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80 वर्षीय मरीज का सफल Knee Replacement, जानें डायबिटीज, हार्ट डिजीज और बढ़ती उम्र में कैसे संभव हुआ घुटने का प्रत्यारोपण

80 वर्षीय राम सागर के घुटने का प्रत्यारोपण सफल रहा। उन्हें लंबे समय से घुटने में दर्द रहता था और चलना-फिरना मुश्किल हो गया था। इस स्थिति में डॉक्टरों ने Knee Replacement कराने को ही सबसे उपयुक्त इलाज बताया।

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Written By: Anju Rawat | Updated : July 13, 2026 8:47 PM IST

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Medically Verified By: Dr. Rajesh Kumar

क्या 80 साल की उम्र में घुटने का प्रत्यारोपण (Knee Replacement) हो सकता है? डायबिटीज, हार्ट डिजीज जैसी गंभीर बीमारियों में घुटने का प्रत्यारोपण संभव है? जब किसी बढ़ती उम्र, डायबिटीज या हृदय रोगियों को घुटनों में तेज दर्द होता है या चलना-फिरना मुश्किल हो जाता है, ऐसे में वे लंबे समय तक दवाइयां खाते रहते हैं। इन स्थितियों में ज्यादातर लोग Knee Replacement कराने में हिचकिचाते हैं। लेकिन, आपको जानकर हैरानी होगी कि 80 साल के राम सागर को कई गंभीर बीमारियां थीं, इसके बावजूद भी उन्होंने घुटने का प्रत्यारोपण कराया और सर्जरी सफल रही।

1 साल से हो रहा था गंभीर दर्द

राम सागर बताते हैं कि मैं पिछले डेढ़ साल से घुटनों के असहनीय दर्द से परेशान था। मेरा दर्द इतना बढ़ चुका था कि चलना-फिरना, सीढ़ियां चढ़ना और मॉर्निंग वॉक तक मुश्किल हो गया था। घुटनों के दर्द की वजह से मेरी पूरी दिनचर्या ही प्रभावित हो गई थी। ऐसे में डॉक्टरों ने मुझे घुटने का प्रत्यारोपण कराना ही इसका सबसे बेहतर उपचार बताया।

सही मेडिकल प्लानिंग से सफल हुई सर्जरी

शैल्बी इंटरनेशनल हॉस्पिटल, गुरुग्राम के ऑर्थोपेडिक्स, जॉइंट रिप्लेसमेंट और स्पाइन सर्जरी विभाग के चेयरमैन डॉ. राजेश कुमार वर्मा बताते हैं कि सिर्फ उम्र या गंभीर बीमारियों के आधार पर ही तय नहीं किया जा सकता कि मरीज की सर्जरी नहीं हो सकती है। सबसे जरूरी बात होती है कि मरीज की मेडिकल कंडीशन कितनी स्थिर है और सर्जरी से पहले उसका सही तरीके से जांच की गई है या नहीं।

राम सागर को टाइप-2 डायबिटीज, हाई बीपी, हाइपोथायरायडिज्म और गंभीर कोरोनरी आर्टरी डिजीज जैसी कई स्वास्थ्य समस्याएं थीं। उनकी तीन बार एंजियोप्लास्टी हो चुकी थी और हृदय में स्टेंट लगा था। इतना ही नहीं, उनकी ब्लड-थिनिंग की दवाइयां भी चल रही थीं। इन सभी की वजह से उन्हें पहले सर्जरी न करने की सलाह दी गई थी, लेकिन बाद में उनकी पूरी जांच की गई तो घुटने का प्रत्यारोपण करवाना सुरक्षित माना गया।

सर्जरी से पहले इन बातों का रखा गया ध्यान

  • सर्जरी से पहले मरीज की सेहत की पूरी जांच की गई थी।
  • कार्डियोलॉजिस्ट ने उनके हृदय की स्थिति की जांच की और ब्लड-थिनिंग दवाइयों को भी मैनेज किया गया।
  • डायबिटीज और ब्लड प्रेशर को भी नियंत्रित रखा गया।
  • घुटने के प्रत्यारोपण की पूरी प्रक्रिया ऑर्थोपेडिक गाइडलाइंस के अनुसार की गई थी।

डॉ. राजेश कुमार वर्मा बताते हैं कि राम सागर को अर्थराइटिस पूरे घुटने में नहीं, बल्कि सिर्फ एक हिस्से तक सीमित था। ऐसे में डॉक्टरों ने घुटने की हड्डियों और लिगामेंट्स को सुरक्षित रखते हुए यूनिकॉन्डिलर नी रिप्लेसमेंट (Unicondylar Knee Replacement) किया। इस प्रक्रिया में सिर्फ घुटने के खराब हिस्से को ही बदला जाता है। इस सर्जरी के दौरान ऑर्थोपेडिक सर्जन, कार्डियोलॉजिस्ट, एनेस्थेसियोलॉजिस्ट और रीहैबिलिटेशन विशेषज्ञों ने मिलकर मरीज का इलाज किया।

क्या हर मरीज के सर्जरी का तरीका अलग होता है?

डॉ. राजेश कुमार वर्मा बताते हैं कि अगर अर्थराइटिस पूरे घुटने में नहीं फैला है, तो सिर्फ खराब हिस्से को बदला जा सकता है। इसमें स्वस्थ हिस्से को सुरक्षित रखा जा सकता है। लेकिन, यह पूरी तरह से मरीज की स्थिति और जांच रिपोर्ट पर निर्भर करता है। हालांकि, मेडिकल जोखिमों को नजरअंदाज नहीं किया जा सकता है।

Disclaimer: 80 वर्षीय राम सागर के घुटने का प्रत्यारोपण पूरी तरह से सुरक्षित रहा। हालांकि, वह डायबिटीज और हृदय रोknee गों से भी पीड़ित थे। इसके बावजूद सही गाइडलाइंस की मदद से उनकी सर्जरी सफल रही। अगर आपको भी लंबे समय से घुटनों में दर्द है, तो इसे नजरअंदाज न करें और एक बार डॉक्टर से मिलें। जरूरत पड़ने पर आप डॉक्टर की सलाह पर सर्जरी करवा सकते हैं।