
किशोरी मिश्रा
किशोरी मिश्रा को डिजिटल मीडिया का लगभग 8+ वर्षों का व्यापक अनुभव है, जिसमें स्वास्थ्य (Health) और जीवनशैली ... Read More
Written By: Kishori Mishra | Published : May 7, 2026 4:47 PM IST
Image credits: ChatGPT
TB nutrition support : भारत दुनिया में टीबी के सबसे ज्यादा मामलों वाले देशों में से एक है। हालांकि, सरकार द्वारा इस बीमारी को कंट्रोल करने के लिए फ्री इलाज और दवाइयां दे रही है। लेकिन हाल ही में एक नई स्टडी सामने आई है, जिसमें यह बताया गया है कि अगर टीबी मरीजों को इलाज के साथ पौष्टिक आहार भी दिया जाए, तो हर साल करीब 1.2 लाख मौतों को रोका जा सकता है। उनका कहना है कि बेहतर डाइट से टीबी मरीजों की रिकवरी तेजी से होती है, जिसेस बीमारी की गंभीरता को रोका जा सकता है। साथ ही मौत का खतरा भी काफी हद तक कम किया जा सकता है।
BMJ ग्लोबल हेल्थ की स्टडी के मुताबिक, भारत के करीब 28 लाख टीबी मरीजों तक न्यूट्रिशनल सपोर्ट पहुंचाने से न सिर्फ उनकी रिकवरी तेज हो सकती है, बल्कि बीमारी की गंभीरता और मौत का खतरा भी काफी हद तक कम किया जा सकता है। आइए विस्तार से इस रिपोर्ट के बारे में जानते हैं-
हेल्थ एक्सपर्ट्स के अनुसार, कुपोषण शरीर की इम्यून सिस्टम को कमजोर करता है। ऐसे में टीबी बैक्टीरिया शरीर पर तेजी से असर डालता है। यही वजह है कि कमजोर इम्यूनिटी वाले लोगों में टीबी का खतरा ज्यादा देखा जाता है।
पोषण की कमी टीबी मरीजों के लिए डबल मार साबित हो सकती है, एक ओर बीमारी शरीर को कमजोर करती है, दूसरी ओर शरीर की पोषण संबंधी कमी बीमारी से लड़ने की ताकत छीन लेती है।
स्टडी में सुझाव दिया गया है कि टीबी मरीजों को प्रोटीन, कैलोरी, विटामिन्स और मिनरल्स से भरपूर फूड बास्केट दिया जाए। इसमें दालें, अंडे, दूध, फल, हरी सब्जियां, साबुत अनाज और हेल्दी फैट्स शामिल किए जा सकते हैं। इस तरह का आहार मरीज के शरीर को रिकवर करने, वजन बनाए रखने और दवाइयों के असर को बेहतर बनाने में मदद कर सकता है।
टीबी का इलाज लंबा चलता है, जो कई बार 6 महीने या उससे ज्यादा समय तक जारी रहता है। इस दौरान मरीज कमजोरी, भूख न लगना और थकान जैसी समस्याओं से जूझते हैं। अगर उन्हें पोषण संबंधी सपोर्ट मिले, तो वे इलाज को बेहतर तरीके से जारी रख पाएंगे और दवाइयां बीच में छोड़ने की संभावना भी कम होगी।
Disclaimer: टीबी के खिलाफ जंग सिर्फ दवाइयों से नहीं जीती जा सकती। सही पोषण, समय पर इलाज और जागरूकता, इन तीनों का मेल ही मरीजों की जिंदगी बचाने में बड़ी भूमिका निभा सकता है। नई स्टडी यह संकेत देती है कि अगर पोषण को प्राथमिकता दी जाए, तो लाखों परिवारों को टीबी के गंभीर असर से बचाया जा सकता है।