परेशान कर रहे हैं आई फ्लोटर्स ? तो अपनाएं ये उपाय

पढ़ने-लिखने और कंप्‍यूटर पर देर तक काम करने वालों को ज्‍यादा परेशान करतेे हैंं आई फ्लाेेटर्स।

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Written By: Yogita Yadav | Updated : July 22, 2018 3:00 PM IST

पढ़ने-लिखने और कंप्‍यूटर पर देर तक काम करने वाले लोगों में हाइमायोपिक की समस्‍या देखने में आ रही है। जिसे सामान्‍य भाषा में आई फ्लोटर्स कहा जाता है। फ्लोटर्स के लिए किसी इलाज की जरूरत नहीं होती पर इससे पीडि़त व्‍यक्ति इनके अचानक आंखों में आ जाने से परेशान हो जाता है। इसके लिए एंटी इन्फ्लेमेटरी आइड्रॉप का प्रयोग किया जा सकता है। पर यदि अचानक फ्लोटर्स की संख्या बढ़ जाये, तो तुरंत रेटिना की जांच करवानी चाहिए। कई बार रेटिनल डिटैचमेंट से भी यह समस्या हो सकती है।

क्‍या हैं आई फ्लोटर्स

आई फ्लोटर्स आंखों के भीतर घूमते हुए छोटे धब्बे हैं, जो अचानक किसी भी समय आँखों के आगे आ जाते हैं। जिससे कुछ पलों के लिए दृश्‍यता बाधित होती है। अमूमन ये आंखों के सामने त‍ब आते हैं जब आप कोई सफेद कागज पर लिखा कुछ पढ़ रहे होते हैं या नीला आसमान देख रहे होते हैं। हालांकि उस समय ये काफी इरिटेट करते हैं, पर इससे आंखों को कोई नुकसान नहीं पहुंचता। इससे पीडि़त लोग जल्‍दी ही इसे नजरंदाज करना या यूं कहें कि इसके साथ रहना सीख जाते हैं।

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क्‍यों बनते हैं आई फ्लाेेेटर्स 

जब हम पैदा होते हैं तब हमारी आंखों में विट्रीस जैल के रूप में स्थिर होते हैं। युवा होने तक यह आंखों में जैल के रूप में ही स्थिर रहते हैं। पर जैसे-जैसे उम्र बढ़ती है यह जैल घुलकर द्रव रूप में फैलने लगता है। जैल के जो तत्‍व पूरी तरह से घुल नहीं पाते वे छोटे-छोटे फ्लोटर्स का रूप ले लेते हैं। कई बारे ये पतले रेशे जैसे होते हैं, तो कभी वृत्‍ताकार और कभी मकड़ी के जाले की शेप में। यही जब तैरकर रेटिना के एरिया में आ जाते हैं तो दृश्‍यता बाधित करते हैं।

मुश्किल भरा हो सकता है फ्लोटर्स का बढ़ना

कई बार आई फ्लोटर्स काफी मात्रा में बढ़ जाते हैं एवं इसके साथ रोशनी की झलक या पास की नज़र कम होने लगती है। यह चिंता का विषय है। ऐसी स्थिति में तुरंत आई स्‍पेशलिस्‍ट की मदद लेनी चाहिए। लापरवाही करने पर यह नजर के लिए खतरा भी बन सकते हैं।

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आई फ्लोटर्स कम करने के उपाय 

  • आई फ्लोटर्स कम करने के लिए आंखों को आराम देना श्रेष्ठतम उपाय है। लम्बे समय तक काम करने के बाद आंखों को आराम देना बहुत जरूरी है। कुछ देर आंखें बंद करके आंखों की मांसपेशियों को आराम दें। ह‍थेलियों को रगड़ कर आंखों पर लगाना भी एक अच्‍छा उपाय है। ह‍थेलियों के ताप से आंखों को आराम मिलता है।
  • बंद आँखों के ऊपर गर्म पानी में भिगोया हुआ कपडा रखें एवं कनपटियों की मालिश करें। इससे तनाव दूर करने एवं आई फ्लोटर्स से निजात पाने में सहायता मिलती है। वैकल्पिक रूप से दोनों हथेलियों को रगडें एवं इनसे अपनी आँखों को ढकें। हथेलियों द्वारा पैदा की जाने वाली प्राकृतिक ऊर्जा तनाव को दूर करती है एवं थकी हुई आँखों को राहत प्रदान करती है।
  • आँखों का व्यायाम करने के लिए अपनी आँखों को गोलाकार मुद्रा में घुमाएं। पहले दोनों आँखों को क्‍लॉक वाइज और फि‍र एंटी क्‍लॉक वाइज घुमाएं। दिन में कम से कम दस बार यही मुद्रा दोहराएं।
  • पेन या पेंसिल की मदद से भी आंखों का व्यायाम किया जा सकता है। हाथों को पूरी लंबाई में खींच कर जितनी दूरी बने उतनी दूरी पर पेन या पेंसिल आंखों के सामने रखें। पेंसिल पर ध्यान केन्द्रित करें एवं धीरे-धीरे इसे आँखों की तरफ खींचें। निरंतर पेंसिल पर नज़र टिकाये रखें। इससे आपको आई फ्लोटर्स की समस्या से भी निजात प्राप्त होती है।

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करना होगा थोड़ा सा बदलाव

  • जीवनशैली में थोड़ा सा परिवर्तन आई फ्लोटर्स का इलाज करने में काफी मददगार साबित हो सकता है। आई फ्लोटर्स को कम करने के लिए टीवी देखना एवं कंप्यूटर पर काम करना कम करना होगा।
  • पर्याप्त नींद अवश्य लें। आँखों को पर्याप्त आराम देने के लिए सोने का समय निर्धारित कर लें। अच्‍छी नींद आई फ्लोटर्स को दूर करने में मददगार साबित होती है।
  • कैफीन एवं अल्कोहल का आँखों पर बुरा असर पड़ता है। इनका सेवन बंद करने की कोशिश करें।
  • आई फ्लोटर्स दूर करने के लिए एंटीऑक्सिडेंट्स  से भरपूर भोजन जैसे संतरे, स्ट्रॉबेरी, कीवी  हरी पत्तेदार सब्जियां एवं ग्रीन टी को अपने खानपान में शामिल करें। ये सभी चीजें  शरीर में मौजूद दूषित पदार्थों को साफ़ करने में मदद करती हैं। एंटीऑक्सिडेंट्स रेटिनल टिश्यूस को मजबूती प्रदान करके आँखों की रोशनी बढ़ाने एवं रक्त के संचार में बढ़ोत्तरी करने में भी मदद करते हैं। ओमेगा 3 फैटी एसिड युक्‍त खाद्य पदार्थ भी आंखों की सेहत के लिए अच्‍छे होते हैं।

चित्रस्रोत: shutterstock.

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