स्टडी का दावा, कोरोना मरीजों में पेट से संबंधित ये गंभीर समस्या लंबे समय तक कर सकती है परेशान
हाल ही में हुई एक स्टडी में यह बात सामने आई है कि कोरोनावायरस से ठीक होने के बाद कुछ लोगों में इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम (Irritable Bowel Syndrome) या फिर लंबे समय तक नजर आने वाले गैस्ट्रोइंटेस्टिनल से संबंधित लक्षण नजर आ सकते हैं।
हाल ही में हुई एक स्टडी में यह बात सामने आई है कि कोरोनावायरस से ठीक होने के बाद कुछ लोगों में इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम (Irritable Bowel Syndrome) या फिर लंबे समय तक नजर आने वाले गैस्ट्रोइंटेस्टिनल से संबंधित लक्षण नजर आ सकते हैं। संभवत: कोरोना से संबंधित इस तरह का अध्ययन दुनिया में पहली बार किया गया है। ये समस्या उन लोगों में अधिक नजर आ सकती है, जिन्हें कोरोना संक्रमित होने पर स्वाद-सुगंध में कमी महसूस हुई थी। वारयस से लड़ने के दौरान एंग्जायटी और स्ट्रेस लेवल बढ़ गया था। संक्रमित होने के शुरुआती दिनों में गैस्ट्रोइंटेस्टिनल समस्याओं की शिकायत हुई थी। यदि आपमें कोरोना संक्रमित होने के दौरान ये लक्षण (Corona symptoms) नजर आए थे, तो काफी हद तक कोरोना से ठीक होने के बाद जठरांत्र (Gastrointestinal Symptoms) से संबंधित कुछ लक्षण और समस्याएं नजर आ सकती हैं।
यह अध्ययन लखनऊ स्थित संजय गांधी पोस्टग्रैजुएट साइंसेज के शोधकर्ताओं और बांग्लादेश के कुछ साइंटिस्ट के साथ मिलकर संचालित किया गया। इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने कोरोनावायरस से ठीक हो चुके मरीजों (Covid-19 Patient) में इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम और इससे संबंधित जोखिमों के मौजूद होने की बात कही। इस अध्ययन को लखनुऊ के एसजीपीजीआई के गैस्ट्रोएन्टरोलॉजी विभाग के प्रो. उदय घोषाल, माइक्रोबायोलॉजी विभाग की हेड प्रो. उज्जला घोषाल और बांग्लादेश के शेख रसेल नेशनल गैस्ट्रोलिवर इंस्टीट्यूट एंड हॉस्पिटल आदि के लीडरशीप में किया गया। इस अध्ययन के लिए शेख रसेल नेशनल हॉस्पिटल (बांग्लादेश) की तरफ से मुख्य कोलैबोरेटर डॉ. एम मसुदुर रहमान थे।
शोधकर्ताओं का कहना है कि जब वर्ष 2020 में कोरोनावायरस महामारी की शुरुआत हुई थी तब हमने अनुमान के अधार पर ये कहा था कि कोरोना लोगों में इर्रिटेबल बाउल सिंड्रोम का कारण बन सकता है। तब ये बात अमेरिकन जर्नल ऑफ गैस्ट्रोएन्टरोलॉजी में प्रकाशित हुई थी। फिलहाल, दुनिया भर में हमने इस बात को डाटा के साथ साबित करके दिखा दिया है।