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Written By: Jitendra Gupta | Published : June 14, 2022 6:06 PM IST
थायराइड रोगियों के लिए बड़े काम की है कोविड वैक्सीन! स्टडी में खुलासा क्यों रोगियों के लिए हो सकती है फायदेमंद
हाइपोथायराइडिज्म एक ऐसी स्थिति है, जिसमें आपका थायराइड लेवल असंतुलित हो जाता है और इस बीमारी से जूझ रहे लोगों के लिए अब एक उम्मीद की किरण सामने आई है। जी हां, इन एक्टिवेटेड और mRNA कोविड वैक्सीन हाइपोथायराइडिज्म के उपचार में मरीजों के लिए सुरक्षित पाई गई है। ENDO 2022 में प्रस्तुत किए गए इस अध्ययन के शोधकर्ताओं ने पाया है कि ये वैक्सीन थायराइड के कामकाज में कोई ज्यादा उतार-चढ़ाव पैदा नहीं करती हैं और न ही इसके उपयोग से आपको अस्पताल में भर्ती होने की नौबत आती है।
यूनिवर्सिटी ऑफ हॉन्ग कॉन्ग के प्रोफेसर और अध्ययन के मुख्य शोधकर्ता डेविड टी.डब्लू. लुई का कहना है कि पहले किसी भी अध्ययन में कोविड वैक्सीन और अस्थिर थायराइड के बीच किसी भी प्रकार के संबंध को नहीं पाया गया है, खासकर उन रोगियों के बीच जिन्होंने हाइपोथायराइडिज्मके लिए थायराइड हार्मोन रिप्लेसमेंट ली थी।
लुई का कहना है कि हमारे इस शोध के निष्कर्ष हाइपोथायराइडिज्म के मरीजों को कोविड वैक्सीन लगवाने के लिए प्रोत्साहित करते हैं ताकि उन्हें कोविड से जुड़े गंभीर परिणामों से सुरक्षा प्राप्त हो सके।
अध्ययन के लिए टीम ने कोरोनावैक और mRNA कोविड वैक्सीन और फाइजर बायोएनटेक वैक्सीन जो कि इनएक्टिवेटेड थीं उनकी जांच की। कोरोनावैक में कोविड वायरस के मृत रूप का प्रयोग किया गया था। इस वैक्सीन को अलग-अलग देशों के वैक्सीनेशन अभियान में प्रयोग किया जा रहा है।
mRNA कोविड वैक्सीन शरीर की कोशिकाओं को ये सिखाती है कि कैसे प्रोटीन बनाया जाए, जो इम्यून रिस्पॉन्स को बढ़ानेका काम करे। वहीं फाइजर और माडर्ना mRNA कोविड वैक्सीन हैं।
शोधकर्ताओं ने हाइपोथायराइडिज्म के लिए लिवोथायरोक्सीन लेने वाले 47 हजार से ज्यादा लोगों को इस अध्ययन में शामिल किया, जिन्होंने कोविड वैक्सीन ली थी।
मरीजों को तीन समूहों में विभाजित किया गया, पहला जिन्होंने वैक्सीन नहीं ली थी, दूसरा जिन्होंने कोरोनावैक वैक्सीन ली थी और तीसरा जिन्होंने mRNA कोविड वैक्सीन ली थी।
टीम ने पाया कि जिन मरीजों ने किसी भी प्रकार की कोविड वैक्सीन ली थी उन्हें अपने लिवोथायरोक्सीन की डोज को न तो बढ़ाने की जरूरत पड़ी और न ही उन्हें डोज को कम करने की जरूरत हुई।