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Written By: akhilesh dwivedi | Published : January 8, 2019 1:52 PM IST
Image credits by: दांतों के दाग-धब्बे हो सकते हैं बीमारी के लक्षण। ©Shutterstock.
दांतों में भूरे व सफेद धब्बे सामान्यतया गंदगी को मान लिया जाता है लेकिन यह एक तरह से दांतों की बीमारी है। दांतों में दिखने वाले इन दाग धब्बों को साधारण समझने की भूल नहीं करनी चाहिए। इस बीमारी को फ्लोरोसिस के नाम से जाना जाता है। इस बीमारी से छुटकारा भी आसानी से मिल जाता है। अगर आपके भी दांत में इस तरह की समस्या है तो डॉक्टर से दिखाकर इससे छुटकारा पा सकते हैं।
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फ्लोरोसिस होने का कारण
8 साल से कम उम्र के बच्चों को ज्यादा फ्लोराइड वाला मंजन करवाने से उनके दांतों में फ्लोरोसिस की समस्या हो सकती है। दरअसल फ्लोराइड हमारे दांतों के लिेए एक जरूरी तत्व है जो इसे मजबूती देता है। आमतौर पर सभी टूथपेस्ट में फ्लोराइड का इस्तेमाल किया जाता है। मगर छोटे बच्चों के दांतों के लिए फ्लोराइड की ज्यादा मात्रा खतरनाक हो सकती है इसलिए बाजार में बच्चों के लिए अलग टूथपेस्ट आते हैं, जिनमें फ्लोराइड की मात्रा कम होती है। ध्यान रखें अपने बच्चों को 8 साल की उम्र से पहले बड़े बच्चों वाला टूथपेस्ट न दें।
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फ्लोराइड का साइड-इफेक्ट
ज्यादा फ्लोराइड के इस्तेमाल से फ्लोरोसिस हो जाता है जिसमें दांतों का रंग हल्का हो जाता है या दांतों की सतह पर अनियमितताये पैदा हो जाती हैं । एक बार दांत पूरी तरह से विकसित हो जाता है तब उसपर ज्यादा फ्लोराइड का प्रभाव नहीं पड़ता।
फ्लोरोसिस दांत की बीमारी से ज्यादा कॉस्मेटिक समस्या है। कई मामलों में यह इतना हल्का होता है कि इसे डेंटिस्ट हीं पहचान सकते हैं। पीने के पानी में पर्याप्त मात्रा में फ्लोराइड होने के बावजूद अगर बच्चे फ्लोराइड की अतिरिक्त खुराक (दवा या टूथ पेस्ट निगलने के रूप में लेते हैं) तो उन्हें फ्लोरोसिस हो सकता है।
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फ्लोरोसिस के लक्षण
फ्लोरोसिस का मुख्य लक्षण दांतों पर सफेद, पीले या भूरे धब्बे हैं। कई बार ये धब्बे इतने हल्के होते हैं कि ध्यान देने पर ही दिखाई देते हैं या चिकित्सक की जांच में नजर आते हैं। हालांकि फ्लोरोसिस इसलिए खतरनाक है क्योंकि समय के साथ ये धब्बे और इनका रंग बढ़ता जाता है इसलिए सही समय पर इसका इलाज जरूरी है।
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फ्लोरोसिस का उपचार
फ्लोरोसिस दांतों की कोई गंभीर बीमारी न होकर कॉस्मेटिक की एक समस्या है क्योंकि इससे सिर्फ दांतों की सुन्दरता प्रभावित होती है; केविटिज वगैरह का निर्माण नहीं होता । इसलिए फ्लोरोसिस के इलाज में दाग को हटाने का प्रयास किया जाता है। यदि दाग सामने वाले दांतों पर हों तो यह चिंता का विषय है और दागयुक्त क्षेत्र को हटाने के लिए दन्त सफेदी की प्रक्रिया अपनाई जाती है।
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