
मुकेश शर्मा
मुकेश शर्मा दिल्ली यूनिर्विसिटी से जर्नलिज्म डिग्री होल्डर हैं और पिछले 8 साल से Health Journalism से जुड़े हुए ... Read More
Written By: Mukesh Sharma | Published : May 7, 2026 7:46 PM IST
joint pain or burnout signs (Image credit: Chatgpt)
शरीर के किसी जोड़ का दर्द या भी बदन दर्द आज के समय में बहुत ही सामान्य समस्या बनकर रह गई है, जिसे आजकल लोगों ने गंभीरता से लेना बंद कर दिया है। क्योंकि आजकल की भागदौड़ में थकान, तनाव और लगातार काम का दबाव रहना आम बात हो गई है और ये चीजें लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बन चुकी हैं। कई लोग इसे सामान्य मानकर नजरअंदाज भी कर देते हैं। लेकिन हर समय थका हुआ महसूस करना, छोटी-छोटी बातों पर चिड़चिड़ापन होना या शरीर में लगातार दर्द बने रहना हमेशा सिर्फ बिजी लाइफस्टाइल का असर नहीं होता। कई बार यह शरीर की तरफ से मिलने वाले शुरुआती संकेत होते हैं, जो धीरे-धीरे बर्नआउट की ओर इशारा करते हैं और जब हम इन शुरुआती संकेतों को इग्नोर करते हैं, तो इसके कारण गंभीर रूप से बीमार पड़ने का खतरा और ज्यादा बढ़ जाता है।
चिंता की बात यह है कि यह समस्या तेजी से बढ़ रही है। स्टडीज के अनुसार हाई प्रेशर सेक्टर्स में काम करने वाले हर चार में से लगभग एक प्रोफेशनल में बर्नआउट से जुड़े लक्षण देखे जा रहे हैं। वहीं, वर्कप्लेस ट्रेंड्स भी यह दिखा रहे हैं कि तनाव से जुड़ी स्वास्थ्य समस्याएं लगातार बढ़ रही हैं। ऐसे में शरीर के शुरुआती संकेतों को समय रहते पहचानना बेहद जरूरी हो जाता है।
Mr. Surya Maguluri, Co-founder & CTO, CURAPOD
सामान्य थकान और बर्नआउट से जुड़ी थकान में फर्क होता है। रोजमर्रा की थकावट आमतौर पर आराम या अच्छी नींद के बाद कम हो जाती है, लेकिन बर्नआउट से जुड़ी थकान लंबे समय तक बनी रहती है। कई लोगों को ऐसा महसूस होता है कि पूरी नींद लेने के बावजूद शरीर पूरी तरह रिकवर नहीं हो पा रहा। अगले दिन भी वही भारीपन और थकान महसूस होती रहती है। यह इस बात का संकेत हो सकता है कि शरीर लगातार दबाव में काम कर रहा है।
तनाव का असर सिर्फ मानसिक रूप से नहीं बल्कि शरीर पर भी दिखाई देता है। गर्दन, कंधों और कमर में जकड़न, बार-बार सिरदर्द होना या शरीर में लगातार असहजता महसूस होना आदि भी कई बार तनाव के संकेत हो सकते हैं।। अक्सर लोग इन समस्याओं को लंबे समय तक बैठकर काम करने या थकान का असर मान लेते हैं। लेकिन जब ये दिक्कतें बार-बार होने लगें, तो यह शरीर पर बढ़ते दबाव का संकेत हो सकता है। जो लोग पहले से आर्थराइटिस या लंबे समय से मस्क्युलोस्केलेटल समस्याओं से जूझ रहे हैं, उनके लिए यह परेशानी और ज्यादा बढ़ सकती है। ऐसे में तनाव और पुरानी स्वास्थ्य समस्याएं एक साथ असर डालने लगती हैं।
बर्नआउट सिर्फ शरीर को प्रभावित नहीं करता, बल्कि इसका असर मानसिक और भावनात्मक स्वास्थ्य पर भी दिखाई देने लगता है। ध्यान लगाने में परेशानी होना, छोटी-छोटी बातें भूलना या फैसले लेने में ज्यादा समय लगना मानसिक थकान के संकेत हो सकते हैं। इसके साथ ही चिड़चिड़ापन रहना, काम में मन न लगना और लोगों से दूरी महसूस करना जैसी बातें भी धीरे-धीरे सामने आने लगती हैं। अक्सर लोग इन्हें काम के दबाव या खराब मूड का हिस्सा मानकर नजरअंदाज कर देते हैं, जबकि कई बार यही लगातार बढ़ते तनाव के शुरुआती संकेत होते हैं।
यह सच है कि लोग अक्सर इस तरह के लक्षणों को दबाने के अलग-अलग प्रयास करते हैं जैसे थकान होने पर ज्यादा कैफीन लेना, सिरदर्द होने पर तुरंत दवा खा लेना या शरीर के दर्द के लिए अस्थायी उपाय करना आज बहुत आम हो चुका है। हालांकि, इससे कुछ समय के लिए राहत जरूर मिलती है, लेकिन समस्या की असली वजह वहीं बनी रहती है। धीरे-धीरे शरीर और ज्यादा संकेत देने लगता है, जिन्हें नजरअंदाज करना मुश्किल हो जाता है। इतना ही नहीं जो लोग इसे लगातार नजरअंदाज कर रहे हैं, वे बड़ी-बड़ी बीमारियों को न्योता दे रहे हैं।
यह भी देखा जा रहा है कि जहां लोग पहले बार-बार दर्द जैसी समस्याओं से निपटने के लिए पेन किलर आदि लेते थे, अब पेन और स्ट्रेस मैनेजमेंट के तरीकों में भी बदलाव हो चुका है। क्योंकि लोग समझ चुके हैं कि बार-बार पेनकिलर लेने के साइड इफेक्ट्स होते हैं। लोग इनसे निपटने के लिए एआई की मदद लेने लगे हैं और साथ ही साथ ऐसे विकल्पों की तरफ रुझान बढ़ रहा है, जो रोजमर्रा की जिंदगी के साथ आसानी से फिट हो सकें जैसे वियरेबल और नॉन-इनवेसिव डिवाइस आदि का इस्तेमाल करना इसी तरह का एक विकल्प बनकर सामने आए हैं।
गर्दन, कंधों, घुटनों और कमर जैसे हिस्सों में राहत देने के लिए बनाए गए ये डिवाइस रेड और नियर-इन्फ्रारेड लाइट थेरेपी यानी फोटोबायोमॉड्यूलेशन का इस्तेमाल करते हैं। यह तकनीक मांसपेशियों की जकड़न को कम करने और रिकवरी को सपोर्ट करने में मदद करती है। खास बात यह है कि इसके लिए रोजमर्रा की दिनचर्या को रोकने की जरूरत नहीं पड़ती। शरीर में होने वाली असहजता को शुरुआती स्तर पर मैनेज करना लंबे समय तक बढ़ने वाले तनाव को कम करने में मदद कर सकता है, खासकर उन लोगों के लिए जो पहले से क्रोनिक पेन जैसी समस्याओं से जूझ रहे हैं।
रोजमर्रा की छोटी-छोटी परेशानियों को नजरअंदाज करना सही नहीं है। कई बार शरीर इन्हीं संकेतों के जरिए बताने की कोशिश करता है कि उसे आराम और बेहतर देखभाल की जरूरत है। अच्छी नींद लेना, दिनभर में छोटे-छोटे ब्रेक लेना और शरीर को नियमित रूप से एक्टिव रखना जैसे छोटे बदलाव लंबे समय तक तनाव को कम करने में मदद कर सकते हैं। अगर इन्हें सही राहत देने वाले समाधानों के साथ जोड़ा जाए, तो शारीरिक और मानसिक दबाव को बेहतर तरीके से मैनेज किया जा सकता है। बर्नआउट अचानक नहीं होता। शरीर इसके संकेत धीरे-धीरे देता रहता है। फर्क सिर्फ इतना होता है कि हम उन्हें समय रहते समझ लेते हैं या तब ध्यान देते हैं जब उन्हें नजरअंदाज करना मुश्किल हो जाता है।
डिसक्लेमर: इस लेख का उद्देश्य केवल खराब लाइफस्टाइल से स्वास्थ्य को होने वाली परेशानियों से जुड़ी सही जानकारी देना है इसमें दी गई किसी भी जानकारी का इस्तेमाल किसी भी बीमारी के इलाज के रूप में इस्तेमाल नहीं किया जाना चाहिए। इसके लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।