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दिवाली का त्यौहार सबको आकर्षित करता है। लेकिन इस मौके पर होने वाला प्रदूषण सेहत को बहुत नुकसान भी पहुंचाता है। जिन लोगों को अस्थमा होता है उनके लिए प्रदूषण सीधा जहर समान होता है। कानून और सरकार पटाखे न चलाने की चाहे लाख कोशिशें कर लें लेकिन लोग किसी न किसी तरह पटाखे छोड़ते ही है। इसलिए अस्थमा रोगियों को खुद ही ऐसे कदम उठाने चाहिए जिससे उनकी दिक्कत न बढ़ें। क्योंकि जरा सी लापरवाही अस्थमा मरीजों में सांस की तकलीफ और कफ की समस्या को बढ़ा सकती है। आज हम अस्थमा मरीजों को ऐसे टिप्स बता रहे हैं जो प्रदूषण के बीच में उन्हें सुरक्षित रख सकते हैं।
अपने डॉक्टर से बात करें और उनकी लिखी दवा को स्किप न करें। दौड़ने से पहले आपको अपनी सांस पर नियंत्रण रखने की आवश्यकता है। अगर आपका अस्थमा कंट्रोल है तो सब ठीक है लेकिन अनियंत्रित अस्थमा आपके फेफड़ों और श्वसन प्रणाली पर तनाव डाल सकता है। रनिंग से फेफड़ों के स्वास्थ्य पर पड़ने वाले सकरात्मक प्रभाव को प्राप्त करने के लिए आपको सबसे पहले अपने लक्षणों की जांच करवानी होगी। अगर आपको अभी-अभी अस्थमा का पता चला है तो आपको किसी भी प्रकार की एक्सरसाइज करने से पहले थोड़ा समय लेना होगा और एक्सरसाइज को और बेहतर बनाने का प्रयास करना होगा।
एयरकंडीशनर के तापमान को सामान्य रखें। जब रात के समय एयरकंडीशनर की वजह से तापमान बहुत कम होता है, तो अस्थमा रोगी को सांस लेने में परेशानी होने लगती है। कई बार दमा का अटैक इतना खतरनाक होता है कि रोगी का दम उखड़ने लगता है। इसलिए अपने तापमान को सही रखें।
जब पटाखे छूट रहे हों, तो आप घर से बाहर बिल्कुल भी ना निकलें। पटाखों से निकलने वाली जहरीली गैसें जैसे कार्बन डाइऑक्साइड, कार्बन मोनोऑक्साइड, सल्फर ऑक्साइड हवा में घुल जाती हैं, जो आपके फेफड़ों में जाकर एलर्जी उत्पन्न कर सकती है। इससे सीने में जलन, सांस लेने में तकलीफ, सीने में जकड़न, यहां तक कि अस्थमा का अटैकभी आ सकता है। हो सके तो मुंह पर रुमाल या पॉल्युशन मास्क पहन कर रहें। इनहेलर, नेबुलाइजर, अपनी सारी दवाइयों को साथ रखें।
ऐसे प्रदूषण भरे माहौल में अस्थमा के मरीज़ों को इस बात का भी ख्याल रखना चाहिए कि उनका बिस्तर साफ रहे। दरअसल, साफ बिस्तर पर सोने से अस्थमा अटैक से बचा जा सकता है। जैसा कि, गंदी चादरों, तकिए के कवर और ओढ़ने-बिछाने की बाकी चीज़ों में प्रदूषण के कण मौजूद हो सकते हैं। इसीलिए, अपने बिस्तर की नियमित सफाई करें। तकिए के कवर और चादरें जल्दी-जल्दी बदलते रहें।
अगर आपके घर में बालकनी है और आपको वहां बैठने की आदत है तो कुछ दिनों तक ऐसा न करें। क्योंकि बालकनी में बैठने से धुंआ सीधा आपके अंदर जाएगा जो आपकी समस्या को बढ़ा सकता है। साथ ही किचन के आसपा भी न घूमें। यह दोनों चीज़ें अस्थमा ट्रिगर का काम करती हैं। इसीलिए, अगर ज़रूरी ना हो तो किचन में जाने से बचें।