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अगर आप करते हैं ये हरकतें तो आप बन रहे हैं फोन एडिक्ट !

क्या आप भी खाना खाते हुए या टीवी देखते हुए बार-बार अपना मोबाइल या लैपटॉप चेक करते हैं ?

Written By Sadhna Tiwari
Published : June 20, 2018 5:57 PM IST

स्मार्टफोन आया और हमने किश्तों पर ही सही उसे खरीद लिया। ऑफिस की अहम मीटिंग और कॉलेज में लेक्चर्स में सिखायी जा रही बातों से ज़्यादा हमें फिक्र होती है कि हमने आधे घंटे से इंस्टाग्राम पर कुछ पोस्ट नहीं किया। जाहिर है तकनीक और मशीनों की इस दुनिया में यह हमारा रोज़मर्रा की ज़िंदगी का ही एक चित्र कहा जा सकता है। लेकिन ठहरिए जनाब, कोई इम्पोर्टेंट अपडेट मिस ना करने की चाहत में बार-बार फोन देखना एक मानसिक समस्या भी हो सकती है।  जी हां, यह फोन और सोशल मी़डिया एडिक्शन हो सकता है। अब अगर आप जानना चाहते हैं कि टेक्नोलॉजी का इस्तेमाल कब एडिक्शन या नशे का रूप ले लेता है तो हम आपकी मदद करते हैं। बस आप नीचे दिए गए पॉइंट्स पढ़ें अगर इनमें से 4 आदतें भी आपमें हैं तो मान लीजिए आपको है फोन एडिक्शन।

  • सुबह जागने पर सबसे पहले आप अपना फोन चेक करते हैं। फेसबुक, स्नैपचैट, व्हाट्सऐप और इंस्ट्राग्राम पर 15-20 मिनट बिताने के बाद ही आपका दिन शुरु होता है।
  •  दो-चार मिनट ढ़ूढने के बाद भी अगर आपका फोन आपको ना मिले तो आप बेचैन हो जाते हैं। यही नहीं आपको शायद ही याद आए कि आपने पिछली बार फोन के बिना आधा घंटा कब और कैसे बिताया था।
  • खाना खाते हुए या टीवी देखते हुए भी आप बार-बार अपना मोबाइल या लैपटॉप चेक करते रहते हैं कि कहीं कोई नया मैसेज तो नहीं आया।
  • अपने परिवार और दोस्तों के साथ होते हुए भी आपका ध्यान अपने प्रियजनों पर कम और फोन की तरफ ज़्यादा होता है। आपके मां-बाप या बच्चे आप से बात करते रहते हैं और अपने क्वालिटी टाइम में भी आप फोन उठाने या किसी को मैसेज करने में बिल्कुल देर नहीं करते।
  • जब आपके फोन की बैटरी कम हो जाती है तो आप बहुत ज्यादा परेशान हो जाते हैं। आप आस-पास चार्जर तलाशने लगते हैं, कई बार तो साथ के लोगों से चार्जर मांगकर बस किसी तरह फोन की बैटरी फुल करना चाहते हैं।
  • आपको याद नहीं कि आपने पिछली बार एक अच्छी किताब कब पढ़ी थी और वो भी पूरी। मोबाइल में एक साथ कई काम करते रहने की अपनी आदत के कारण आपने यह आर्टिकल भी शायद ही पूरा पढ़ा है।
  • ऑफिस में आपके टारगेट्स भले ही बहुत ज़्यादा हों या आप कई घंटे काम करके घर लौटे हों, लेकिन थके होने के बाद भी सोने से पहले आप कुछ घंटें सोशल मीडिया पर ज़रूर बिताते हैं।

गौर कीजिए अपनी इन आदतों पर और इन्हें कंट्रोल करने की कोशिश करें। ध्यान, योग, खेलकूद और परिवार के साथ घूमने-फिरने से आपको इन आदतों को बदलने में मदद मिलेगी, और शायद आपको किसी मनोचिकित्सक की मदद की ज़रूरत भी ना पड़े। तो चलिए कल से ही अपनाइए कुछ अच्छी आदतें और अपने फोन- लैपटॉप पर धीरे-धीरे समय बिताना कम करें। हमारी शुभकामनाएं आपके साथ हैं।

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चित्रस्रोत: Shutterstock.