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सबसे पहले हाथों-पैरों में दिखते हैं गुर्दे की बीमारियों के लक्षण, जानिए किडनी डैमेज होने के 4 शुरुआती संकेत

Early Signs of Kidney Damage: किडनी शरीर का एक महत्वपूर्ण अंग है। इसको होने वाला छोटा सा भी नुकसान आपकी सेहत के लिए बड़ा खतरा बन सकता है।

सबसे पहले हाथों-पैरों में दिखते हैं गुर्दे की बीमारियों के लक्षण, जानिए किडनी डैमेज होने के 4 शुरुआती संकेत

Written by Atul Modi |Published : May 15, 2024 7:32 PM IST

​हमारा शरीर अंगों की कई कड़ियों से आपस में जुड़ा है। यही कारण है कि जैसे ही आपको एक बीमारी होती है यह दूसरी बीमारियों को भी ट्रिगर करती है। डायबिटीज और हाई ब्लड प्रेशर आदि क्रोनिक किडनी डिजीज यानी सीकेडी (Chronic Kidney Disease) का कारण बन सकते हैं। खासतौर पर स्टेज 1 सीकेडी की आशंका इससे बढ़ जाती है। आइए जानते हैं क्या है किडनी डैमेज होने के शुरुआती लक्षण (Early Signs of Kidney Damage), कारण और कैसे होगा इसका उपचार।

जानिए क्या है क्रोनिक किडनी डिजीज का पहला चरण - What is Stage 1 Chronic Kidney Disease

क्रोनिक किडनी डिजीज स्टेज 1 सबसे शुरुआती चरण है। स्टेज 1 में आमतौर पर कोई लक्षण महसूस नहीं होता है। हालांकि समय पर ध्यान नहीं देने से किडनी को मामूली नुकसान हो सकता है। कम ग्लोमेरुलर निस्पंदन दर यानी जीएफआर इसका बड़ा कारण है। जीएफआर यह बताता है कि आपकी किडनी कितनी अच्छी तरह से अपशिष्ट पदार्थों को फिल्टर कर रही है। स्टेज 1 सीकेडी में जीएफआर 90 से 130 मिलीलीटर के बीच होता है। इसमें एल्बुमिन की जांच की जाती है। एल्बुमिन एक प्रकार का प्रोटीन है जो आमतौर पर रक्त में पाया जाता है। जब किडनी क्षतिग्रस्त हो जाती है, तो मूत्र में एल्बुमिन की मात्रा बढ़ जाती है।

किडनी डैमेज होने के शुरुआती (स्टेज 1 सीकेडी) के लक्षण - (Stage 1 Chronic Kidney Disease Symptoms)

अधिकांश मामलों में स्टेज 1 सीकेडी के लक्षण नजर नहीं आते हैं। यही कारण है कि लोग समय पर इसपर ध्यान नहीं देते, जिससे किडनी को नुकसान होता है। हालांकि कई बार इसके कारण उच्च रक्तचाप, हाथों या पैरों में सूजन, यूरिन इन्फेक्शन, यूरिन में खून आना यानी हेमाट्यूरिया जैसी की समस्याएं हो सकती हैं। इनमें से कोई भी लक्षण नजर आने पर आपको डॉक्टर से संपर्क करना चाहिए।

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इन परीक्षणों से लगता है सीकेडी का पता - How to Diagnose Chronic Kidney Disease

अगर आपके परिवार में गुर्दे के रोगों का इतिहास है या फिर आप डायबिटीज या उच्च रक्तचाप जैसी समस्याओं से परेशान हैं तो आपको स्टेज 1 सीकेडी होने की आशंका ज्यादा है। आमतौर पर किडनी रोगों की जांच के लिए सीटी स्कैन, अल्ट्रासाउंड, एमआरआई या किडनी बायोप्सी करवाई जाती है। इसी के साथ मूत्र परीक्षण और ईजीएफआर रक्त परीक्षण भी करवाया जाता है।

ऐसे कराएं स्टेज 1 सीकेडी का उपचार - Treatment of Chronic Kidney Disease

स्टेज 1 सीकेडी का समय पर उपचार करवाने से आप अपनी किडनी को होने वाले नुकसान से बचा सकते हैं। अगर आप डायबिटीज से पीड़ित हैं तो अपनी रक्त शर्करा को नियंत्रित रखना बेहद जरूरी है। इसके साथ ही उच्च रक्तचाप पर नजर बनाए रखें। किसी अच्छे नेफ्रोलॉजिस्ट से संपर्क करके उनका परामर्श जरूर लें।

सही डाइट कम करेगी खतरा - Healthy Diet For Kidney Disease

अपने दैनिक आहार में ऐसे खाद्य पदार्थ शामिल करें, जो किडनी के दोस्त हों। फाइबर, विटामिन, खनिज और एंटीऑक्सीडेंट से भरपूर फल-सब्जियां किडनी के लिए फायदेमंद होते हैं। पत्तेदार हरी सब्जियां, सेब, केले, अंगूर और स्ट्रॉबेरी किडनी के लिए बहुत सेहतमंद हैं।

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साबुत अनाज, कम वसा वाले प्रोटीन जैसे-टोफू, दालें और सीड्स को दैनिक आहार का हिस्सा बनाएं। साथ ही मोनोअनसैचुरेटेड और पॉलीअनसैचुरेटेड वसा का सेवन करें। यह आपको जैतून के तेल, मूंगफली के तेल, नट्स और सीड्स से मिलेंगे। ये किडनी के साथ दिल को भी सेहतमंद रखेंगे। दिनभर में पर्याप्त पानी पिएं। धूम्रपान या तंबाकू का सेवन बंद करें।

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