'स्वाइन कोरोना वायरस' कर सकता मनुष्यों को भी संक्रमित, एक्सपर्ट्स ने दी सूअरों से फैलने वाले इस नये वायरस की चेतावनी

एक हालिया रिसर्च में यह बात सामने आयी है कि सुअरों को बीमार करने वाला कोरोना वायरस इंसानों में भी फैल सकता है। सुअर के नवजात बच्चों में इस वायरस की वजह से  डायरिया की समस्या होती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस कोरोना वायरस का स्ट्रेन मनुष्यों के शरीर में भी पहुंच सकते हैं। जिससे, उन्हें इंफेक्शन हो सकता है। गौरतलब है कि, स्वाइन कोरोना वायरस को वैश्वि महामारी (कोविड-19 संक्रमण) की मार झेल रही वैश्विक आबादी के लिए नये खतरे के तौर पर देखा जा रहा है।

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Written By: Sadhna Tiwari | Updated : October 15, 2020 12:51 PM IST

Swine Coronavirus: स्वाइन कोरोना वायरस, यह शब्द कुछ दिनों से लगातार चर्चा में बना हुआ। वैज्ञानिकों ने लोगों को इस बीमारी से सुरक्षित रहने के लिए आगाह किया है। दरअसल, एक हालिया रिसर्च में यह बात सामने आयी है कि सूअरों को बीमार करने वाला कोरोना वायरस (Swine Coronavirus) इंसानों में भी फैल सकता है। सुअर के नवजात बच्चों में इस वायरस की वजह से  डायरिया की समस्या होती है। वैज्ञानिकों का कहना है कि इस कोरोना वायरस का स्ट्रेन मनुष्यों के शरीर में भी पहुंच सकते हैं। जिससे, उन्हें इंफेक्शन हो सकता है। गौरतलब है कि, स्वाइन कोरोना वायरस को वैश्विक महामारी (कोविड-19 संक्रमण) की मार झेल रही वैश्विक आबादी के लिए नये खतरे के तौर पर देखा जा रहा है।

सूअरों से इंसानों में फैल सकता है स्वाइन कोरोना वायरस :

यूनिवर्सिटी ऑफ नॉर्थ कैरोलिना (अमेरिका)  के वैज्ञानिकों का कहना कि, स्वाइन कोरोना वायरस के स्ट्रेन को स्वाइन एक्युट डायरिया सिंड्रोम कोरोना वायरस (SADS-CoV) कहा जाता है। इन वैज्ञानिकों ने बताया कि  यह संक्रमण चमगादड़ों से फैला था, जिसके बारे में चीन में दिसंबर 2016 में सबसे पहले पता चला था। जहां सूअरों में इस प्रकार के इंफेक्शन के लक्षण दिखायी पड़े थे। इस रिसर्च पेपर को  जर्नल पीएनएएस (PNAS) में प्रकाशित किया गया था। रिसर्च के दौरान वैज्ञानिकों ने लैब टेस्ट में पाया कि यह स्वाइन कोरोना वायरस मनुष्यों के शरीर में पहुंचकर नुकसान पहुंचा सकता है। यह वायरस, मनुष्यों की किडनी, आंतों और श्वसन मार्ग में आसानी से प्रवेश  कर शरीर को नुकसान पहुंचा सकता है।

Swine Coronavirus कर सकता श्वसन मार्ग पर हमला :

एक्सपर्ट्स के मुताबिक, कोरोना वायरस का यह नया स्ट्रेन, उसी कोरोना वायरस समूह का हिस्सा है, जो कोविड-19 संक्रमण का कारण हैं। कोविड-19 मनुष्यों में श्वसन मार्ग में आसानी से प्रवेश करता है और सांस से जुड़ी परेशानियां पैदा करता है। जबकि, यह नया वायरस (SADS-CoV) सूअरों के पेट से जुड़ी कई बीमारियों को बढ़ाने का काम करता है। यह एक अल्फा-कोरोना वायरस है,  जिसके संक्रमण की वजह से सूअरों को डायरिया की गम्भीर समस्या हो सकती है।

अभी इंसानों में तैयार नहीं हुई है स्वाइन कोरोना वायरस के खिलाफ इम्यूनिटी :

वैज्ञानिकों का दावा है कि, सूअरों को संक्रमित करने वाला यह वायरस, इंसानों को भी प्रभावित कर सकता है। यह  इंसान के किडनी और आंतों की संवेदनशील कोशिकाओं पर आसानी से हमला कर सकता है। एक्सपर्ट्स के अनुसार, इस वायरस का सामना करने के लिए अभी तक इंसानों में इम्यूनिटी तैयार नहीं हुई है। हालांकि, अभी तक किसी व्यक्ति के संक्रमित होने की भी पुष्टि नहीं की गयी है। शोधकर्ता इस दिशा में अभी और रिसर्च करने की बात कह रहे हैं। ताकि, इस वायरस को रोकने, इसके बचाव और इलाज के तरीकों को समझा जा सके।

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