स्कूल खुलने से सुधर सकता है बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य, स्टडी में खुलासा पहले से बेहतर होगा बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य

एक अध्ययन में इस बात का खुलासा हुआ है कि वे बच्चे, जो अपने स्कूल के शेड्यूल पर लौटने लगे हैं इससे उनकी गतिहीन जीवनशैली सकारात्मकता की ओर लौट रही है।

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Written By: Jitendra Gupta | Updated : September 18, 2021 7:33 PM IST

कोरोना महामारी के दौरान भले ही माता-पिता दिल पर पत्थर रखकर बच्चों को स्कूल भेज रहे हों लेकिन वह इस बात से अंजान हैं कि इससे उनके बच्चों का शेड्यूल पहले की तुलना में बेहतर हो सकता है। हाल ही में हुए एक अध्ययन में इस बात का खुलासा हुआ है कि वे बच्चे, जो अपने स्कूल के शेड्यूल पर लौटने लगे हैं इससे उनकी गतिहीन जीवनशैली सकारात्मकता की ओर लौट रही है। इस नए अध्ययन के मुताबिक, बच्चों में महामारी से पहले की नींद के पैटर्न की तुलना में अब अधिक किशोर सही मात्रा में नींद ले रहे हैं।

क्या कहता है शोध

शोधकर्ताओं के अनुसार, स्कूल के पुराने शेड्यूल पर लौटने से बच्चों में बेहतर नींद की आदतों को प्रोत्साहित करने से किशोरों के तनाव को कम करने और संकट के समय में सामना करने की उनकी क्षमता में सुधार करने में मदद मिल सकती है।

अध्ययन से प्राप्त निष्कर्षों से ये जानकारी सामने आई है कि महामारी के दौरान सुबह के स्कूल जाने के समय, स्कूल शुरू होने में देरी और पढ़ने-लिखने संबंधी गतिविधियां समाप्त हो जाने के कारण किशोरों में देर रात तक जागनेऔर सुबह में देर तक बिस्तर पर सोते रहने की प्रवृत्ति काफी हद तक बढ़ गई थी, जो कहीं न कहीं उनके संपूर्ण स्वास्थ्य को प्रभावित कर रही थी।

स्कूल ने खुलने से बिगड़ा बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य

मैकगिल विश्वविद्यालय के प्रोफेसर और अध्ययन के प्रमुख लेखक रेउत ग्रुबर ने बताया कि महामारी के दौरान स्कूल शुरू होने में देरी ने बच्चों के मानसिक स्वास्थ्य को प्रभावित किया। लेकिन अब स्कूल खुल जाने से छात्रों के मानसिक स्वास्थ्य को बेहतर बनाने में मदद मिल सकती है।

शोधकर्ताओं ने पाया कि, महामारी के दौरान किशोरों के जागने और सोने का समय लगभग दो घंटे बाद बदल गया था और बहुत से किशोर और भी अधिक देर तक सोते रहते थे

बच्चों का सुधरेगा स्वास्थ्य

स्कूल खुलने से दिनचर्या में होने वाले इन परिवर्तनों का मतलब है कि किशोरों के पास अब अपना होमवर्क पूरा करने के लिए सप्ताहांत का समय होगा, जिस कारण वश उन्हें अपने होमवर्क को पूरा करने के लिए नींद का त्याग करना ही पड़ेगा, जो उनके स्वास्थ्य पर अच्छा प्रभाव डालेगा।

ग्रुबर ने ये भी कहा कि सोने के लिए कम घंटे और सोते समय उच्च स्तर की उत्तेजना तनाव के उच्च स्तर से जुड़ी हुई है, जबकि लंबी नींद और सोते समय उत्तेजना के निचले स्तर को कम तनाव से जोड़ा गया है।

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