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Written By: Anshumala | Updated : August 28, 2020 1:34 PM IST
If you're not vitamin D deficient, you don't need to run out and get a supplement.
Vitamin D deficiency side effects : हड्डियों की मजबूती के लिए सबसे जरूरी है विटामिन डी (Vitamin D)। विटामिन डी का मुख्य स्रोत सूर्य की किरणे हैं। इसलिए कहा जाता है कि शरीर को हर दिन धूप जरूर लगना चाहिए, ताकि आपकी हड्डियों मजबूत रहें। विटामिन डी मुख्य रूप से तीन प्रकार का होता है, विटामिन डी-1, डी-2, और डी-3। ये तीनों ही विटामिन डी शरीर के लिए बहुत फायदेमंद और आवश्यक होते हैं। विटामिन डी ना सिर्फ शरीर में कैल्शियम के अवशोषण (absorption) में मदद करता है, बल्कि संपूर्ण चयापचय (Metabolic), मांसपेशियों, न्यूरोलॉजिकल, हार्ट और रोग प्रतिरोधक क्षमता की कार्य प्रणाली को भी प्रभावित करता है। शरीर में विटामिन डी की कमी होने से सेहत को गंभीर रूप से नुकसान (vitamin d deficiency causes which disease) हो सकते हैं।
वर्ष 2018 में जर्नल ऑफ फैमिली मेडिसिन और प्राइमरी केयर में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, भारतीय में विटामिन डी की कमी (Vitamin D deficiency) काफी देखी गई है। सभी आयु वर्ग के 80-90% भारतीय विटामिन डी की कमी से पीड़ित हैं। भारत में विटामिन डी की कमी से पीड़ित लोगों की इतनी बड़ी प्रतिशत काफी गंभीर बात है। कई अन्य स्टडी इस बात की तरफ इशारा करती हैं कि विटामिन डी की कमी होने से डिप्रेशन, बाइपोलर डिसऑर्डर और अन्य मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं होन का खतरा (Vitamin D deficiency side effects in hindi) बढ़ जाता है।
विटामिन डी की कमी कई अन्य स्वास्थ्य मुद्दों के जोखिम को बढ़ाती है और इसे बहुत गंभीरता से लिया जाना चाहिए। विटामिन डी की कमी से निम्न स्वास्थ्य समस्याएं (Vitamin D deficiency causes which Diseases) हो सकती हैं:
शरीर में विटामिन डी की कमी होने से हड्डियां कमजोर होने लगती हैं। बच्चों में गंभीर रूप से विटामिन डी की कमी होने से रिकेट्स (rickets) बीमारी होने की संभावना बढ़ जाती है। वयस्कों में ऑस्टियोपोरोसिस (osteoporosis) का कारण बनता है। इन स्थितियों में हड्डियां कमजोर, सॉफ्ट, हड्डियों की विकृति (skeletal deformities), मांसपेशियों की कमजोरी आदि हो जाती है।
विटामिन डी की कमी प्रतिरक्षा प्रणाली (Immune system) को कमजोर कर देती है, जिससे संक्रमण होने की संभावना काफी हद तक बढ़ जाती है। जिन लोगों में विटामिन डी की कमी होती है, उनमें अपर रेस्पिरेटरी ट्रैक्ट इन्फेक्शन, कोविड-19 (COVID-19), ट्यूबरकुलोसिस आदि से पीड़ित होने की संभावना अधिक रहती है।
बतौर इम्यून सिस्टम के मॉड्युलेटर के रूप में होने के नाते, विटामिन डी ऑटोइम्यून रोगों के होने के खतरे को कम करता है। इसके विपरीत, जिन लोगों में विटामिन डी की कमी होती है, उनमें रुमेटॉइड अर्थराइटिस (rheumatoid arthritis), मल्टीपल स्केलेरोसिस, ल्यूपस और सोराइसिस जैसी ऑटोइम्यून बीमारियों (autoimmune diseases) के होने का खतरा काफी बढ़ जाता है।
विटामिन डी कोशिकाओं की वृद्धि और उनकी सेहत को नियंत्रित करता है। कई अध्ययनों में लो विटामिन डी (Vitamin D deficiency side effects) को कई प्रकार के कैंसर से जोड़ा गया है, जिनमें फेफड़े, ब्रेस्ट, कोलोरेक्टल, प्रोस्टेट, ओवेरियन, पैन्क्रियाटिक और इसोफेगल कैंसर (esophageal cancer) शामिल हैं।
जिन लोगों को हृदय संबंधित बीमारियां होती हैं, उनमें गंभीर रूप से विटामिन डी की कमी (Vitamin D Deficiency) होती है। खासकर वे लोग जो मायोकार्डियल इन्फार्क्शन (myocardial infarction) से ग्रस्त हों। शरीर में विटामिन डी का लेवल अधिक होने से हृदय रोगों के होने की संभावना काफी हद तक कम हो जाती है। विटामिन डी की कमी को दूर करने के लिए डायट में विटामिन डी से भरपूर खाद्य पदार्थ का सेवन करें। विटामिन डी के मुख्य स्रोत हैं दूध, चीज, दही, पनीर, फैटी फिश, अंडे, मशरूरम आदि। इन्हें अपने डायट में हर दिन शामिल करें।
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