कोविड वैक्सीनेशन के बाद मस्तिष्क में होने वाली दुर्लभ ब्लड क्लॉटिंग के इलाज से जुड़ी नयी जानकारियां आयीं सामने, नयी स्टडी में दिया गया विवरण

वीआईटीटी की सबसे सामान्य और गंभीर अभिव्यक्ति सीवीटी है, जिसमें मस्तिष्क से रक्त निकालने वाली नसें अवरुद्ध हो जाती हैं। (Blood Clotting In The Brain After COVID-19 Vaccination)

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Written By: Sadhna Tiwari | Updated : August 16, 2021 7:01 AM IST

Blood Clotting In The Brain After COVID-19 Vaccination: कोरोना संक्रमण के खिलाफ सुरक्षा और इससे बचाव के तौर पर फिलहाल कोविड-19 वैक्सीन ही सबसे कारगर और सुरक्षित तरीका माना जा रहा है। हालांकि, अन्य सभी वैक्सीन्स की तरह ही कोविड का टीका लगवाने के बाद भी लोगों को हल्का बुखार, इंजेक्शन वाली जगह पर सूजन जैसी समस्याएं हो रही हैं। लेकिन, कुछ मामलों में दिमाग में खून के थक्के बनने की स्थिति भी देखी गयी है। इस तरह से खून के थक्के बनना खतरनाक साबित हो सकता है डॉक्टरों के अनुसार इससे स्ट्रोक और मृत्यु का खतरा भी बढ़ता है। अब, शोधकर्ताओं को इसी ब्लड क्लॉटिंग की समस्या के इलाज से जुड़ी कुछ विशेष जानकारियां हाथ लगी हैं। (Blood Clotting In The Brain After COVID-19 Vaccination Treatment In Hindi)

कोरोना का टीका लेने के बाद क्यों होती है ब्रेन में ब्लड क्लॉटिंग

यूनिवर्सिटी कॉलेज लंदन (University College London) के शोधकर्ताओं ने कोविड -19 टीकाकरण के बाद मस्तिष्क शिरापरक घनास्त्रता (cerebral venous thrombosis)) वाले लोगों का अध्ययन किया, ताकि ऐसे रोगियों का निदान और उपचार करने की कोशिश कर रहे चिकित्सकों के लिए एक स्पष्ट मार्गदर्शिका प्रदान की जा सके। द लैंसेट (The Lancet) साइंस जर्नल में प्रकाशित इस स्टडी में  सीवीटी की विशेषताओं का सबसे विस्तृत विवरण है, जब यह नई स्थिति वैक्सीन-प्रेरित प्रतिरक्षा थ्रोम्बोटिक थ्रोम्बोसाइटोपेनिया यानि वीआईटीटी  के कारण होता है। वीआईटीटी एक ऐसी स्थिति है जो नसों की रुकावट और प्लेटलेट्स, रक्त घटकों की एक उल्लेखनीय कमी की विशेषता है, जो रक्त के थक्के प्रणाली का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। वीआईटीटी की सबसे सामान्य और गंभीर अभिव्यक्ति सीवीटी है, जिसमें मस्तिष्क से रक्त निकालने वाली नसें अवरुद्ध हो जाती हैं।

स्टडी में टीकाकरण के बाद वीआईटीटी से जुड़े सीवीटी वाले 70 रोगियों पर विस्तार से नजर डाली गई, जिनकी तुलना तब सीवीटी वाले 25 रोगियों से की गई थी, लेकिन वीआईटीटी के सबूत के बिना। अध्ययन यूसीएल और दो अन्य यूरोपीय साइटों पर शुरूआती काम के आधार पर विशेषज्ञ हेमेटोलॉजी पैनल द्वारा अब तक स्थापित उपचार के तीन सिद्धांतों के लिए समर्थन प्रदान करता है।

गैर-हेपरिन-आधारित थक्कारोधी का उपयोग, इस स्थिति में शामिल असामान्य एंटीबॉडी के स्तर को कम करने की कोशिश करने के लिए उपचार दें, और प्लेटलेट ट्रांस़फ्यूजन देकर प्लेटलेट काउंट को सामान्य स्तर तक वापस लाने की कोशिश करने की रणनीति से बचें।

इस स्थिति में मरीजों को जल्द मिल सकती है अस्पताल से छुट्टी

ऑक्सफोर्ड में जॉन रैडक्लिफ अस्पताल में सलाहकार न्यूरोलॉजिस्ट डॉ. एलेस्टेयर वेब ने कहा कि हमने पाया कि जिन रोगियों को अंत:शिरा इम्युनोग्लोबुलिन दिया गया था, वह उपचार जिसमें शरीर में असामान्य एंटीबॉडी के प्रभाव को कम करने की कोशिश करने के लिए सामान्य एंटीबॉडी से भर जाता है। उनका अस्पताल से डिस्चार्ज होने और एक स्वतंत्र जीवन जीने में सक्षम होने की अधिक संभावना थी।

वहीं, दूसरी ओर, वीआईटीटी से जुड़े सीवीटी वाले रोगियों में प्लेटलेट ट्रांसफ्यूजन खराब परिणाम से जुड़े थे। यद्यपि अवलोकन संबंधी डेटा इस उपचार दृष्टिकोण से नुकसान साबित नहीं कर सकते हैं, अध्ययन उस चिंता के लिए समर्थन प्रदान करता है जो पहले से ही प्लेटलेट ट्रांसफ्यूजन के संभावित नुकसान के बारे में उठाई गई है।हालांकि, शोधकतार्ओं का यह भी सुझाव है कि अंत:शिरा इम्युनोग्लोबुलिन जैसे कुछ उपचार बेहतर परिणामों से जुड़े हुए प्रतीत होते हैं, लेकिन अवलोकन अध्ययन के निष्कर्षों में बहुत अधिक पढ़ने के प्रति सावधानी बरतते हुए कहा कि उपचार के बारे में विश्वसनीय सबूत केवल एक या²च्छिक नैदानिक परीक्षण में प्राप्त किया जा सकता है।

(आईएएनएस)

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