बढ़ती उम्र के साथ पैरों में सूजन व थकान कहीं हार्ट वाल्व रोग का संकेत तो नहीं? डॉक्टर से जानें कैसे लगाएं पता

Heart Valve Disease: उम्र के साथ होने वाले कुछ लक्षण देखने में आम होते हैं, लेकिन कई बार ये किसी गंभीर व जानलेवा बीमारी का संकेत हो सकते हैं। ऐसे ही कुछ लक्षणों के बारे में एक्सपर्ट्स आपको इस लेख में बताएंगे।

बढ़ती उम्र के साथ पैरों में सूजन व थकान कहीं हार्ट वाल्व रोग का संकेत तो नहीं? डॉक्टर से जानें कैसे लगाएं पता
VerifiedVERIFIED By: Dr. Lalitaditya Malik

Written by Mukesh Sharma |Updated : January 8, 2026 4:59 PM IST

Pero Me Sujan Ke Karan: उम्र बढ़ने के साथ-साथ शरीर में कुछ बदलाव आने लगते हैं और यह शरीर की एक नॉर्मल प्रक्रिया होती है। जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है घुटनों में दर्द, थकान, त्वचा पतली पड़ने जैसे लक्षण देखे जाने लगते हैं। इन्हें हम बुढ़ापे के लक्षण भी कह सकते हैं। लेकिन बढ़ती उम्र के साथ दिखने वाले कुछ लक्षण ऐसे भी हो सकते हैं जो वास्तव में किसी अंदरूनी बीमारी के होने का संकेत देते हैं। जब बढ़ती उम्र में पैरों में सूजन व थकान जैसे लक्षण होने लगते हैं तो लोग उन्हें सामान्य बुढ़ापे जैसे लक्षण समझकर नजरअंदाज कर देते हैं। कभी-कभी इस तरह की समस्याओं को आर्थराइटिस या फिर पोषण की कमी से होने वाली समस्या मान लिया जाता है। लेकिन लक्षणों को आम समस्या समझ कर इग्नोर नहीं करना चाहिए और इनकी पुष्टि जरूर करनी चाहिए, क्योंकि यह कभी-कभी हार्ट वाल्व डिजीज का कोई संकेत हो सकता है।

क्या है हार्ट वाल्व डिजीज

मानव हृदय में चार वाल्व होते हैं, जिनका नाम है ट्राइकसपिड, माइट्रल, पल्मोनरी और एओर्टिक वाल्व। इन चारों हार्ट वाल्व का काम सही दिशा में खून का प्रवाह बना कर रखना होता है और उसके लिए यह एक खास लय में खुलते व बंद होते हैं। लेकिन जब हार्ट वाल्व से जुड़ी कोई दिक्कत हो जाती है, तो ये ठीक से खुल या बंद नहीं हो पाते हैं, जिसका सीधा खून का सामान्य प्रवाह प्रभावित होता है। इस स्थिति के कारण हार्ट को भी ब्लड पंप करने में दिक्कत आने लगती है और शरीर के कई हिस्सों को पर्याप्त ऑक्सीजन युक्त खून नहीं मिल पाता है और बिना ऑक्सीजन वाला खून वापस हृदय तक नहीं जा पाता है।

वाल्व के ठीक से काम न करने के पीछे कई अलग-अलग बीमारियां हो सकती हैं, हार्ट वाल्व में इन्फेक्शन, होना, कैल्शियम जम जाना और जेनेटिक कारणों से हार्ट वाल्व की बनावट सामान्य न होना आदि। हार्ट वाल्व ठीक से काम न करने के कारण कई जटिलताएं पैदा होने लगती हैं जैसे हार्ट द्वारा ब्लड पंप ठीक से न हो पाना, फेफड़ों और नसों में दबाव बढ़ना आदि।

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खराब वाल्व से पैरों में सूजन व थकान क्यों

दरअसल पैरों या टखनों का सीधा हार्ट वाल्व से तो कोई संबंध नहीं है, लेकिन एक पूरी प्रक्रिया के जरिए ये एक दूसरे से संबंधित होते हैं। जब हृदय के वाल्व ठीक से काम नहीं करते हैं, तो शरीर में खून और ऑक्सीजन की आपूर्ति बाधित होती है। जिसके कारण सांस फूलने लगती है और थकान महसूस होती है। ऐसा बुजुर्गों में इसलिए देखा जाता है, क्योंकि उम्र के साथ उनकी हार्ट वाल्व कमजोर पड़ जाती है। पैरों में सूजन यानी एडिमा आमतौर पर हार्ट वाल्व डिजीज के कारण तब होता है जब ब्लड फ्लो कमजोर हो जाने के कारण हार्ट से दूर और नीचे की तरफ वाले हिस्से जैसे कि पैरों के पास से बिना ऑक्सीजन वाला खून वापस हार्ट तक कम पहुंचने लगता है और पैरों में जमा होने लगता है। दबाव बढ़ने के कारण इन हिस्सों में फ्लूइड जमा होने लगता है, जिसके कारण पैरों व टखनों में सूजन देखी जा सकती है। खून के बहाव में कमी के कारण कई स्थितियां हो सकती हैं:

  • खून निचले शरीर में जमा होने लगता है।
  • ज्यादा दबाव होने पर फ्लूड आस-पास के टिश्यू में जमा हो सकता है।
  • टखने और पैरों में सूजन या फूले हुए महसूस होते हैं।

कम समय तक सूजन बनी रहे, तो आमतौर से कोई नुकसान नहीं है, लेकिन अगर सूजन स्थायी रूप से बनी हुई है, तो तुरंत डॉक्टर को दिखाना चाहिए क्योंकि यह हृदय पर बढ़ते तनाव का लक्षण हो सकती है।

क्या है इलाज

अगर किसी व्यक्ति को हार्ट वाल्व डिजीज है, तो ट्रीटमेंट के रूप में उसे कुछ दवाओं व खास लाइफस्टाइल बदलाव से काफी मदद मिल सकती है। इसके अलावा विशेष मामलों में सर्जरी को ही सबसे बेहद उपाय माना जाता है। हार्ट वाल्व रिपेयर, रिप्लेसमेंट एवं बैलून वाल्वोप्लास्टी जैसी थेरेपी मिनिमली इनवेसिव प्रक्रियाएं हैं, जो असामान्य वाल्व को ठीक कर सकती हैं। इसलिए अगर किसी बुजुर्ग व्यक्ति में भी हार्ट वाल्व डिजीज के लक्षणों को पहचान कर जल्द से जल्द डॉक्टर से संपर्क कर लेना चाहिए।

इस बात का ध्यान रखना जरूरी है कि पैरों में सूजन और थकान का होना जरूरी नहीं है कि यह किसी बढ़ती उम्र का ही संकेत हो और ये हार्ट वाल्व डिजीज का संकेत भी हो सकता है। ये हृदय पर बढ़ते दबाव और वाल्व रोग की वजह से भी हो सकते हैं। वृद्धों को इन लक्षणों के प्रति सतर्क रहना चाहिए और समय पर हृदय की जांच करानी चाहिए। तुरंत निदान और विशेषज्ञ देखभाल से जीवन की गुणवत्ता और इलाज के दीर्घकालिक नतीजों में काफी सुधार लाया जा सकता है।

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