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Written By: intern23.seo | Updated : September 12, 2023 12:49 PM IST
एंटीबायोटिक्स दवाओं के सेवन के नुकसान..
Overuse of antibiotics: इस भागदौड़ भरी जिंदगी में छोटी-छोटी हेल्थ प्रॉब्लम्स होना एक आम बात है। बहुत सी बीमारियां मौसम के कारण तो बहुत सी बीमारी हमारी खराब लाइफस्टाइल के कारण होती हैं जैसे सर्दी, जुकाम, पेट दर्द, फ्लू, सिर दर्द और बुखार आदि कुछ ऐसी ही समस्याएं हैं। इन सामान्य स्वास्थ्य समस्याओं में हम अक्सर एंटीबायोटिक दवाओं का प्रयोग कर लेते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं बिना डॉक्टर के परामर्श के एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन हमारे लिए खतरनाक हो सकता है। कई रिपोर्ट्स में ये बात सामने आई है कि ज्यादा मात्रा में किया गया एंटीबायोटिक दवाओं का प्रयोग हमें काफी नुकसान पहुंचाता है।
‘द लैंसेट रीजनल हेल्थ’-साउथ ईस्ट एशिया के एक शोध में ये सामने आया कि भारत में एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल बहुत बड़ी तादाद में किया जा रहा है। विशेषकर ‘एजिथ्रोमाइसिन-500 मिली. टैबलेट भारत में सबसे ज्यादा प्रयोग की जा रही है। इसके बाद 'सफेक्सिम'-200 मिली. टैबलेट का यूज भी बड़ी मात्रा में किया जा रहा है। एक रिपोर्ट में ये बात सामने आई कि साल 2019 में भारत में एंटीबायोटिक दवाओं की कुल खपत 507.1 करोड़ रुपए थी। हेल्थ एक्सपर्ट्स की मानें तो एंटीबायोटिक दवाओं का इस्तेमाल हमें बहुत सावधानी से करना चाहिए।
डॉक्टरों का मानना है कि एंटीबायोटिक दवाओं का बहुत ज्यादा इस्तेमाल करने से हमारा शरीर एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस हो जाता है। यानी ज्यादा इस्तेमाल करने के बाद इन दवाओं का असर हमारे शरीर पर होना कम हो जाता है। वहीं लंबे समय के परिणाम की बात करें तो इनका असर शरीर पर पड़ना बंद भी हो जाता है। इसके साथ ही एंटीबायोटिक दवाओं का असर हमारे हार्ट और किडनी पर पड़ता है।
यदि आप एंटीबायोटिक दवाओं का ज्यादा सेवन कर रहे हैं तो इसके गंभीर परिणाम आपको किडनी पर देखने को मिल सकते हैं। हाल ही में हुई कुछ जांच में ये सामने आया है कि एंटीबायोटिक और पेन किलर का ज्यादा इस्तेमाल करने से किडनी फंक्शन में काफी बुरा असर पड़ता है।
एक्सपर्ट्स के मुताबिक यदि कोई मरीज लगातार 3 महीने तक एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन कर रहा है तो इससे वह ब्लड प्रेशर, हाइपरटेंशन और दमा जैसी बीमारी का शिकार हो जाता है। वहीं बात करें कोरोना के बाद की तो इस बीमारी के बाद ये लक्षण काफी तेजी से देखने को मिल रहे हैं, क्योंकि कोरोना के समय में बड़ी मात्रा में एंटीबायोटिक दवाओं का सेवन किया गया था।