्र में ही रेटिनल डिजेनरेशन और कैटरैक्ट्स की समस्या से आपको जूझना पड़ सकता है। बच्चों में भी जंक फूड अधिक खाने से मायोपिया की समस्या हो सकती है।
सेल्फ-मेडिकेशन भी बुरी आदत है। अक्सर लोग खुद से आंखों में आई ड्रॉप डालने लगते हैं। इससे कॉर्नियल इंफेक्शन और ग्लूकोमा होने का खतरा रहता है। ऐसे में किसी भी आई ड्रॉप्स का इस्तेमाल डॉक्टर से संपर्क करने के बाद ही करें। स्टेरॉयड युक्त आई ड्रॉप का तो भूलकर भी खुद से इस्तेमाल न करें।
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पर्याप्त रोशनी में पढ़ाई-लिखाई नहीं करने से भी आंखों पर नकारात्मक असर पड़ता है। इससे आंखों पर दबाव पड़ता है। आंखें थकती हैं। सिरदर्द, ध्यान केंद्रित करने और मायोपिया की समस्या भी हो सकती है।
देर रात तक जागकर कंप्यूटर पर काम करने से आप पर्याप्त नींद नहीं लेते। इससे आंखें थकती हैं। ड्राई आईज, प्रेसबायोपिया की समस्या से बचना चाहते हैं, तो इन आदतों को छोड़ दें।
गंदे हाथों से आंखों को रगड़ने से भी आंखों का इंफेक्शन जैसे कंजंक्टिवाइटिस और कॉर्नियल इंजरीज हो सकती है, जो दृष्टिहीनता (blindness) का कारण होता है। कॉन्टैक्ट लेंस की साफ-सफाई पर ध्यान न देना, सोने और स्विमिंग करते समय भी लेंस पहने रहने से आंखों से संबंधित इंफेक्शन होने का खतरा बढ़ जाता है।
स्विमिंग करने, ट्रैवल करने और त्योहारों के समय आंखों की सुरक्षा का ख्याल नहीं रखने से भी कई तरह की आंखों से संबंधित परेशानियों का सामना करना पड़ सकता है। केमिकल इंडस्ट्री में जो लोग काम करते हैं या जो इसके आस-पास रहते हैं, उन्हें आंखों का विशेष ध्यान रखना चाहिए।
जो लोग ऑफिस में घंटों कंप्यूटर या अन्य प्रकाश उत्सर्जक उपकरणों (light emitting devices) के सामने बैठकर काम करते हैं, उन्हें एंटी-रिफ्लेक्टिव ग्लासेज का इस्तेमाल करना चाहिए। इससे आप कंप्यूटर विजन सिंड्रोम से बचे रहेंगे। इसमें क्रॉनिक रेड और ड्राई आइज की समस्या होती है।
यदि आप आंखों पर हद से ज्यादा मेकअप करती हैं, तो आई मेकअप और केमिकल एक्सपोजर से आइलिड मार्जिन इन्फ्लेमेशन हो सकता है। इसमें आंखें ड्राई हो जाती हैं और कभी-कभी कॉर्नियल इंफेक्शन और कुछ अन्य छोटी-छोटी समस्याएं भी हो सकती हैं, जिससे रोशनी में जाने पर आंखों में जलन, चुभन एवं इर्रिटेशन हो सकती है।
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