लॉन्ग कोविड सिंड्रोम की असल वजह आई सामने, शोधकर्ताओं ने बताया शरीर में एक वजह से लोग हो रहे शिकार

एक शोध में शोधकर्ताओं ने पाया कि हेल्दी लोगों की तुलना में लॉन्ग कोविड सिंड्रोम से पीड़ित रोगियों के ब्लड क्लॉट बनने की दर काफी अधिक थी। जानें आखिर क्या है वजह।

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Written By: Jitendra Gupta | Published : August 18, 2021 2:43 PM IST

भले ही पूरी दुनिया में कोविड वैक्सीनेशन का काम बहुत तेजी से चल रहा हो लेकिन कोरोना का खतरा टला नहीं है। कोरोना से ठीक होने के बाद भी लोग कई जटिलताओं का शिकार हो रहे हैं। हाल ही में हुए एक शोध में इस बात का खुलासा हुआ है कि लॉन्ग कोविड सिंड्रोम वाले मरीजों को रक्त के थक्के जमने से बचने के लिए कई उपाय करने पड़ेंगे, जो उन्हें लक्षणों को कम करने में मदद कर सकते हैं। लॉन्ग कोविड सिंड्रोम के लक्षण हैं शारीरिक फिटनेस में कमी और बेवजह की थकान रहना।

शोधकर्ताओं ने क्या पाया

शोधकर्ताओं ने इस अध्ययन में पाया है कि कोरोना के गंभीर मामलों में खतरनाक तरीके के ब्लड क्लॉट देखे गए हैं, जिसकी जानकारी बहुत कम है। ये लक्षण प्रारंभिक संक्रमण के ठीक होने के बाद कुछ हफ्तों से लेकर कुछ महीनों तक रह सकते हैं और दुनिया भर में लाखों लोगों को प्रभावित कर सकते हैं।

कहां हुआ ये शोध

आयरलैंड की आरसीएसआई यूनिवर्सिटी ऑफ मेडिसिन एंड हेल्थ साइंसेज के शोधकर्ताओं ने लॉन्ग कोविड सिंड्रोम के लक्षणों वाले 50 रोगियों के स्वास्थ्य की जांच की ताकि बेहतर ढंग से समझा जा सके कि क्या असामान्य रूप से बनने वाले ब्लड क्लॉट रोगियों के लिए मुश्किलें खड़ी कर सकते हैं।

शोधकर्ताओं ने पाया कि हेल्दी लोगों की तुलना में लॉन्ग कोविड सिंड्रोम से पीड़ित रोगियों के ब्लड क्लॉट बनने की दर काफी अधिक थी। ये क्लॉट उन रोगियों में अधिक थे, जो शुरुआत में ही कोविड -19 संक्रमण के साथ अस्पताल में भर्ती हुए थे। शोधकर्ताओं ने यह भी पाया कि जो लोग घर पर रहकर कोरोना नियमों का पालन कर रहे थे,, उनमें भी ब्लड क्लॉट बनने की संभावना बहुत ज्यादा थी।

कहां प्रकाशित हुआ अध्ययन

जर्नल ऑफ थ्रोम्बोसिस एंड हेमोस्टेसिस में प्रकाशित इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने टीम ने पाया कि ब्लड क्लॉट बनने का सीधा संबंध लॉन्ग कोविड सिंड्रोमके अन्य लक्षणों से होता है, जैसे कि आपकी शारीरिक फिटनेस में कमी और थकान रहना। फिर चाहे आपके शरीर पर दिखाई देने वाले इंफ्लेमेशन के निशान सभी सामान्य स्तर पर क्यों न लौट आए हो लेकिन ब्लड क्लॉट की क्षमता अभी भी लॉन्ग कोविड रोगियों में मौजूद रहती है।

आयरिश सेंटर फॉर वैस्कुलर बायोलॉजी में डॉक्टरेट की छात्रा और अध्ययन की प्रमुख लेखक डॉ हेलेन फोगार्टी ने बताया कि चूंकि ब्लड क्लॉट की संभावना बहुत ज्यादा होती है लेकिन सूजन के निशान सामान्य हो जाते हैं, जो बताते हैं कि क्लॉटिंग सिस्टम लॉन्ग कोविड सिंड्रोम के मूल कारण में शामिल हो सकता है।

डेली मेल के मुताबिक, एक अलग अध्ययन में ब्रिटेन के कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय की एक टीम ने पाया कि साइटोकिन्स नाम के छोटे प्रोटीन अणु भी लॉन्ग कोविड सिंड्रोम से संबंधित हो सकते हैं।

साइटोकिन्स, संक्रमण के जवाब में शरीर द्वारा बनाए जाते हैं, जो अक्सर संक्रमण के कुछ महीनों बाद किसी व्यक्ति के शरीर में पाए जाते हैं।

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