सुपरबग का हमला : बीमार हो रहे हैं दुनिया भर के अस्‍पताल

एक रिपोर्ट के मुताबिक यूरोप में सालाना 33 हजार जानें ले लेता है सुपरबग, जिनसे निपटना अब अस्पतालों के लिए भी चुनौती बन गया है।

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Written By: Yogita Yadav | Published : February 15, 2019 1:36 PM IST

अभी हाल ही में बरेली में डॉक्‍टरों के हाथों पर सुपरबग मिलने का मामला सामने आया है। ये ऐसे बैक्टीरिया हैं जिन पर दवाइयों का कोई असर नहीं होता। यूरोपीयन सेंटर फॉर डिजीज प्रिवेंशन एंड कंट्रोल (ईसीडीसी) के आंकड़ों के मुताबिक यूरोपीय संघ के देशों में हर साल तकरीबन 33 हजार लोग एंटीबायोटिक-रेसिस्टेंट बैक्टीरिया की चपेट में आने से मारे जाते हैं। इस बैक्टीरिया को सुपरबग भी कहा जाता है। ये सुपरबग सबसे असरदार एंटीबायोटिक दवाइयों का सामना करने में सक्षम होते हैं, खासकर ऐसी दवाइयां जिनका इस्तेमाल आखिरी उपचार के रूप में मरीज पर किया जाता है।

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खतरनाक है स्थिति  

साइंस पत्रिका लैंसेट में छपी एक स्टडी के मुताबिक सुपरबग का असर एचआईवी, फ्लू, टीवी जैसी बीमारियों के संयुक्त प्रभाव जितना घातक है। रिसर्चरों के मुताबिक, "एंटीबायोटिक के खिलाफ अपनी प्रतिरोधी क्षमता विकसित कर चुके ये बैक्टीरिया आधुनिक स्वास्थ्य प्रणाली के लिए खतरा हैं." 2007 में इस बैक्टीरिया के चलते तकरीबन 25 हजार मौतें हुईं थीं। नवजात और बुजुर्ग व्यक्तियों को इस बैक्टीरिया से अधिक खतरा है। यह भी देखा गया है कि 75 फीसदी मामलों में इंफेक्शन अस्पताल और क्लीनिक से मरीजों तक पहुंचता है। यूरोपीय देशों के भीतर भी यह अंतर बना हुआ है।

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यूरोपीय संघ में हाल

ईसीडीसी ने अपनी इस स्टडी में 2015 का डाटा इस्तेमाल किया था। डाटा के मुताबिक यूरोपीय संघ और यूरोपीय आर्थिक क्षेत्र (ईईए) में आने वाले देशों के भीतर इस प्रतिरोधी क्षमता वाले बैक्टीरिया के चलते पांच प्रकार के इंफेक्शन नजर आए। इसने ग्रीस और इटली को सबसे अधिक प्रभावित किया। वहीं उत्तरी यूरोपीय देशों में इंफेक्शन का असर कम दिखा।

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स्वास्थ्य विशेषज्ञ काफी समय से इस बैक्टीरिया से होने वाले खतरों की चेतावनी दे रहे हैं। ईसीडीसी ने कहा, "एंटीबायोटिक दवाइयों का प्रभावी न होना मुश्किल भरा होता है। कई मामलों में तो उपचार करना असंभव हो जाता है।"

रिसर्चरों ने अपनी इस स्टडी में कहा है कि इस गंभीर स्वास्थ्य चुनौती से निपटने के लिए यूरोपीय संघ में और वैश्विक स्तर पर आपसी समन्वय की आवश्यकता होगी। साथ ही हर देश को अपनी जरूरत के मुताबिक बचाव और रोकथाम वाली नीतियों की जरूरत होगी।

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छोटे बच्‍चों और बुजुर्गों के लिए बरतें ये अहतियात

दुनिया भर के अस्‍पताल सुपरबग के हमलों से बीमार हो रहे हैं। लंबे समय तक अस्‍पतालों में ही जिंदा रहने के कारण इनमें दवाओं से निपटने की शक्ति भी बढ़ती जा रही है। जिससे छोटे बच्‍चे, बुजुर्ग और किसी भी खास वजह से शारीरिक रूप से कमजोर लोगों पर इनका हमला जल्‍दी हो जाता है। मेलजोल पूर्ण समाज में अकसर मरीजों से दोस्‍तों और रिश्‍तेदारों से मिलने अस्‍पताल जाने का चलन है। पर यह आदत स्‍वास्‍थ्‍यपरक नहीं है। आप कितने भी मेलजोल पूर्ण हों छोटे बच्‍चों और बुजुर्गों को जब तक बहुत जरूरी न हो अस्‍पताल ले जाने से परहेज करें।

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