... Read More
By clicking “Accept All Cookies”, you agree to the storing of cookies on your device to enhance site navigation, analyze site usage, and assist in our marketing efforts. Cookie Policy.
Written By: Jitendra Gupta | Published : May 10, 2022 4:20 PM IST
आपकी लंबाई है Average से 2 इंच ज्यादा? आपके प्राइवेट पार्ट की इस जगह पर कैंसर का खतरा ज्यादा, जानें लक्षण
टेस्टिस (Testes) पुरुषों की प्रजनन क्षमता से जुड़ी एक ग्रंथि है, जो अंडाशय की थैली के नीचे स्थित होती है। ये एक प्रकार का पाउच होता है, जो पुरुषों के गुप्तांग के ठीक नीचे होती है। टेस्टिस न सिर्फ स्पर्म का उत्पादन करता है बल्कि टेस्टोस्टेरोन हार्मोन का उत्पादन करने के लिए जरूरी होता है। चूंकि टेस्टिस पुरुषों के शरीर का एक अभिन्न अंग है इसलिए यहां भी कैंसर की संभावना उतनी ही है, जितनी कि शरीर के दूसरे अंगों में। टेस्टिकुलर कैंसर तब होता है, जब टेस्टिकल में कोशिकाओं की असामान्य वृद्धि शुरू हो जाती है। अंडकोष में दर्द, सूजन या फिर गांठ इस कैंसर के शुरुआती लक्षण होते हैं।
ये एक प्रकार का आम कैंसर है, जो पुरुषों को 15 से 49 साल की उम्र के दौरान सबसे ज्यादा प्रभावित करता है। हालांकि इसके जोखिम कारक बहुत सारे हैं लेकिन इसका मतलब ये नहीं है कि आपको ये कैंसर होगा ही होगा। एक स्टडी में खुलासा हुआ है कि किन लोगों को ये कैंसर सबसे ज्यादा होता है। आइए जानते हैं क्या कहती है स्टडी।
कैंसर रिसर्च यूके के मुताबिक, ऐसे सबूत मिले हैं, जो ये दर्शाते हैं कि वे लोग जिनकी लंबाई औसत से ज्यादा है उनमें टेस्टिकुलर कैंसर का खतरा बढ़ा हुआ होता है वहीं, जिन पुरुषों की लंबाई औसत से कम है उनमें ये खतरा कम होता है। अमेरिका के शोधकर्ताओं ने 10 हजार से ज्यादा पुरुषों पर जारी डेटा से ये निष्कर्ष निकाला है। शोधकर्ताओं ने पाया कि औसत से दो इंच या फिर 5 सेंटीमीटर ज्यादा लंबाई 13 फीसदी तक टेस्टिकुलर कैंसर का खतरा बढ़ा देती है।
कैंसर रिसर्च यूके के स्वास्थ्य जानकारी की निदेशक सारा हियोम का कहना है कि इस शोध से लंबे पुरुषों को घबराने की जरूरत नहीं है क्योंकि 100 में से 4 से भी कम अंडकोष में गांठ से पीड़ित व्यक्ती को कैंसर होता है।
हालांकि किसी भी रंग के व्यक्ति को अंडकोष का कैंसर हो सकता है लेकिन जिन पुरुषों का रंग साफ होता है उनमें सामान्य लोगों की तुलना में अंडकोष के कैंसर का खतरा ज्यादा होता है। इस कारण के पीछे की वजह अभी स्पष्ट नहीं है। जॉन्स हॉपकिन्स मेडिसिन के मुताबिक, अमेरिका में साफ रंग वाले पुरुषों में अंडकोष का कैंसर काले (अफ्रीकी-अमेरिकन), हिसपैनिक, लैटीनो और एशियाई-अमेरिकन पुरुषों की तुलना में अधिक होता है।
क्रिप्टोर्चिडिज्म एक ऐसी स्थिति है, जिसमें एक या फिर दोनों अंडकोष जन्म से पहले अंडकोष की थैली में जाते ही नहीं हैं। जिन लड़कों को ये समस्या होती है, उनमें टेस्टिकुलर कैंसर का खतरा उतना ही अधिक होता है। हालांकि कैंसर के खतरे कोसीधे इस बात से जोड़कर नहीं देखा जा सकता है लेकिन ये स्थिति इस बात की ओर इशारा करती है कि इन लोगों को कैंसर की संभावना अधिक होती है। अगर किशोरावस्था से पहले स्थिति को ठीक करने के लिए सर्जरी की जाती है तो जोखिम को कम किया जा सकता है।