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महिलाओं की ये अंदरूनी समस्या उनके दिल की बिगाड़ रही सेहत! स्टडी में खुलासा ये बीमारी बना रही महिलाओं के दिल को कमजोर

महिलाओं की ये अंदरूनी समस्या उनके दिल की बिगाड़ रही सेहत! स्टडी में खुलासा ये बीमारी बना रही महिलाओं के दिल को कमजोर

इंटरनेशनल वुमेन्स डे से पहले एप्पल ने महिलाओं के स्वास्थ्य पर अध्ययन किया और अनियमित मासिक चक्र, पीसीओएस और ह्रदय स्वास्थ्य के बीच संबंध को तलाशने की कोशिश की।

पोलीसिस्टिक ओवेरियन सिंड्रोम (पीसीओएस) इन दिनों उन महिलाओं में होने वाली एक समस्या है, जो कि बच्चे पैदा करने वाली उम्र में हैं (रिप्रोडक्टिव एज)। इस स्थिति में ओवरी छोटे-छोटे रक्तस्त्रावी कूप का निर्माण करने लगती है और गंभीर मामलों में ओवरी अंडों को बनाने में फेल हो जाती है। पीसीओएस के सबसे आम लक्षणों में शामिल है अनियमित मासिक चक्र, चेहरे पर बालों की ग्रोथ और वजन का बढ़ना शामिल है। इस विषय पर बहुत से अध्ययन हो चुके हैं और चल भी रहे हैं ताकि इस बीमारी के बारे में अधिक महिलाओं को जागरूक किया जा सके और महिलाओं के शरीर पर इसके प्रभाव के बारे में बताया जा सके।

किन-किन बीमारियों की वजह बनता है पीसीओएस

हाल ही में महिलाओं के स्वास्थ्य के इर्द-गिर्द अपने अध्ययन के निष्कर्षों को एप्पल ने प्रकाशित किया है। इंटरनेशनल वुमेन्स डे से पहले एप्पल ने महिलाओं के स्वास्थ्य पर अध्ययन किया और अनियमित मासिक चक्र, पीसीओएस और ह्रदय स्वास्थ्यके बीच संबंध को तलाशने की कोशिश की।

ये चीजें बढ़ाती है जोखिम कारक

अध्ययन से यह भी पता चला है कि पीसीओएस कई अन्य स्वास्थ्य स्थितियों का कारण बन सकता है, जो महिलाओं के स्वास्थ्य को बिगाड़ने का काम करती है। शोध के अनुसार, पीसीओएस डायबिटीज, हाई ब्लड प्रेशर, हाई कोलेस्ट्रॉल, मोटापा और हृदय रोग के बढ़ते जोखिम का कारण हो सकता है।

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इतने लोगों पर हुई स्टडी

अध्ययन के शुरुआती निष्कर्ष शामिल महिलाओं के बीच हृदय रोगों के प्रसार के बारे में बात करते हैं। पीसीओएस की कुल मरीजों में से 61 प्रतिशत महिलाएं मोटापे का शिकार थीं। हालांकि, इनमें से सिर्फ 5.6 फीसदी महिलाओं की ही धड़कन अनियमित होने की समस्या थी। जबकि जिन महिलाओं को पीसीओएस नहीं था, उनमें अनियमित दिल की धड़कन जैसी कोई सूनी नहीं मिली। बात करें पारिवारिक इतिहास की तो कुल महिलाओं में से सिर्फ 6.2 प्रतिशत महिलाओं का ही बीमारी से जुड़ा पारिवारिक इतिहास था।

क्या कहते हैं शोधकर्ता

हार्वर्ड टीएच चैन स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ की डॉ श्रुति महालिंगैया ने कहा, "हमारा अध्ययन महिलाओं को अपने दैनिक जीवन के बारे में जानने और उन्हें सशक्त बनाने में वैज्ञानिक डेटा का योगदान देता है।

हार्वर्ड टीएच चैन स्कूल ऑफ पब्लिक हेल्थ, द नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ इंवायरमेंटल हेल्थ सांइसेज और एप्पल ने साथ मिलकर ये अध्ययन किया है और ये अध्ययन नवंबर 2019 से दिसंबर 2021 के बीच महिलाओं पर किया गया था। इस अध्ययन में 37 हजार से ज्यादा महिलाएं शामिल हुई थीं, जिसमें से 12 फीसदी को पीसीओएस था। अध्ययन से प्राप्त डेटा के मुताबिक, पीसीओएस 20 से 30 साल की महिलाओं के बीच अधिकतर पाया जाता है। हालांकि ये अध्ययन तब शुरू हुआ था, जब ये महिलाएं किशोरावस्था में थीं क्योंकि इनमें 14 से 35 साल के बीच ही बीमारी का निदान किया गया था।

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