धर्मेंद्र के बेटे सनी देयोल ने बताया था अपनी इस बीमारी के बारे में, इन चीजों में नहीं चलता था दिमाग

Sunny Deol Health Condition: धर्मेंद्र के बेटे सनी देओल ने भी एक बार मीडिया इंटरव्यू के दौरान अपनी एक हेल्थ कंडीशन के बारे में बताया था जिसे सुनकर उनके फैंस काफी परेशान हो गए थे और चिंता में पड़ गए थे।

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Written By: Mukesh Sharma | Published : November 11, 2025 7:59 PM IST

Sunny Deol Dyslexia Condition: लीजेंड एक्टर और बॉलीवुड के “हीमैन” धर्मेंद्र देयोल आजकल अपने खराब हो रहे स्वास्थ्य को लेकर काफी चर्चा में हैं और उनके फैंस काफी परेशान हैं। इसी प्रकार कई बार उनके सनी देयोल भी अपनी हेल्थ को लेकर फैंस की नींद उड़ा चुके हैं। अपने दमदार डायलॉग्स से बॉलीवुड इंडस्ट्री में लंबे समय तक राज करने वाले एक्टर सनी देओल ने मीडिया के सामने एक बार अपनी हेल्थ कंडीशन के बारे में बताया था और उस बारे में जानकर उनके फैंस भी काफी परेशान हो गए थे।

सनी देओल की हेल्थ प्रॉब्लम

दरअसल एक बार एक मीडिया चैनल को इंटरव्यू देते समय जाने-अनजाने में अपनी हेल्थ कंडीशन के बारे में बता दिया था। बात करते हुए सनी ने मीडिया चैनल के लोगों को बताया था कि अगर आप टेलीप्रॉम्प्टर दोगे तो मुझे दिक्कत होगी। इस दौरान सनी देओल अपनी डिस्लेक्सिया की समस्या के बारे में बता रहे थे। (और पढ़ें - डिस्लेक्सिया के लक्षण क्या हैं)

पढ़ने में आती थी दिक्कत

सनी देओल ने आगे बताया कि उन्होंने पढ़ाई के दिनों में भी काफी तकलीफों का सामना करना पड़ा था क्योंकि उन्हें याद नहीं रहता था और इस कारण से उन्हें अच्छे स्टूडेंट्स में नहीं गिना जाता था। उन्होंने इंटरव्यू के दौरान बताया कि पढ़ाई के चक्कर में उन्हें कई बार मार भी खानी पड़ी थी। वे एग्जाम में भी स्पोर्ट्स की मदद से ही पास होते थे।

क्या है डिस्लेक्सिया

भारत में आज के समय में भी ज्यादातर लोग डिस्लेक्सिया के बारे में नहीं जानते हैं। दरअसल, यह एक तरह का न्यूरोलॉजिकल डिसऑर्डर है, जिसके कारण व्यक्ति को पढ़ने, लिखने, स्पेलिंग्स को याद रखने और उनका उच्चारण करने में दिक्कत आती है। इन प्रक्रियाओं पर व्यक्ति का दिमाग ठीक से काम नहीं कर पाता है, जिसके कारण प्रक्रिया बहुत धीमी हो जाती है। यह इस बात पर निर्भर नहीं करता है कि बच्चा कितना इंटेलिजेंट है, बल्कि यह एक जेनेटिक कंडीशन है।

क्या है इसका इलाज

डिस्लेक्सिया का जड़ से कोई इलाज नहीं है, लेकिन कुछ दवाओं, थेरेपी व अन्य तकनीकों की मदद से इसके लक्षणों व गंभीरता को कंट्रोल किया जा सकता है। अगर समय रहते डिस्लेक्सिया का पता लगा लिया जाए तो इस स्थिति को गंभीर होने से रोका जा सकता है और मरीज की पढ़ने व लिखने आदि में मदद की जा सकती है।

अस्वीकरण: प्रिय पाठकों यह आर्ट‍िकल केवल सामान्य जानकारी और सलाह देता है। यह किसी भी तरह से चिकित्सा राय का विकल्प नहीं है। इसलिए अधिक जानकारी के लिए हमेशा किसी विशेषज्ञ या अपने चिकित्सक से परामर्श जरूर करें। thehealthsite.com इस जानकारी के लिए जिम्मेदारी का दावा नहीं करता है।